सेंसेक्स 547 अंक टूटकर 71,924 पर बंद; FMCG, PSU बैंक शेयरों में भारी बिकवाली
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाजार सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 के कारोबारी सत्र में वैश्विक अनिश्चितताओं के दबाव में लाल निशान में बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स 547.65 अंक यानी 0.76 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71,924.68 पर और निफ्टी 50 सूचकांक 157.10 अंक यानी 0.70 प्रतिशत टूटकर 22,363.35 पर बंद हुआ। सत्र की शुरुआत में बाजार ने बढ़त दिखाई, लेकिन विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और वैश्विक बाधाओं ने तेजी को टिकने नहीं दिया।
किन सेक्टर्स में रही सबसे अधिक गिरावट
बाजार में बिकवाली का सबसे तीखा दबाव एफएमसीजी और सरकारी बैंकिंग क्षेत्र में देखा गया। निफ्टी एफएमसीजी 1.67 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक 1.18 प्रतिशत की गिरावट के साथ शीर्ष हारने वाले सूचकांकों में रहे। निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी आईटी, निफ्टी कंजम्पशन, निफ्टी कमोडिटीज और निफ्टी ऑयल एंड गैस भी गिरावट में रहे।
इसके विपरीत, निफ्टी मीडिया, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी ऑटो, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी फार्मा, निफ्टी पीएसई और निफ्टी एनर्जी हरे निशान में बंद हुए, जो बाजार की मिली-जुली तस्वीर को दर्शाता है।
मिडकैप और स्मॉलकैप में दिखी अलग चाल
लार्जकैप शेयरों के विपरीत, मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में खरीदारी का रुझान रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक 272.10 अंक यानी 1.42 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,425.80 पर बंद हुआ। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 47.25 अंक की मामूली तेजी के साथ 58,834.55 पर रहा। यह विभाजन संकेत देता है कि घरेलू खुदरा निवेशक चुनिंदा खरीदारी कर रहे हैं, जबकि संस्थागत निवेशक सतर्क बने हुए हैं।
सेंसेक्स पैक: गेनर्स और लूजर्स
बीईएल, एम एंड एम, कोटक महिंद्रा बैंक, एचसीएल टेक, बजाज फाइनेंस, सन फार्मा और टाइटन सेंसेक्स पैक में बढ़त दर्ज करने वाले प्रमुख शेयर रहे।
दूसरी ओर, आईटीसी, टेक महिंद्रा, एचयूएल, एलएंडटी, एसबीआई, टीसीएस, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंडिगो, टाटा स्टील, इन्फोसिस, आईसीआईसीआई बैंक, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक, ट्रेंट, एक्सिस बैंक, एनटीपीसी, इटरनल और पावर ग्रिड गिरावट वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे।
विशेषज्ञों का विश्लेषण
बाजार जानकारों के अनुसार, 10 साल के बॉन्ड यील्ड के तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुँचने और बाहरी अनिश्चितताओं के चलते FII की निरंतर बिकवाली ने बाजार की धारणा को कमज़ोर किया। उन्होंने बताया कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की डॉलर ज़रूरतों के लिए एक विशेष विंडो खोलने और हेजिंग नियमों को सख्त करने के बाद रुपए में कुछ रिकवरी आई।
बैंकिंग शेयरों पर विशेष दबाव के बारे में जानकारों ने कहा कि RBI द्वारा अतिरिक्त तरलता को सोखने के लिए दैनिक CRR रखरखाव की अनिवार्यता बढ़ाने के बाद इस सेक्टर पर दबाव बढ़ा। इसके अलावा, निवेशक घरेलू CPI महंगाई के आँकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जिनसे मौद्रिक नीति की अगली दिशा का संकेत मिल सकता है।
मध्य पूर्व तनाव और कच्चे तेल की चिंता
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, मध्य पूर्व में जारी तनाव एक बड़ी चिंता बना हुआ है। हूती ताकतों द्वारा सऊदी और क्षेत्रीय ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने और कीमतें ऊँची रहने की आशंका बनी हुई है, जो भारत जैसे तेल-आयात पर निर्भर देश के लिए चालू खाते के घाटे को और बढ़ा सकती है। आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नज़र महंगाई के आँकड़ों और वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति पर रहेगी।