भारत-यूके एफटीए से दोनों देशों की कंपनियों को लाभ, गिफ्ट सिटी समेत कई क्षेत्रों में बढ़ रहा ब्रिटिश निवेश
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात और राजस्थान में यूके के डिप्टी हाई कमिश्नर स्टीव हिकलिंग ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को गांधीनगर में कहा कि भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत दोनों देशों की कंपनियों को ठोस व्यापारिक लाभ मिलने शुरू हो गए हैं और ब्रिटिश कंपनियाँ भारत के कई उद्योगों में तेज़ी से निवेश बढ़ा रही हैं। हिकलिंग के अनुसार, 14 जुलाई को हस्ताक्षरित यह समझौता भारत-यूके साझेदारी को अब तक के सर्वोच्च स्तर पर ले आया है।
एफटीए की मुख्य व्यापार शर्तें
हिकलिंग ने बताया कि एफटीए के तहत यूके में आयात होने वाली भारतीय वस्तुओं की 99 प्रतिशत प्रोडक्ट लाइन्स पर टैरिफ कम या समाप्त करने की व्यवस्था है। इसी तरह, भारत में आयात होने वाले ब्रिटिश सामानों की 90 प्रतिशत प्रोडक्ट लाइन्स पर भी शुल्क में कटौती का प्रावधान है। उन्होंने कहा, 'ये फायदे अब कंपनियों को मिल रहे हैं। हम पहले ही देख रहे हैं कि यूके के साथ निवेश और व्यापार करने की इच्छुक भारतीय कंपनियों और भारतीय बाज़ार में काम करने और सामान बेचने की इच्छा रखने वाली ब्रिटिश कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ रही है।'
किन क्षेत्रों में हो रहा है ब्रिटिश निवेश
हिकलिंग ने कहा कि जेसीबी जैसी ब्रिटिश कंपनियाँ भारत में मशीनें बना रही हैं, जो द्विपक्षीय औद्योगिक सहयोग का एक प्रमुख उदाहरण है। इसके अलावा, गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) में यूके के बैंकों और वित्तीय सेवा कंपनियों ने उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराई है। साथ ही, दो ब्रिटिश विश्वविद्यालय गिफ्ट सिटी में अपने परिसर भी स्थापित कर रही हैं।
द्विपक्षीय साझेदारी का नया दौर
हिकलिंग ने कहा, 'मुझे लगता है कि यूके-भारत की साझेदारी अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में खुद को एक विकल्प के रूप में स्थापित कर रहा है। गौरतलब है कि 14 जुलाई को एफटीए पर हस्ताक्षर के बाद द्विपक्षीय संबंधों में तेज़ी से सुधार देखा गया है।
राजनयिक गतिविधि तेज़
हिकलिंग ने बताया कि हाल ही में नई दिल्ली में उत्तरी इंग्लैंड के तीन मंत्रियों और सात मेयरों ने इस बात पर चर्चा की कि आपसी फायदे के लिए इस समझौते का उपयोग कैसे किया जाए। यह भागीदारी दर्शाती है कि एफटीए का लाभ केवल केंद्रीय स्तर तक सीमित न रहकर क्षेत्रीय सरकारों और स्थानीय प्रशासन तक भी पहुँच रहा है।
आगे की संभावनाएँ
हिकलिंग ने भरोसा जताया कि आने वाले समय में भारत में यूके का निवेश और भी बढ़ेगा। विश्लेषकों के अनुसार, गिफ्ट सिटी और विनिर्माण क्षेत्र में ब्रिटिश पूँजी का प्रवाह भारत की 'मेक इन इंडिया' और वित्तीय केंद्र की महत्वाकांक्षाओं को नई ऊर्जा दे सकता है। एफटीए के दीर्घकालिक प्रभाव अगले कुछ वर्षों में व्यापार के आँकड़ों में स्पष्ट दिखने की उम्मीद है।