भारत का कंपोजिट PMI सितंबर में उछलकर 56.5 पर, जून के बाद सबसे ऊँचा स्तर
सारांश
मुख्य बातें
भारत के निजी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियाँ सितंबर 2026 में उल्लेखनीय रूप से तेज़ हुई हैं — HSBC फ्लैश इंडिया कंपोजिट PMI 56.5 पर पहुँच गया, जो अगस्त के 54.3 से काफी ऊपर है और जून 2026 के बाद का सर्वोच्च स्तर है। 23 सितंबर को जारी यह डेटा मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज़ — दोनों क्षेत्रों में एक साथ हुई मज़बूत वृद्धि को दर्शाता है।
मुख्य आँकड़े और क्षेत्रवार प्रदर्शन
HSBC फ्लैश इंडिया कंपोजिट PMI में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज़ दोनों उप सूचकांकों का डेटा शामिल किया जाता है। आँकड़ों के अनुसार, सितंबर में नए ऑर्डर, रोज़गार और कारोबारी भरोसे में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि महंगाई का दबाव अपेक्षाकृत कम रहा। इंडेक्स अपने दीर्घकालिक औसत से भी ऊपर चला गया है, जो चक्रीय गति की मज़बूती का संकेत है।
मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में बिक्री वृद्धि सात महीनों के उच्चतम स्तर पर रही और यह सर्विस कंपनियों की तुलना में अधिक तीव्र रही। एल्युमीनियम उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान, खाद्य एवं पेय पदार्थ, फार्मास्युटिकल उत्पाद और नए मॉडलों की माँग में विशेष तेज़ी आँकड़ों में दर्ज हुई।
विशेषज्ञ की राय: भंडारी का विश्लेषण
HSBC की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, "मैन्युफैक्चरिंग में मज़बूती के कारण प्राइवेट सेक्टर की गतिविधियों में तेज़ी आई है। आउटपुट और नए घरेलू ऑर्डर तेज़ी से बढ़े हैं। मध्य पूर्व में फिर से बढ़े तनाव के कारण कंपनियों ने अनिश्चितताओं से निपटने के लिए बफर बनाना शुरू कर दिया है।"
भंडारी ने यह भी बताया कि इनपुट की खरीद में तेज़ी आई है और तैयार माल के स्टॉक का इंडेक्स अब साढ़े 11 साल के उच्चतम स्तर पर है। उन्होंने आगाह किया कि मैन्युफैक्चरर्स के लिए कीमतों का दबाव बढ़ा है और आउटपुट की कीमतों में महंगाई तेज़ी से बढ़ रही है, जो मार्जिन बचाने की नई कोशिश का संकेत है।
सर्विस क्षेत्र और माँग की प्रवृत्तियाँ
सर्विस क्षेत्र की कंपनियों ने बताया कि सक्रिय मार्केटिंग प्रयासों की बदौलत नए ऑर्डर मिलने में मदद मिली। सर्वेक्षण के गुणात्मक हिस्से में प्रॉपर्टी, ट्रांसपोर्ट सर्विसेज़ और नई ट्रैवल बुकिंग के लिए अधिक माँग का उल्लेख है — जो उपभोक्ता विश्वास में सुधार का संकेत है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर कई अर्थव्यवस्थाएँ मंदी की आशंका से जूझ रही हैं और मध्य पूर्व के भू राजनीतिक तनाव आपूर्ति शृंखलाओं को प्रभावित कर रहे हैं।
रोज़गार और कारोबारी भरोसे पर असर
सितंबर में कुल रोज़गार में मज़बूत बढ़ोतरी दर्ज की गई, क्योंकि कंपनियों ने लगातार बढ़ते आउटपुट और नए ऑर्डर को पूरा करने के लिए स्टाफिंग क्षमता विस्तारित की। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज़ — दोनों क्षेत्रों में नौकरियाँ पैदा हुईं और विस्तार की दरें लगभग समान रहीं।
कारोबारी भरोसे में भी उल्लेखनीय सुधार आया, हालाँकि भंडारी ने मध्य पूर्व से जुड़े भू राजनीतिक अनिश्चितता को निकट भविष्य का एक प्रमुख जोखिम बताया।
आगे क्या
PMI का यह उछाल भारत की घरेलू माँग की लचीलापन को रेखांकित करता है। विश्लेषकों की नज़र अब अक्टूबर के अंतिम PMI आँकड़ों, RBI की अगली मौद्रिक नीति समीक्षा और त्योहारी सीज़न की खपत पर होगी — जो यह तय करेंगे कि यह तेज़ी टिकाऊ है या अल्पकालिक।