इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में मंजूरी नहीं, समयबद्ध क्रियान्वयन और उत्पादन पर हो फोकस: केंद्र सरकार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 18 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि औद्योगिक कॉरिडोर और बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की सफलता का पैमाना अब केवल स्वीकृतियाँ नहीं, बल्कि समयबद्ध क्रियान्वयन, निवेश आकर्षण और उत्पादन की वास्तविक शुरुआत होगी। सरकार का मानना है कि परियोजनाएँ तभी सार्थक हैं जब वे धरातल पर उतरें और आर्थिक गतिविधियों में परिवर्तित हों।
बैठक में क्या हुआ
राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास एवं कार्यान्वयन न्यास (NICDIT) की शीर्ष निगरानी प्राधिकरण की तीसरी बैठक में केंद्रीय मंत्रियों ने परियोजनाओं के तेज और परिणामोन्मुखी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यों से आग्रह किया गया कि वे भूमि उपलब्धता, कनेक्टिविटी, बिजली-पानी जैसी उपयोगिताओं, वैधानिक मंजूरियों और परियोजना विशेष प्रयोजन इकाइयों (SPV) से जुड़ी बाधाओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर करें।
वित्त मंत्री की प्राथमिकताएँ
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि राज्यों को जमीन आवंटन, सड़क एवं परिवहन संपर्क, बुनियादी सुविधाओं और नियामकीय मंजूरियों से जुड़ी अड़चनों को प्राथमिकता से सुलझाना चाहिए। उन्होंने पीएम गतिशक्ति के माध्यम से समेकित योजना निर्माण और निवेशक-अनुकूल भूमि आवंटन प्रणालियों के निरंतर उपयोग पर जोर दिया।
सीतारमण ने यह भी कहा कि औद्योगिक विकास केवल फैक्टरी निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए — श्रमिक आवास, स्वास्थ्य सुविधाएँ, कौशल विकास, सार्वजनिक परिवहन और अन्य सामाजिक सुविधाएँ भी परियोजनाओं का अभिन्न हिस्सा होनी चाहिए। केंद्र सरकार सार्वजनिक पूंजीगत व्यय, राज्यों को सहायता, MSME के लिए बेहतर ऋण सहायता और कर एवं सीमा शुल्क उपायों के जरिए घरेलू विनिर्माण और सप्लाई चेन को मजबूत कर रही है।
वाणिज्य मंत्री का दृष्टिकोण
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भव्य और भविष्योन्मुखी औद्योगिक परियोजनाओं को पीएम गतिशक्ति के साथ जोड़कर समेकित क्षेत्रीय विकास मॉडल के तहत विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने निवेशकों तक पहुँच बढ़ाने और औद्योगिक नोड्स की प्रभावी मार्केटिंग की आवश्यकता पर बल दिया।
गोयल ने भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाते हुए देश-विशिष्ट और क्षेत्र-विशिष्ट औद्योगिक एन्क्लेव विकसित करने की वकालत की। उन्होंने प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर, फ्लैटेड फैक्ट्री, श्रमिक आवास और सामाजिक सुविधाओं से युक्त तैयार औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित करने की जरूरत बताई।
जलमार्ग और पूर्वोत्तर पर विशेष जोर
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने औद्योगिक कॉरिडोरों को राष्ट्रीय जलमार्गों से जोड़ने का सुझाव दिया। उनके अनुसार जलमार्गों को औद्योगिक विकास की रीढ़ के रूप में विकसित करने से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी और औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
सोनोवाल ने पूर्वोत्तर राज्यों में औद्योगिक बुनियादी ढाँचे के विकास पर विशेष जोर देते हुए कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी, भूमि उपलब्धता और स्थानीय संसाधनों के दोहन से देश के औद्योगिक आधार का विस्तार किया जा सकता है।
SPV को अधिकार देने की अपील
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने राज्यों से परियोजना SPV को योजना निर्माण, विकास और नगर प्रशासन से जुड़े पर्याप्त अधिकार देने की अपील की। उनका मानना है कि इससे औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं का कार्यान्वयन अधिक प्रभावी और तेज हो सकेगा। यह ऐसे समय में आया है जब कई बड़ी परियोजनाएँ नौकरशाही अड़चनों के कारण वर्षों से लंबित पड़ी हैं।