सेंसेक्स 628 अंक टूटा, निफ्टी 23,299 पर; ब्रेंट क्रूड और बॉन्ड यील्ड से बाजार पर दबाव
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच लाल निशान में खुला और सुबह 9 बजकर 17 मिनट पर 628 अंक यानी 0.84 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,199 पर था। इसी दौरान NSE निफ्टी 50 इंडेक्स 207 अंक यानी 0.88 प्रतिशत फिसलकर 23,299 पर आ गया। फाइनेंशियल और बैंकिंग शेयरों में तेज बिकवाली ने गिरावट को और गहरा किया।
कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में
शुरुआती कारोबार में गिरावट का नेतृत्व निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी प्राइवेट बैंक ने किया, जो दोनों करीब 2-2 प्रतिशत कमजोर थे। इसके अलावा निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी मेटल, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी कंजप्शन और निफ्टी एनर्जी समेत लगभग सभी सेक्टोरल सूचकांक लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, इंडिगो, HDFC बैंक, एशियन पेंट्स, ट्रेंट, L&T, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, M&M, भारती एयरटेल और इटरनल सबसे ज्यादा टूटने वाले शेयरों में शामिल थे।
गेनर्स का पक्ष — IT शेयरों में राहत
जहाँ ज्यादातर शेयरों में दबाव था, वहीं IT सेक्टर में कुछ राहत देखी गई। टेक महिंद्रा, सन फार्मा, HCL टेक, TCS और इन्फोसिस सेंसेक्स पैक में बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। यह उल्लेखनीय है कि ये वही शेयर हैं जो वैश्विक अनिश्चितता के दौर में आमतौर पर डिफेंसिव दांव के रूप में देखे जाते हैं।
मिडकैप और स्मॉलकैप भी दबाव में
लार्जकैप के साथ-साथ छोटे और मझोले शेयरों में भी कमजोरी दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 606 अंक यानी 0.97 प्रतिशत गिरकर 61,808 पर था, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 147 अंक यानी 0.74 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 19,844 पर कारोबार कर रहा था।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन सेगमेंट में भारी घरेलू लिक्विडिटी का प्रवाह ही मिडकैप और स्मॉलकैप के अपेक्षाकृत मजबूत बने रहने का मुख्य कारण है। उच्च वैल्यूएशन के बावजूद ग्रोथ शेयरों में खरीदारी जारी है, वहीं सही वैल्यूएशन पर उपलब्ध लार्जकैप शेयर सुस्त पड़े हैं।
वैश्विक कारक — ब्रेंट क्रूड और बॉन्ड यील्ड
बाजार विशेषज्ञों ने दो प्रमुख वैश्विक चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। ब्रेंट क्रूड की कीमत 102 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी है और अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड बढ़कर 5.11 प्रतिशत पर पहुँच गई है — दोनों ही भारतीय बाजारों के लिए नकारात्मक संकेत हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक ये दोनों वैश्विक दबाव बने रहेंगे, तब तक बाजार में तेज रिकवरी की उम्मीद कम ही है।
वैश्विक स्तर पर भी कमजोरी का माहौल रहा — टोक्यो, शंघाई, हांगकांग और जकार्ता के बाजार लाल निशान में थे। अमेरिकी शेयर बाजार भी बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि मिडकैप और स्मॉलकैप में यह ट्रेंड बदलेगा, लेकिन इसकी समयसीमा कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की दिशा पर निर्भर करेगी। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतिगत अनिश्चितता पहले से ही बाजारों को अस्थिर बनाए हुए है। निवेशकों की नजर अब अगले वैश्विक आर्थिक संकेतों और घरेलू व्यापक आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी।