RTD बेवरेज बाजार 2030 तक 40 अरब डॉलर: भारत में पेय उद्योग की बड़ी छलांग

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RTD बेवरेज बाजार 2030 तक 40 अरब डॉलर: भारत में पेय उद्योग की बड़ी छलांग

सारांश

रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार भारत का रेडी-टू-ड्रिंक नॉन-अल्कोहलिक पेय बाजार 2030 तक दोगुना होकर 40 अरब डॉलर तक पहुंचेगा। क्विक कॉमर्स, बदलती उपभोक्ता आदतें और हेल्दी ड्रिंक्स की मांग इस उछाल की मुख्य वजह हैं।

मुख्य बातें

भारत का RTD नॉन-अल्कोहलिक पेय बाजार 2025 में 20 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 40 अरब डॉलर होने का अनुमान है।
रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की 23 अप्रैल 2025 को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई।
क्विक कॉमर्स में RTD कैटेगरी की बिक्री 100% से अधिक बढ़ी; बाजार 2030 तक 25 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
भारत में प्रति व्यक्ति खपत मात्र 15-20 लीटर — अमेरिका ( 100-120 लीटर ) और चीन ( 70-80 लीटर ) से बहुत पीछे।
पैकेज्ड नारियल पानी का बाजार 900 मिलियन डॉलर ; 20% से अधिक बिक्री क्विक कॉमर्स से।
प्रोटीन ड्रिंक्स और हेल्दी हाइड्रेशन ड्रिंक्स की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि; विशेषज्ञों ने ब्रांडों को नवाचार और वितरण रणनीति सुधारने की सलाह दी।

नई दिल्ली। भारत का रेडी-टू-ड्रिंक (RTD) नॉन-अल्कोहलिक पेय बाजार अगले पांच वर्षों में दोगुना होने की राह पर है। रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की 23 अप्रैल 2025 को जारी रिपोर्ट के मुताबिक यह बाजार 2025 में करीब 20 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 40 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। क्विक कॉमर्स की तेज रफ्तार, बदलती खरीदारी की आदतें और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता इस विस्तार के प्रमुख कारण बताए गए हैं।

क्विक कॉमर्स बना सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन

रिपोर्ट में क्विक कॉमर्स को इस क्षेत्र का सबसे तेज़ विकास चालक बताया गया है। RTD कैटेगरी में क्विक कॉमर्स के जरिए 100 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। अनुमान है कि क्विक कॉमर्स बाजार स्वयं 4 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 25 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

पहले उपभोक्ता बड़ी मात्रा में स्टॉक करके पेय पदार्थ खरीदते थे, लेकिन अब इंस्टेंट कंजम्प्शन यानी तत्काल जरूरत के अनुसार खरीदारी का चलन तेजी से बढ़ रहा है। यह बदलाव सिर्फ शहरी नहीं, बल्कि छोटे शहरों तक भी फैल रहा है।

भारत में प्रति व्यक्ति खपत — वैश्विक तुलना में कहां खड़े हैं हम

रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण तथ्य उजागर हुआ है — भारत में प्रति व्यक्ति RTD पेय की खपत अभी केवल 15-20 लीटर प्रति वर्ष है। यह वैश्विक औसत से बहुत कम है और यही इस क्षेत्र की असली विकास संभावना को दर्शाता है।

तुलनात्मक रूप से देखें तो अमेरिका में 100-120 लीटर, चीन में 70-80 लीटर और ब्रिटेन में 60-70 लीटर प्रति व्यक्ति वार्षिक खपत है। भारत की विशाल जनसंख्या को देखते हुए यदि खपत महज 30-40 लीटर तक भी पहुंचे, तो बाजार का आकार कई गुना बढ़ सकता है।

हेल्दी ड्रिंक्स और पैकेज्ड नारियल पानी की उड़ान

उपभोक्ताओं की स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण प्रोटीन ड्रिंक्स, हेल्दी हाइड्रेशन ड्रिंक्स और पैकेज्ड नारियल पानी की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। पैकेज्ड नारियल पानी का बाजार लगभग 900 मिलियन डॉलर का है, जिसमें इसकी हिस्सेदारी 15-20 प्रतिशत है।

विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि इस श्रेणी में 20 प्रतिशत से अधिक बिक्री क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए हो रही है, जो इस चैनल की बढ़ती प्रासंगिकता को दर्शाता है।

मौसमी मांग से परे — व्यवहारगत बदलाव है असली कहानी

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि गर्मी का मौसम मांग को अस्थायी रूप से बढ़ाता है, लेकिन इस क्षेत्र की दीर्घकालिक वृद्धि का आधार उपभोक्ताओं के व्यवहार में स्थायी बदलाव और आसान डिजिटल पहुंच है।

रेडसीर के पार्टनर मृगांक गुटगुटिया ने कहा कि ये उत्पाद बार-बार खरीदे जाते हैं और अक्सर अचानक खरीदारी होती है। भारत में लंबे गर्मी के मौसम के कारण इनकी मांग और बढ़ जाती है। कम प्रति व्यक्ति खपत और हेल्दी विकल्पों की बढ़ती पसंद के कारण इस सेक्टर में दीर्घकालिक मजबूत वृद्धि देखने को मिलेगी।

उन्होंने ब्रांडों को सलाह दी कि वे नवाचार, उचित मूल्य निर्धारण और सुदृढ़ वितरण रणनीति पर ध्यान केंद्रित करें, ताकि विभिन्न बाजार खंडों और बदलती उपभोक्ता मांग का अधिकतम लाभ उठाया जा सके।

भारत के लिए क्या मायने रखती है यह रिपोर्ट

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारत में FMCG और फूड-टेक क्षेत्र में निवेश तेजी से बढ़ रहा है। Zomato, Swiggy Instamart, Zepto और Blinkit जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पहले से ही पेय पदार्थों की डिलीवरी में बड़ी हिस्सेदारी बना चुके हैं। आने वाले वर्षों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ब्रांडों के बीच इस बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि 2026-2027 तक भारत एशिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते RTD बेवरेज बाजारों में शामिल हो सकता है, और यदि सरकार खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में नीतिगत समर्थन जारी रखती है तो यह लक्ष्य और जल्दी हासिल हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय उपभोक्ता व्यवहार के गहरे बदलाव का दस्तावेज़ है। जहां एक ओर प्रति व्यक्ति खपत का अमेरिका और चीन से भारी अंतर विकास की असीम संभावना दर्शाता है, वहीं यह सवाल भी उठता है कि क्या यह विस्तार केवल प्रीमियम शहरी उपभोक्ताओं तक सीमित रहेगा या ग्रामीण भारत तक भी पहुंचेगा। क्विक कॉमर्स की 100% से अधिक वृद्धि दर बताती है कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर अब FMCG का नया वितरण तंत्र बन चुका है। ब्रांडों और नीति-निर्माताओं दोनों के लिए यह सही समय है कि वे इस अवसर को सिर्फ महानगरों तक नहीं, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहरों तक ले जाने की रणनीति बनाएं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का RTD बेवरेज बाजार 2030 तक कितना बड़ा होगा?
रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत का RTD नॉन-अल्कोहलिक पेय बाजार 2030 तक 40 अरब डॉलर तक पहुंचेगा। यह 2025 के 20 अरब डॉलर के आंकड़े का दोगुना है।
भारत में RTD ड्रिंक बाजार की वृद्धि के मुख्य कारण क्या हैं?
क्विक कॉमर्स की तेज़ी, इंस्टेंट कंजम्प्शन की बढ़ती आदत, हेल्दी ड्रिंक्स की मांग और डिजिटल वितरण चैनलों का विस्तार इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। RTD कैटेगरी में क्विक कॉमर्स के जरिए 100% से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
भारत में प्रति व्यक्ति RTD पेय की खपत कितनी है?
भारत में प्रति व्यक्ति RTD पेय की खपत 15-20 लीटर प्रति वर्ष है, जो अमेरिका (100-120 लीटर), चीन (70-80 लीटर) और ब्रिटेन (60-70 लीटर) से काफी कम है। यही अंतर भारत में इस क्षेत्र की बड़ी विकास संभावना को दर्शाता है।
पैकेज्ड नारियल पानी का भारतीय बाजार कितना बड़ा है?
पैकेज्ड नारियल पानी का भारतीय बाजार लगभग 900 मिलियन डॉलर का है। इसमें से 20 प्रतिशत से अधिक बिक्री क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से हो रही है।
क्विक कॉमर्स बाजार 2030 तक कितना बड़ा होगा?
रिपोर्ट के अनुसार क्विक कॉमर्स बाजार मौजूदा 4 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक लगभग 25 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह FMCG और बेवरेज सेक्टर में वितरण का सबसे तेज़ी से उभरता चैनल बन रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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