भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 961 अंक तक लुढ़का
सारांश
Key Takeaways
- सेंसेक्स 961 अंक लुढ़का
- निफ्टी 317 अंक गिरा
- रियल्टी और ऑटो में सबसे अधिक बिकवाली
- विदेशी निवेशकों की बिकवाली का प्रभाव
- कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि
मुंबई, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय शेयर बाजार ने हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को गंभीर गिरावट के साथ समापन किया। दिन के अंत में, सेंसेक्स 961.42 अंक या 1.17 प्रतिशत की कमी के साथ 81,287.19 पर और निफ्टी 317.90 अंक या 1.25 प्रतिशत गिरकर 25,178.65 पर बंद हुआ।
बिकवाली का सबसे बड़ा दबाव रियल्टी और ऑटो शेयरों में देखा गया। निफ्टी रियल्टी 2.26 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो 1.86 प्रतिशत के नुकसान के साथ समापन हुआ। अन्य क्षेत्रों में, निफ्टी एफएमसीजी 1.69 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 1.67 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 1.55 प्रतिशत, निफ्टी फार्मा 1.50 प्रतिशत, निफ्टी कंजप्शन 1.48 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 1.41 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।
वहीं दूसरी ओर, निफ्टी आईटी 0.16 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 0.17 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया 0.60 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बंद हुए।
लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बिकवाली का सामना करना पड़ा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 682.55 अंक या 1.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ 59,115.60 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 188.75 अंक या 1.10 प्रतिशत की गिरावट के साथ 16,928.90 पर था।
सेंसेक्स पैक में एचसीएल टेक, ट्रेंट, इन्फोसिस और इटरनल लाभ में रहे, जबकि सन फार्मा, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, इंडिगो, एमएंडएम, मारुति सुजुकी, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचयूएल, कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, आईटीसी और एचडीएफसी बैंक लूजर रहे।
इस सत्र में भारतीय शेयर बाजार की गिरावट के पीछे कई कारण थे, जिनमें विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली (गुरुवार के सत्र में एफआईआई ने 3,465.99 करोड़ रुपए के इक्विटी की बिक्री की थी), ईरान-अमेरिका के बीच कोई समझौता न होना, डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरावट और वैश्विक बाजार से कमजोर संकेत शामिल थे।
ईरान और अमेरिका के बीच कोई समझौता न होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि देखी जा रही है। खबर लिखे जाने तक, डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.63 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 66.25 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 1.38 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 71.86 डॉलर प्रति बैरल पर था।