वैश्विक तनावों के बावजूद वित्त वर्ष 2026 में भारतीय शेयर बाजार की मजबूत बुनियादी स्थिति, सुधार की संभावनाएँ

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वैश्विक तनावों के बावजूद वित्त वर्ष 2026 में भारतीय शेयर बाजार की मजबूत बुनियादी स्थिति, सुधार की संभावनाएँ

सारांश

भारतीय शेयर बाजार ने वित्त वर्ष 2025-26 में निराशाजनक प्रदर्शन किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी बुनियादी स्थिति अब भी मजबूत है। क्या आगे सुधार की उम्मीद है? जानिए इस लेख में!

Key Takeaways

  • भारतीय शेयर बाजार ने वित्त वर्ष 2025-26 में निराशाजनक प्रदर्शन किया।
  • सेंसेक्स और निफ्टी में क्रमशः 5.36%25 और 3.6%25 की गिरावट आई।
  • बाजार की बुनियादी स्थिति अभी भी मजबूत है।
  • कुछ शेयरों ने गिरते बाजार में अच्छा प्रदर्शन किया।
  • आने वाले समय में सुधार की संभावनाएँ हैं।

मुंबई, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय शेयर बाजार ने वित्त वर्ष 2025-26 का समापन निराशाजनक प्रदर्शन के साथ किया। कोविड-19 द्वारा प्रभावित वर्ष को छोड़कर, सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों के लिए यह पिछले एक दशक का सबसे खराब वर्ष साबित हुआ। वित्त वर्ष के अंतिम कारोबारी दिन सोमवार को भारी बिकवाली ने बाजार में मंदी के माहौल को और गहरा कर दिया।

वित्तीय वर्ष के अंतिम कारोबारी दिन सोमवार को सेंसेक्स 1,635 अंक गिरकर 71,947 पर और निफ्टी 488 अंक गिरकर 22,331 पर बंद हुआ। इस गिरावट के कारण बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण भी लगभग 10 लाख करोड़ रुपए घटकर 412.43 लाख करोड़ रुपए रह गया, जो पिछले सत्र में 422 लाख करोड़ रुपए था।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसके बावजूद बाजार की बुनियादी स्थिति अब भी मजबूत बनी हुई है, जो आने वाले समय में सुधार के संकेत देती है।

पूरे वित्त वर्ष 2026 में सेंसेक्स में लगभग 5.36 प्रतिशत और निफ्टी में 3.6 प्रतिशत की गिरावट आई। इस गिरावट का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता रही। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव डाला।

मार्च 2026 बाजार के लिए सबसे कमजोर महीना रहा और सेंसेक्स तथा निफ्टी, दोनों में लगभग 10.5 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। यह गिरावट मार्च 2020 के बाद सबसे अधिक मानी जा रही है। कच्चे तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहना और विदेशी निवेशकों द्वारा 12.3 अरब डॉलर की रिकॉर्ड बिकवाली ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला।

हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि भारतीय बाजार का इतिहास बताता है कि लगातार दो वित्तीय वर्षों में गिरावट की संभावना बेहद कम रहती है। इससे संकेत मिलता है कि आगे बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है।

वैश्विक घटनाक्रमों का असर भी भारतीय बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध, ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने और तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा, आरबीआई द्वारा घरेलू कर्ज से जुड़े नियमों में सख्ती के बाद बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में भी गिरावट आई।

सेक्टोरल स्तर पर, निफ्टी रियल्टी, आईटी और एफएमसीजी इंडेक्स सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। वित्त वर्ष 2026 में रियल्टी इंडेक्स में 21 प्रतिशत, आईटी में 20 प्रतिशत और एफएमसीजी में 13 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।

फिर भी, कुछ शेयरों ने इस गिरते बाजार में भी अच्छा प्रदर्शन किया। श्रीराम फाइनेंस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (बीईएल), भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), टाइटन और आइशर मोटर्स जैसे शेयरों में 27 से 38 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई, जिसने निवेशकों का विश्वास मजबूत किया।

विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही कुछ शेयरों में गिरावट आई हो, लेकिन यह बाजार के सामान्य चक्र का हिस्सा माना जाता है। उतार-चढ़ाव के इस दौर में निवेशकों के लिए अच्छे अवसर भी बनते हैं, खासकर मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में

वैश्विक स्तर पर चुनौतियों के बावजूद, भारत का बाजार अपेक्षाकृत स्थिर रहा है। एशियाई बाजारों में भले ही तेज बढ़त देखने को मिली हो, लेकिन भारतीय बाजार की दीर्घकालिक मजबूती और निवेशकों का विश्वास इसे अलग बनाता है।

Point of View

लेकिन इसके बुनियादी ढांचे में मजबूती बनी हुई है। यह संकेत देता है कि निकट भविष्य में सुधार की संभावनाएँ हैं।
NationPress
19/04/2026

Frequently Asked Questions

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का मुख्य कारण क्या था?
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली थे।
क्या भारतीय बाजार में सुधार की संभावना है?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय बाजार की बुनियादी स्थिति मजबूत है, जिससे आगे सुधार की उम्मीद है।
कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए?
निफ्टी रियल्टी, आईटी और एफएमसीजी इंडेक्स सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
क्या कुछ शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया?
हाँ, श्रीराम फाइनेंस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, और भारतीय स्टेट बैंक जैसे कुछ शेयरों ने 27 से 38 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी।
क्या भारतीय बाजार में गिरावट का इतिहास है?
भारतीय बाजार का इतिहास बताता है कि लगातार दो वित्तीय वर्षों में गिरावट की संभावना बेहद कम रहती है।
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