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क्या भारतीय आईपीओ मार्केट ने नया रिकॉर्ड बनाया है? दो साल में जुटाए 3.8 लाख करोड़ रुपए

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क्या भारतीय आईपीओ मार्केट ने नया रिकॉर्ड बनाया है? दो साल में जुटाए 3.8 लाख करोड़ रुपए

सारांश

क्या आप जानते हैं कि पिछले दो वर्षों में भारत के आईपीओ मार्केट ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है? 701 आईपीओ के माध्यम से 3.8 लाख करोड़ रुपए जुटाने की जानकारी एक नई रिपोर्ट में सामने आई है। जानिए इसके पीछे के कारण और भविष्य की संभावनाएँ।

मुख्य बातें

आईपीओ बाजार ने पिछले दो वर्षों में 3.8 लाख करोड़ रुपए जुटाए।
2025 में 365 से अधिक आईपीओ हुए हैं।
बड़ी कंपनियों ने 3.6 लाख करोड़ रुपए का योगदान दिया।
एनबीएफसी सेक्टर ने सबसे अधिक धन जुटाया।
युवा कंपनियों का आईपीओ में महत्वपूर्ण योगदान है।

मुंबई, 25 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। पिछले दो वर्षों में भारत के आईपीओ मार्केट ने एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। इस अवधि में लगभग 701 आईपीओ के माध्यम से 3.8 लाख करोड़ रुपए जुटाए गए, जो कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच 629 आईपीओ से प्राप्त 3.2 लाख करोड़ रुपए की तुलना में काफी अधिक है। यह जानकारी एक नई रिपोर्ट में प्रस्तुत की गई है।

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के अनुसार, आईपीओ बाजार का आकार और दायरा दोनों तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार पर भरोसा बढ़ा है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 भी आईपीओ बाजार के लिए एक उत्कृष्ट वर्ष रहा है। अब तक 365 से अधिक आईपीओ से लगभग 1.95 लाख करोड़ रुपए जुटाए जा चुके हैं। इससे पहले 2024 में 336 आईपीओ से 1.90 लाख करोड़ रुपए जुटाए गए थे, जो अब टूट गया है।

2025 में जुटाए गए कुल धन में से लगभग 94 प्रतिशत राशि मेनबोर्ड आईपीओ से आई है।

पिछले दो वर्षों में केवल 198 बड़ी कंपनियों (मेनबोर्ड) ने लगभग 3.6 लाख करोड़ रुपए जुटाए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि बड़ी कंपनियों के आईपीओ को निवेशकों से अच्छा समर्थन प्राप्त हो रहा है और आईपीओ की मांग निरंतर बनी हुई है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस दौरान लिस्टिंग के मामले में एसएमई सेगमेंट (छोटी और मझोली कंपनियां) भी काफी सक्रिय रहा है, और बड़ी संख्या में कंपनियां लिस्ट हुई हैं।

रिपोर्ट में यह जानकारी भी दी गई है कि अब आईपीओ केवल कुछ ही सेक्टरों तक सीमित नहीं हैं। पिछले दो वर्षों में कई भिन्न उद्योगों की कंपनियां बाजार में आई हैं।

2025 में आईपीओ से सबसे अधिक धन एनबीएफसी (नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों) ने जुटाया है। इसके बाद कैपिटल गुड्स, टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर का नंबर रहा।

2024 में जहां ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम, रिटेल और ई-कॉमर्स कंपनियों ने अधिक आईपीओ लाए थे, वहीं 2025 में इनका योगदान कम रहा। यह विशेष बात है कि टेलीकॉम, यूटिलिटी और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर से 2025 में कोई आईपीओ नहीं आया।

इस बदलाव से यह स्पष्ट होता है कि आईपीओ मार्केट में कौन-सा सेक्टर आगे बढ़ेगा, यह बाजार की स्थिति और निवेशकों की पसंद पर निर्भर करेगा।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों में आईपीओ के माध्यम से जुटाई गई कुल धनराशि में से आधे से अधिक हिस्सा युवा कंपनियों (यानी 20 वर्ष से कम आयु वाली कंपनियों) का है। वहीं, आकार के हिसाब से, स्मॉलकैप कंपनियों ने भी कुल रकम का 50 प्रतिशत से अधिक जुटाया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह जानकर गर्व होता है कि भारतीय आईपीओ मार्केट ने पिछले दो वर्षों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया है। निवेशकों का भरोसा, आर्थिक विकास और नई कंपनियों का उभार, ये सभी संकेत देते हैं कि भारत का व्यवसायिक भविष्य उज्ज्वल है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय आईपीओ मार्केट का आकार क्या है?
पिछले दो वर्षों में भारतीय आईपीओ मार्केट ने 3.8 लाख करोड़ रुपए का आकार प्राप्त किया है।
2025 में कितने आईपीओ हुए?
2025 में अब तक 365 से अधिक आईपीओ हुए हैं।
बड़ी कंपनियों ने कितनी राशि जुटाई?
पिछले दो वर्षों में बड़ी कंपनियों ने लगभग 3.6 लाख करोड़ रुपए जुटाए हैं।
कौन से सेक्टर ने सबसे अधिक धन जुटाया?
2025 में एनबीएफसी (नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों) ने सबसे अधिक धन जुटाया।
आईपीओ में युवा कंपनियों का योगदान क्या है?
पिछले दो वर्षों में आईपीओ के माध्यम से जुटाई गई कुल धनराशि में से आधे से अधिक हिस्सा युवा कंपनियों का है।
राष्ट्र प्रेस
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