22 अक्टूबर 2026
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टीपीसीआई-यूकेआईबीसी MoU: भारत-ब्रिटेन व्यापार को नई रफ्तार, 99% टैरिफ लाइनें शुल्क-मुक्त

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टीपीसीआई-यूकेआईबीसी MoU: भारत-ब्रिटेन व्यापार को नई रफ्तार, 99% टैरिफ लाइनें शुल्क-मुक्त

सारांश

भारत-ब्रिटेन CETA लागू होने के बाद टीपीसीआई और यूकेआईबीसी का MoU महज कागज़ी औपचारिकता नहीं — यह 65 अरब डॉलर के व्यापार को वास्तविक ज़मीनी साझेदारी में बदलने की पहली संस्थागत कोशिश है। प्रोसेस्ड फूड पर 70% शुल्क खत्म होने से भारत के पास 50 अरब डॉलर के ब्रिटिश बाजार में अभी 0.6% हिस्सेदारी है — विस्तार की गुंजाइश बड़ी है।

मुख्य बातें

टीपीसीआई और यूकेआईबीसी ने 22 अक्टूबर 2026 को व्यापार, निवेश और SME सहयोग के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए।
लंदन में आयोजित B2B मैचमेकिंग कार्यक्रम में भारत की 48 निर्यातक कंपनियाँ और ब्रिटेन के 150 आयातक शामिल हुए।
CETA के तहत भारतीय उत्पादों की 99% टैरिफ लाइनों को ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त प्रवेश, प्रोसेस्ड फूड पर 70% तक का शुल्क समाप्त।
ब्रिटेन का प्रोसेस्ड फूड आयात 50.68 अरब डॉलर सालाना; इसमें भारत की हिस्सेदारी अभी मात्र 0.6% यानी 30.95 करोड़ डॉलर ।
भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2025-26 में 48 अरब पाउंड (लगभग 65 अरब डॉलर ) तक पहुँचा।
टीपीसीआई प्रतिनिधिमंडल ने BIST , LCCI और स्कॉच व्हिस्की एसोसिएशन के अधिकारियों से भी बैठक की।

ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (टीपीसीआई) और यूके-इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूकेआईबीसी) ने 22 अक्टूबर 2026 को एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जो भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) के लागू होने के बाद द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और कारोबारी सहयोग को संस्थागत आधार देगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों देशों के बीच वित्त वर्ष 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार 48 अरब पाउंड (लगभग 65 अरब डॉलर) के स्तर को पार कर चुका है।

समझौते की मुख्य बातें

टीपीसीआई के बयान के अनुसार, यह MoU संस्थागत व्यापारिक सहयोग का नया ढाँचा तैयार करेगा। इसके तहत दोनों देशों की कंपनियों को जोड़ना, व्यापार मिशनों को प्रोत्साहन देना, बाजार-संबंधी जानकारी साझा करना और लघु एवं मध्यम उद्यमों (SME) के लिए नए अवसर सृजित करना प्राथमिकता होगी। समझौते के साथ ही लंदन में एक बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) मैचमेकिंग कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें भारत की 48 निर्यातक कंपनियों और ब्रिटेन के 150 आयातकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

CETA से निर्यातकों को सीधा फायदा

CETA के लागू होने के बाद अब भारतीय उत्पादों की 99 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिल रहा है। खाद्य एवं पेय पदार्थ क्षेत्र को इस नए व्यापार ढाँचे के तहत सर्वाधिक संभावनाओं वाला क्षेत्र माना जा रहा है। ब्रिटेन हर साल 50.68 अरब डॉलर मूल्य के प्रोसेस्ड फूड का आयात करता है, जबकि इसमें भारत की हिस्सेदारी मात्र 0.6 प्रतिशत, यानी 30.95 करोड़ डॉलर, है। यह अंतर भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ी संभावना का द्वार खोलता है।

CETA के अंतर्गत प्रोसेस्ड फूड पर ब्रिटेन के 70 प्रतिशत तक के आयात शुल्क, झींगा (श्रिम्प) पर 4.2 से 8.5 प्रतिशत तक के शुल्क और इंस्टेंट कॉफी पर लगने वाली ड्यूटी पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।

टीपीसीआई अध्यक्ष की प्रतिक्रिया

टीपीसीआई के अध्यक्ष मोहित सिंघला ने इस अवसर पर कहा कि यह समझौता भारत-ब्रिटेन व्यापारिक संबंधों को नीति स्तर की बातचीत से आगे ले जाकर ज़मीनी साझेदारी में बदलने की दिशा में एक ठोस उपलब्धि है। उन्होंने कहा, 'टीपीसीआई और यूकेआईबीसी मिलकर द्विपक्षीय व्यापार विकास को नई गति देने के लिए सक्रिय रूप से काम करेंगे, ताकि मुक्त व्यापार समझौते से मिलने वाले अवसर जमीन पर दिखाई दें।' सिंघला ने प्रोसेस्ड फूड पर शुल्क समाप्ति को भारतीय खाद्य निर्यातकों के लिए 'परिदृश्य बदलने वाला कदम' बताया।

अन्य ब्रिटिश संस्थाओं से संवाद

इस यात्रा के दौरान टीपीसीआई प्रतिनिधिमंडल ने ब्रिटेन के डिपार्टमेंट फॉर बिजनेस, इनोवेशन, साइंस एंड ट्रेड (BIST), लंदन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (LCCI) और स्कॉच व्हिस्की एसोसिएशन के अधिकारियों से भी मुलाकात की। टीपीसीआई के अनुसार, दोनों पक्षों ने कारोबारी समर्थन तंत्र को मजबूत करने और आर्थिक विकास को गति देने पर विस्तृत चर्चा की।

आम जनता और उद्योग पर असर

उद्योग जगत का मानना है कि CETA के लागू होने के बाद भारतीय खाद्य निर्यातक केवल ब्रिटेन में बसे 18.6 लाख भारतीय मूल के लोगों के पारंपरिक बाजार तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे ब्रिटेन के व्यापक खुदरा और खाद्य सेवा क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सक्षम होंगे। इससे भारतीय निर्यात मूल्य, रोज़गार सृजन और समग्र आर्थिक विकास को नई गति मिलने की संभावना है। गौरतलब है कि यह वह क्षण है जब भारत और ब्रिटेन दोनों ही अपने-अपने व्यापारिक संबंधों के विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है। ब्रिटेन के 50 अरब डॉलर के प्रोसेस्ड फूड बाजार में भारत की 0.6% हिस्सेदारी यह बताती है कि टैरिफ बाधा हटना पर्याप्त नहीं — ब्रांडिंग, पैकेजिंग मानक और कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स में निवेश के बिना शुल्क-मुक्ति का लाभ कागज़ पर ही रहेगा। B2B मैचमेकिंग जैसे कार्यक्रम सही दिशा में हैं, पर SME-केंद्रित निर्यात वित्त और गुणवत्ता प्रमाणन तंत्र के बिना छोटे निर्यातक इस अवसर का पूरा फायदा नहीं उठा पाएँगे। नीति से ज़मीन तक का यह सफर तय करना ही इस साझेदारी की वास्तविक कसौटी होगी।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीपीसीआई और यूकेआईबीसी के बीच हुए MoU का क्या मतलब है?
यह समझौता ज्ञापन (MoU) भारत-ब्रिटेन CETA के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और SME सहयोग के लिए एक संस्थागत ढाँचा तैयार करता है। इसके तहत कंपनियों को जोड़ना, व्यापार मिशन चलाना और बाजार-संबंधी जानकारी साझा करना शामिल है।
भारत-ब्रिटेन CETA से निर्यातकों को कौन-से प्रमुख लाभ मिलेंगे?
CETA के तहत भारतीय उत्पादों की 99% टैरिफ लाइनों को ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिल रहा है। प्रोसेस्ड फूड पर 70% तक का शुल्क, झींगा पर 4.2 से 8.5% तक का शुल्क और इंस्टेंट कॉफी पर ड्यूटी पूरी तरह समाप्त कर दी गई है, जिससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
ब्रिटेन के प्रोसेस्ड फूड बाजार में भारत की मौजूदा हिस्सेदारी कितनी है?
ब्रिटेन सालाना लगभग 50.68 अरब डॉलर का प्रोसेस्ड फूड आयात करता है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी अभी केवल 0.6% यानी 30.95 करोड़ डॉलर है। CETA के बाद यह हिस्सेदारी बढ़ाने की बड़ी संभावना मानी जा रही है।
लंदन में आयोजित B2B मैचमेकिंग कार्यक्रम में कौन शामिल हुआ?
MoU के साथ-साथ लंदन में आयोजित इस कार्यक्रम में भारत की 48 निर्यातक कंपनियाँ और ब्रिटेन के 150 आयातकों ने भाग लिया। यह कार्यक्रम दोनों देशों के कारोबारियों के बीच सीधे व्यापारिक संपर्क स्थापित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।
भारत और ब्रिटेन के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार कितना है?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय व्यापार 48 अरब पाउंड, यानी लगभग 65 अरब डॉलर, के स्तर तक पहुँच चुका है। CETA और इस नई संस्थागत साझेदारी से यह आँकड़ा और बढ़ने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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