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भारत का क्विक कॉमर्स बाज़ार FY31 तक $90 अरब पर पहुँचेगा, 10 करोड़ मासिक यूज़र्स का अनुमान

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भारत का क्विक कॉमर्स बाज़ार FY31 तक $90 अरब पर पहुँचेगा, 10 करोड़ मासिक यूज़र्स का अनुमान

सारांश

भारत का क्विक कॉमर्स बाज़ार पाँच वर्षों में सात गुना उछाल के साथ $90 अरब तक पहुँच सकता है। गूगल-रेडसीर की रिपोर्ट बताती है कि त्योहारी बिक्री में 110% की बढ़ोतरी और 10 करोड़ मासिक यूज़र्स के साथ, यह क्षेत्र अब शहरी किराना की आदतों को स्थायी रूप से बदलने की दहलीज़ पर खड़ा है।

मुख्य बातें

भारत का क्विक कॉमर्स बाज़ार FY26 के $13 अरब से बढ़कर FY31 तक $90 अरब तक पहुँचने का अनुमान है।
इस त्योहारी सीज़न में क्विक कॉमर्स बिक्री सालाना आधार पर 110% बढ़ने और कुल ऑनलाइन त्योहारी खर्च का 18% होने की उम्मीद।
मेट्रो शहरों में FY31 तक रिटेल खर्च में क्विक कॉमर्स की हिस्सेदारी 6% से बढ़कर 20-23% तक पहुँच सकती है।
मेट्रो यूज़र्स की संख्या 2.8 करोड़ से लगभग दोगुनी होकर 5 करोड़ होने का अनुमान।
गूगल इंडिया के करण दुगल के अनुसार, क्विक कॉमर्स अब एकल बिजनेस मॉडल से आगे बढ़कर किराना और इलेक्ट्रॉनिक्स तक फैल चुका है।

भारत का क्विक कॉमर्स बाज़ार वित्त वर्ष 2026 में लगभग $13 अरब से बढ़कर वित्त वर्ष 2031 तक $90 अरब तक पहुँचने की उम्मीद है — यानी पाँच वर्षों में सात गुना से अधिक की वृद्धि। गूगल और रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की 7 अक्टूबर 2026 को जारी संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, इसी अवधि में देशभर में हर माह लेनदेन करने वाले उपयोगकर्ताओं की संख्या 10 करोड़ से अधिक हो जाने का अनुमान है।

त्योहारी सीज़न में उछाल

रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि इस त्योहारी सीज़न में क्विक कॉमर्स की बिक्री सालाना आधार पर 110 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। यह कुल ऑनलाइन त्योहारी खर्च का लगभग 18 प्रतिशत होगा — जो इस श्रेणी की मुख्यधारा ई-कॉमर्स में बढ़ती पैठ को दर्शाता है।

मेट्रो शहरों की भूमिका

निकट अवधि की वृद्धि का मुख्य आधार मेट्रो शहर बने रहेंगे। वित्त वर्ष 2031 तक क्विक कॉमर्स की कुल अतिरिक्त वृद्धि में इन शहरों की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद है। मेट्रो शहरों के खुदरा खर्च में क्विक कॉमर्स की हिस्सेदारी वर्तमान के करीब 6 प्रतिशत से उछलकर 20 से 23 प्रतिशत तक पहुँच सकती है। इसी दौरान मेट्रो शहरों में क्विक कॉमर्स उपयोगकर्ताओं की संख्या 2.8 करोड़ से लगभग दोगुनी होकर करीब 5 करोड़ हो जाने का अनुमान है।

अगला चरण: किराना और भौगोलिक विस्तार

शहरी खरीदारी की आदतों में अपनी मजबूत पकड़ बनाने के बाद, क्विक कॉमर्स अब श्रेणी और भौगोलिक विस्तार के व्यापक चरण में प्रवेश कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस वृद्धि का लाभ उठाने के लिए प्लेटफॉर्म और ब्रांड्स को किराना सेगमेंट में गहरी पैठ बनानी होगी — ग्राहकों को 'टॉप-अप ऑर्डर' से आगे बढ़ाकर घर के राशन और पेंट्री की नियमित मासिक भरपाई की आदत की ओर ले जाना होगा। ब्रांड्स को स्टॉक की ताजगी, सप्लाई चेन में पारदर्शिता, बड़े पैक की उपलब्धता और किफायती पैकिंग का लाभ उठाने की सलाह दी गई है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

गूगल इंडिया में क्विक कॉमर्स और फूडटेक के इंडस्ट्री हेड करण दुगल ने कहा कि भारत में क्विक कॉमर्स अब एकल बिजनेस मॉडल तक सीमित नहीं रहा — मेट्रो और गैर-मेट्रो, दोनों में खरीदारी व्यवहार तेज़ी से बदल रहा है। दुगल के अनुसार, 'जैसे-जैसे इंडस्ट्री हर माह 10 करोड़ सक्रिय उपयोगकर्ताओं के अहम पड़ाव की ओर बढ़ रही है, सफलता उन ब्रांड्स को मिलेगी जो बाज़ार की बारीकियों को समझते हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब ब्लिंकिट, ज़ेप्टो और स्विगी इंस्टामार्ट जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म नए शहरों और नई श्रेणियों में आक्रामक विस्तार कर रहे हैं। गौरतलब है कि यह क्षेत्र महज दो-तीन वर्षों में किराना और डेली एसेंशियल्स की डिलीवरी से इलेक्ट्रॉनिक्स और फैशन तक अपना दायरा बढ़ा चुका है।

रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि प्लेटफॉर्म और ब्रांड्स लक्षित रीप्लेनिशमेंट मार्केटिंग और दोबारा ऑर्डर करने के लिए रिमाइंडर का उपयोग करें, ताकि ग्राहकों में नियमित खरीदारी की आदत विकसित हो। आने वाले वर्षों में गैर-मेट्रो शहरों और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में विस्तार ही इस क्षेत्र की दीर्घकालिक संभावना तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे संदर्भ में देखना ज़रूरी है — यह रिपोर्ट उन्हीं गूगल और रेडसीर की है जो इस पारिस्थितिकी तंत्र में सीधे हितधारक हैं, इसलिए अनुमानों को स्वतंत्र सत्यापन की कसौटी पर परखा जाना चाहिए। असली प्रश्न यह है कि क्या किराना सेगमेंट में गहरी पैठ केवल मेट्रो शहरों तक सीमित रहेगी, या गैर-मेट्रो शहरों में भी लास्ट-माइल लॉजिस्टिक्स की चुनौतियाँ पार की जा सकेंगी। इसके अलावा, तेज़ी से बढ़ते इस बाज़ार में प्रतिस्पर्धी जलन, पतली मार्जिन और डार्क स्टोर के नियामकीय सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं। दीर्घकालिक सफलता के लिए 'टॉप-अप' आदत को 'नियमित खरीदारी' में बदलना ज़रूरी है — और यह उपभोक्ता व्यवहार परिवर्तन जितना कठिन है, उतना ही महँगा भी।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का क्विक कॉमर्स बाज़ार FY31 तक कितना बड़ा होगा?
गूगल और रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का क्विक कॉमर्स बाज़ार FY26 के $13 अरब से बढ़कर FY31 तक $90 अरब तक पहुँच सकता है। इसी अवधि में हर माह लेनदेन करने वाले यूज़र्स की संख्या 10 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है।
इस त्योहारी सीज़न में क्विक कॉमर्स की बिक्री कितनी बढ़ेगी?
रिपोर्ट के अनुसार, इस त्योहारी सीज़न में क्विक कॉमर्स की बिक्री सालाना आधार पर 110 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। यह कुल ऑनलाइन त्योहारी खर्च का लगभग 18 प्रतिशत होगा।
मेट्रो शहरों में क्विक कॉमर्स की हिस्सेदारी कितनी बढ़ेगी?
मेट्रो शहरों के खुदरा खर्च में क्विक कॉमर्स की हिस्सेदारी वर्तमान के करीब 6 प्रतिशत से बढ़कर FY31 तक 20-23 प्रतिशत तक पहुँच सकती है। इसके साथ ही, मेट्रो शहरों में उपयोगकर्ताओं की संख्या 2.8 करोड़ से दोगुनी होकर 5 करोड़ होने का अनुमान है।
क्विक कॉमर्स के अगले चरण की वृद्धि किस पर निर्भर है?
रिपोर्ट के अनुसार, अगले चरण की वृद्धि किराना सेगमेंट में गहरी पैठ और भौगोलिक विस्तार पर निर्भर होगी। ग्राहकों को 'टॉप-अप ऑर्डर' से आगे बढ़ाकर नियमित मासिक राशन खरीदारी की आदत विकसित करना इसका मुख्य लक्ष्य होगा।
गूगल इंडिया के करण दुगल ने क्विक कॉमर्स को लेकर क्या कहा?
गूगल इंडिया के क्विक कॉमर्स और फूडटेक के इंडस्ट्री हेड करण दुगल ने कहा कि भारत में क्विक कॉमर्स अब एकल बिजनेस मॉडल तक सीमित नहीं है और मेट्रो व गैर-मेट्रो दोनों में खरीदारी व्यवहार तेज़ी से बदल रहा है। उन्होंने कहा कि 10 करोड़ मासिक यूज़र्स के पड़ाव तक पहुँचने में सफलता उन ब्रांड्स को मिलेगी जो बाज़ार की बारीकियों को समझते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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