सेंसेक्स 160 अंक गिरकर 72,319 पर खुला, निफ्टी ऑटो टॉप लूजर; FII की बिकवाली जारी
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 को शुरुआती कारोबार में 160 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,319 पर खुला, जबकि NSE निफ्टी 50 79 अंक यानी 0.35 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 22,541 पर था। मिश्रित वैश्विक संकेतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने सुबह 9:22 बजे IST तक बाज़ार पर दबाव बनाए रखा।
कौन से सेक्टर लाल निशान में
शुरुआती कारोबार में निफ्टी ऑटो सबसे बड़ा लूज़र रहा। इसके अलावा निफ्टी कंजम्पशन, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मीडिया, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी PSE, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी फार्मा, निफ्टी FMCG, निफ्टी एनर्जी और निफ्टी PSU बैंक सभी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
वहीं दूसरी ओर, निफ्टी IT, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज़ में हरे निशान के साथ कारोबार देखा गया, जिससे गिरावट की गहराई कुछ सीमित रही।
मिडकैप और स्मॉलकैप पर भी असर
लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमज़ोरी रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 404 अंक यानी 0.68 प्रतिशत की गिरावट के साथ 58,936 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 197 अंक यानी 1.04 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 19,044 पर कारोबार कर रहा था।
वैश्विक बाज़ारों का मिला-जुला संकेत
एशियाई बाज़ारों में मिश्रित रुझान रहा — टोक्यो, ताइपे और सोल हरे निशान में थे, जबकि जकार्ता लाल निशान में था। अमेरिकी बाज़ार बुधवार को मिश्रित बंद हुए थे, जिसमें डाओ जोन्स 0.86 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ और नैस्डैक 0.24 प्रतिशत की मज़बूती के साथ बंद हुआ।
FII की बिकवाली और बॉन्ड यील्ड का दबाव
बाज़ार जानकारों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली पिछले दो ट्रेडिंग सत्रों में और तेज़ हो गई, जिस दौरान उन्होंने कुल ₹20,128 करोड़ के शेयर बेचे। अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड के बढ़कर 5.3 प्रतिशत होने के चलते FII की बिकवाली आगे भी जारी रहने की आशंका जताई जा रही है।
गौरतलब है कि FII की गतिविधियों में एक विरोधाभास भी दिख रहा है — एक्सचेंज के ज़रिए बिकवाली करने के बावजूद वे प्राइमरी मार्केट में निरंतर निवेश कर रहे हैं और महँगे मिड-कैप तथा स्मॉल-कैप शेयरों की खरीदारी भी जारी रखे हुए हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाज़ार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक इस कमज़ोर दौर का उपयोग अच्छी गुणवत्ता वाले शेयर जमा करने के लिए कर सकते हैं — विशेष रूप से ग्रोथ सेगमेंट के लार्ज-कैप स्टॉक, जहाँ रिस्क-रिवॉर्ड अनुपात निवेशकों के अनुकूल बताया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब घरेलू आर्थिक बुनियाद मज़बूत है, लेकिन वैश्विक ब्याज दर का माहौल उभरते बाज़ारों पर दबाव डाल रहा है।