मनेर एनकाउंटर: तेजस्वी यादव और रोहिणी आचार्य का बिहार सरकार पर हमला, 'एनकाउंटर संस्कृति बंद हो'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव और रोहिणी आचार्य ने 7 नवंबर 2026 को बिहार सरकार और पुलिस पर तीखा हमला बोला, जब पटना जिले के मनेर में कथित मुठभेड़ में तीन लोगों की मौत की खबर सामने आई। स्थानीय ग्रामीणों ने इस मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
एक्स पर तेजस्वी यादव का हमला
तेजस्वी यादव ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बिहार पुलिस और मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने लिखा, 'अपनी जान की जिम्मेदार जनता खुद होगी... मुख्यमंत्री लगवा दें हर जगह बोर्ड।' तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बिहार पुलिस आम लोगों को घर में घुसकर गोली मार रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब अपराधी, पुलिस और मुख्यमंत्री 'बेलगाम अपराध' को लेकर घिरते हैं, तो कथित तौर पर ध्यान भटकाने के लिए किसी विशेष जाति के लोगों का एनकाउंटर किया जाता है। तेजस्वी ने मुख्यमंत्री को सीधे निशाने पर लेते हुए उन पर 'हत्या के आरोपी' और 'आपराधिक प्रवृत्ति' के होने का आरोप लगाया, जो राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत तीखा बयान माना जा रहा है।
रोहिणी आचार्य ने माँगी न्यायिक जाँच
राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की पुत्री और सारण लोकसभा क्षेत्र से पिछला लोकसभा चुनाव लड़ चुकीं रोहिणी आचार्य ने भी एक्स पर पोस्ट कर मनेर मुठभेड़ की कड़ी निंदा की। उन्होंने लिखा कि 'एनकाउंटर संस्कृति' बंद होनी चाहिए।
रोहिणी ने इस घटना को बिहार में कानून के राज के दावे पर काला धब्बा बताया और इसे 'सम्राट सरकार' द्वारा जारी 'पुलिसिया दमन' का एक और मामला करार दिया। उनका तर्क था कि अपराधियों को सजा देने का अधिकार अदालत को है, न कि पुलिस को, और कथित एनकाउंटर के ज़रिये सरकार संविधान और मानवाधिकारों का खुलेआम उल्लंघन कर रही है। रोहिणी ने पूरे मामले की न्यायिक जाँच आयोग से निष्पक्ष जाँच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त विधि-सम्मत कार्रवाई की माँग की।
स्थानीय ग्रामीणों का विरोध
गौरतलब है कि शुक्रवार को मनेर में पुलिस के साथ कथित मुठभेड़ में तीन लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद स्थानीय ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और पुलिस की कार्रवाई को फर्जी मुठभेड़ बताते हुए न्याय की माँग की। ग्रामीणों के विरोध ने इस घटना को महज एक पुलिसिया ऑपरेशन से आगे बढ़ाकर एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक सवाल में तब्दील कर दिया है।
सियासी संदर्भ और व्यापक असर
यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब बिहार में कानून-व्यवस्था का मुद्दा विपक्ष के लिए एक प्रमुख चुनावी हथियार बन चुका है। आलोचकों का कहना है कि राज्य में एनकाउंटर की घटनाओं की जाँच पारदर्शी तरीके से नहीं होती, जिससे पुलिस की जवाबदेही पर सवाल उठते हैं। रोहिणी ने अपनी पोस्ट के साथ एक कार्टून भी साझा किया, जो सरकार की आलोचना को और पैना बनाता है।
बिहार सरकार और पुलिस की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आगे न्यायिक जाँच की माँग ज़ोर पकड़ती है या नहीं — यह देखना बाकी है।