पराली जलाना वाहनों-पटाखों से 100 गुना अधिक प्रदूषक: पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने 7 नवंबर 2026 को गोंडा में वायु प्रदूषण पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए दावा किया कि पराली जलाने से उत्पन्न प्रदूषण दिवाली के पटाखों, ईंट-भट्ठों और औद्योगिक गतिविधियों के संयुक्त प्रदूषण से 100 गुना अधिक है। उन्होंने प्रशासन और सरकार पर पराली नियंत्रण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में विफलता का आरोप लगाया।
प्रदूषण की गंभीरता और बृजभूषण के दावे
बृजभूषण शरण सिंह के अनुसार, राज्य और देश में प्रदूषण की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। उन्होंने कहा, 'एक बीघे खेत में पराली जलाने से जितना धुआं निकलता है, उतना धुआं एक वाहन पूरे साल में भी नहीं छोड़ता।' यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर भारत में फसल कटाई का मौसम चल रहा है और पराली जलाने की घटनाएं चरम पर हैं।
पूर्व सांसद ने बताया कि शाम के समय ग्रामीण इलाकों से गुजरने पर 'चारों तरफ आग लगी होने' जैसा दृश्य दिखता है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब पराली को उत्तर भारत की वायु गुणवत्ता के लिए प्रमुख खतरा बताया गया है — विशेषज्ञ और पर्यावरण संस्थाएं वर्षों से यह मुद्दा उठाते आए हैं।
प्रशासनिक निष्क्रियता पर सवाल
बृजभूषण सिंह ने कहा कि पराली जलाने पर रोक के लिए नियम और कानून तो मौजूद हैं, परंतु उनका प्रभावी पालन नहीं कराया जा रहा। उन्होंने कहा कि प्रशासन चाहे तो पराली जलाने के 15 से 20 दिन बाद भी उपग्रह या ड्रोन तकनीक से किस खेत में पराली जलाई गई, यह पता लगाया जा सकता है। उनके अनुसार, 'छोटे से बड़े स्तर तक के अधिकारियों में इस गंभीर समस्या को लेकर चिंता दिखाई नहीं देती।'
उन्होंने फैक्ट्रियों, वाहनों और ईंट-भट्ठों के विरुद्ध भी कड़े कदम उठाने की माँग की। साथ ही आरोप लगाया कि पुरानी गाड़ियाँ हटाने की नीति से उद्योगपतियों और नई गाड़ियों की बिक्री को लाभ पहुँचाने की आशंका है।
मिट्टी की उर्वरता पर असर और समाधान
पूर्व सांसद ने पराली की आग से भूमि की उपजाऊ ऊपरी परत को होने वाले नुकसान पर भी ध्यान दिलाया। उनका कहना था कि पराली जलाने से जमीन की उर्वरता क्षतिग्रस्त होती है, जो दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता के लिए घातक है।
इस समस्या से निपटने के लिए उन्होंने किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाने और उन्हें ऐसे कृषि यंत्र उपलब्ध कराने पर जोर दिया जिनसे पराली को खेत में ही मिलाया जा सके — जो पराली को खाद में बदलने का पर्यावरण-हितैषी विकल्प है।
आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ने की आशंका
बृजभूषण सिंह ने चेतावनी दी कि धान की कटाई में देरी के कारण आने वाले दिनों में पराली जलाने की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। जैसे-जैसे फसल कटती जाएगी, किसान बड़े पैमाने पर पराली जलाना शुरू कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन को अभी से प्रभावी कदम उठाने चाहिए ताकि स्थिति और विकराल न हो। विशेषज्ञों का भी मानना है कि देरी से कटाई और सर्दी की शुरुआत का संयोग प्रदूषण संकट को और गहरा कर सकता है।