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भारत-यूके एफटीए से दोनों देशों की कंपनियों को लाभ, गिफ्ट सिटी समेत कई क्षेत्रों में बढ़ रहा ब्रिटिश निवेश

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भारत-यूके एफटीए से दोनों देशों की कंपनियों को लाभ, गिफ्ट सिटी समेत कई क्षेत्रों में बढ़ रहा ब्रिटिश निवेश

सारांश

भारत-यूके एफटीए पर हस्ताक्षर के बाद अब ज़मीनी असर दिखने लगा है — गिफ्ट सिटी में ब्रिटिश बैंक, वित्तीय कंपनियाँ और विश्वविद्यालय कैंपस स्थापित हो रहे हैं। यूके के डिप्टी हाई कमिश्नर स्टीव हिकलिंग का कहना है कि 99% भारतीय व 90% ब्रिटिश उत्पाद लाइन्स पर टैरिफ कटौती से दोनों देशों की कंपनियों को सीधा फायदा हो रहा है।

मुख्य बातें

भारत-यूके एफटीए पर 14 जुलाई 2026 को हस्ताक्षर हुए; अब व्यापारिक लाभ मिलने शुरू हो गए हैं।
यूके में 99% भारतीय उत्पाद लाइन्स और भारत में 90% ब्रिटिश उत्पाद लाइन्स पर टैरिफ कम या समाप्त।
जेसीबी भारत में मशीनें बना रही है; गिफ्ट सिटी में ब्रिटिश बैंक, वित्तीय कंपनियाँ और दो विश्वविद्यालय परिसर स्थापित हो रहे हैं।
उत्तरी इंग्लैंड के तीन मंत्रियों और सात मेयरों ने नई दिल्ली में एफटीए के उपयोग पर चर्चा की।
यूके के डिप्टी हाई कमिश्नर स्टीव हिकलिंग ने कहा कि भारत-यूके साझेदारी अब तक के सर्वोच्च स्तर पर है।

गुजरात और राजस्थान में यूके के डिप्टी हाई कमिश्नर स्टीव हिकलिंग ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को गांधीनगर में कहा कि भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत दोनों देशों की कंपनियों को ठोस व्यापारिक लाभ मिलने शुरू हो गए हैं और ब्रिटिश कंपनियाँ भारत के कई उद्योगों में तेज़ी से निवेश बढ़ा रही हैं। हिकलिंग के अनुसार, 14 जुलाई को हस्ताक्षरित यह समझौता भारत-यूके साझेदारी को अब तक के सर्वोच्च स्तर पर ले आया है।

एफटीए की मुख्य व्यापार शर्तें

हिकलिंग ने बताया कि एफटीए के तहत यूके में आयात होने वाली भारतीय वस्तुओं की 99 प्रतिशत प्रोडक्ट लाइन्स पर टैरिफ कम या समाप्त करने की व्यवस्था है। इसी तरह, भारत में आयात होने वाले ब्रिटिश सामानों की 90 प्रतिशत प्रोडक्ट लाइन्स पर भी शुल्क में कटौती का प्रावधान है। उन्होंने कहा, 'ये फायदे अब कंपनियों को मिल रहे हैं। हम पहले ही देख रहे हैं कि यूके के साथ निवेश और व्यापार करने की इच्छुक भारतीय कंपनियों और भारतीय बाज़ार में काम करने और सामान बेचने की इच्छा रखने वाली ब्रिटिश कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ रही है।'

किन क्षेत्रों में हो रहा है ब्रिटिश निवेश

हिकलिंग ने कहा कि जेसीबी जैसी ब्रिटिश कंपनियाँ भारत में मशीनें बना रही हैं, जो द्विपक्षीय औद्योगिक सहयोग का एक प्रमुख उदाहरण है। इसके अलावा, गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) में यूके के बैंकों और वित्तीय सेवा कंपनियों ने उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराई है। साथ ही, दो ब्रिटिश विश्वविद्यालय गिफ्ट सिटी में अपने परिसर भी स्थापित कर रही हैं।

द्विपक्षीय साझेदारी का नया दौर

हिकलिंग ने कहा, 'मुझे लगता है कि यूके-भारत की साझेदारी अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में खुद को एक विकल्प के रूप में स्थापित कर रहा है। गौरतलब है कि 14 जुलाई को एफटीए पर हस्ताक्षर के बाद द्विपक्षीय संबंधों में तेज़ी से सुधार देखा गया है।

राजनयिक गतिविधि तेज़

हिकलिंग ने बताया कि हाल ही में नई दिल्ली में उत्तरी इंग्लैंड के तीन मंत्रियों और सात मेयरों ने इस बात पर चर्चा की कि आपसी फायदे के लिए इस समझौते का उपयोग कैसे किया जाए। यह भागीदारी दर्शाती है कि एफटीए का लाभ केवल केंद्रीय स्तर तक सीमित न रहकर क्षेत्रीय सरकारों और स्थानीय प्रशासन तक भी पहुँच रहा है।

आगे की संभावनाएँ

हिकलिंग ने भरोसा जताया कि आने वाले समय में भारत में यूके का निवेश और भी बढ़ेगा। विश्लेषकों के अनुसार, गिफ्ट सिटी और विनिर्माण क्षेत्र में ब्रिटिश पूँजी का प्रवाह भारत की 'मेक इन इंडिया' और वित्तीय केंद्र की महत्वाकांक्षाओं को नई ऊर्जा दे सकता है। एफटीए के दीर्घकालिक प्रभाव अगले कुछ वर्षों में व्यापार के आँकड़ों में स्पष्ट दिखने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि टैरिफ कटौती का लाभ बड़े कॉरपोरेट्स से आगे बढ़कर भारत के मध्यम व लघु उद्योगों तक कब पहुँचता है। गिफ्ट सिटी में ब्रिटिश विश्वविद्यालयों और बैंकों का प्रवेश प्रतीकात्मक रूप से महत्त्वपूर्ण है, परंतु आलोचकों का कहना है कि ऐसे द्विपक्षीय समझौतों का लाभ अक्सर निर्यात-तैयार क्षेत्रों तक सीमित रह जाता है। यह भी देखना होगा कि 90% ब्रिटिश उत्पादों पर टैरिफ कटौती भारत के संवेदनशील क्षेत्रों — जैसे कृषि और डेयरी — को किस हद तक प्रभावित करती है, जिसका ब्यौरा अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हुआ है।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) क्या है?
भारत-यूके एफटीए एक द्विपक्षीय व्यापार समझौता है जिस पर 14 जुलाई 2026 को हस्ताक्षर हुए। इसके तहत यूके में भारतीय उत्पादों की 99% और भारत में ब्रिटिश उत्पादों की 90% प्रोडक्ट लाइन्स पर टैरिफ कम या समाप्त किया गया है।
एफटीए से ब्रिटिश कंपनियाँ भारत में कहाँ निवेश कर रही हैं?
यूके के डिप्टी हाई कमिश्नर स्टीव हिकलिंग के अनुसार, ब्रिटिश कंपनियाँ मशीनरी, बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और उच्च शिक्षा क्षेत्र में निवेश कर रही हैं। गिफ्ट सिटी में दो ब्रिटिश विश्वविद्यालय परिसर और कई वित्तीय कंपनियाँ स्थापित हो रही हैं, जबकि जेसीबी भारत में मशीनों का निर्माण कर रही है।
गिफ्ट सिटी में यूके का निवेश क्यों बढ़ रहा है?
गिफ्ट सिटी एक विशेष आर्थिक क्षेत्र है जो विदेशी वित्तीय संस्थाओं को अनुकूल नियामक माहौल देता है। एफटीए के बाद ब्रिटिश बैंकों, वित्तीय सेवा कंपनियों और विश्वविद्यालयों के लिए वहाँ परिचालन करना और अधिक आकर्षक हो गया है।
भारत-यूके व्यापार साझेदारी का अभी क्या स्तर है?
स्टीव हिकलिंग के अनुसार, भारत-यूके साझेदारी अब तक के सर्वोच्च स्तर पर है। एफटीए पर हस्ताक्षर के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश में रुचि तेज़ी से बढ़ी है, और उत्तरी इंग्लैंड के तीन मंत्री व सात मेयर नई दिल्ली में इसके क्रियान्वयन पर चर्चा कर चुके हैं।
क्या एफटीए का लाभ आम भारतीय कंपनियों को भी मिलेगा?
हिकलिंग के अनुसार, यूके के साथ व्यापार करने की इच्छुक भारतीय कंपनियों की दिलचस्पी पहले से बढ़ रही है। हालाँकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसका व्यापक असर तब स्पष्ट होगा जब छोटे और मध्यम उद्यम भी इस समझौते की शर्तों का लाभ उठाने में सक्षम होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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