भारतीय शेयर बाजार का क्षेत्रीय बाजारों से बेहतर प्रदर्शन संभव, कॉरपोरेट आय FY27 में 17% बढ़ने का अनुमान
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाजार इस वर्ष डॉलर में 15.6% की गिरावट झेलने के बावजूद एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अन्य प्रमुख बाजारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करने की स्थिति में है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की ताज़ा रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है कि अगले वित्त वर्ष (FY27) में भारतीय कंपनियों की आय में 17% तक की वृद्धि हो सकती है। यह रिपोर्ट 10 अक्टूबर 2026 को सामने आई है।
जेफरीज की सिफारिश और भारत का वेटेज
जेफरीज के इक्विटी स्ट्रैटेजी के ग्लोबल हेड क्रिस वुड द्वारा तैयार की गई 'एशिया मैक्सिमा' रिपोर्ट में एमएससीआई एसी एशिया पैसिफिक (जापान को छोड़कर) इंडेक्स में 10.5% के बेंचमार्क वेटेज के मुकाबले भारत के लिए 12% आवंटन की सिफारिश की गई है। यह अधिक वेटेज इस बात का संकेत है कि जेफरीज भारत को एशिया में एक पसंदीदा निवेश गंतव्य मान रही है।
गौरतलब है कि स्थानीय मुद्रा में निफ्टी इस वर्ष 13.4% नीचे है और 42.3% की गिरावट वाले इंडोनेशिया के बाद यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र का दूसरा सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला बाजार बन गया है। बावजूद इसके, रिपोर्ट में भारत की दीर्घकालिक संभावनाओं को मजबूत बताया गया है।
जीडीपी और कॉरपोरेट आय अनुमान
वुड के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में भारत की वास्तविक (रियल) जीडीपी वृद्धि दर 6.5% से 7% के बीच रह सकती है, जबकि नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 11% से 12% रहने का अनुमान है। कॉरपोरेट आय के मोर्चे पर, चालू वित्त वर्ष (FY26) में 14% और अगले वित्त वर्ष (FY27) में 17% वृद्धि की उम्मीद जताई गई है।
रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भारत की संरचनात्मक विकास की कहानी बरकरार है और व्यापक आर्थिक आँकड़े भी मजबूती बनाए हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कई उभरते बाजारों में विदेशी निवेशकों की धारणा कमजोर हुई है।
बैंक क्रेडिट और निजी पूंजीगत व्यय के संकेत
रिपोर्ट में बैंकिंग क्षेत्र के आँकड़े भी उत्साहजनक बताए गए हैं। सितंबर 2026 के मध्य तक बैंक क्रेडिट में साल-दर-साल 18.1% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। अगस्त 2026 में कॉर्पोरेट लोन 21.6% और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को दिए गए ऋण में 25.5% की वृद्धि हुई। इसी अवधि में जमा राशि में 17.3% का इजाफा हुआ।
रिपोर्ट के अनुसार, कॉर्पोरेट ऋण में यह तेज वृद्धि इस बात का संकेत है कि निजी क्षेत्र का लंबे समय से प्रतीक्षित पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) चक्र आखिरकार शुरू हो सकता है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव होगा।
मशीनरी आयात में उछाल और रुपये की स्थिति
अगस्त 2026 में समाप्त 12 महीनों में मशीनरी का कुल आयात 66 अरब डॉलर रहा, जो वित्त वर्ष 2021 में महज 29 अरब डॉलर था। यह वृद्धि घरेलू उत्पादन क्षमता विस्तार का संकेत देती है।
मुद्रा मोर्चे पर, वुड का मानना है कि 2025 की शुरुआत से 10.7% की गिरावट के बाद भारतीय रुपया संभवतः अपने निचले स्तर पर पहुँच चुका है और आगे स्थिरता की उम्मीद है। एक स्थिर मुद्रा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की वापसी को प्रोत्साहित कर सकती है।
आगे की राह
आँकड़ों के अनुसार, भारत का व्यापक आर्थिक परिदृश्य क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अधिक अनुकूल बना हुआ है। निजी कैपेक्स चक्र की शुरुआत, मजबूत क्रेडिट वृद्धि और अनुमानित कॉरपोरेट आय वृद्धि मिलकर यह संकेत देती है कि आने वाले वित्त वर्षों में भारतीय बाजार वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बना रह सकता है।