निर्मला सीतारमण की NICDIT बैठक: ₹2.21 लाख करोड़ निवेश और 1.29 लाख रोजगार का लक्ष्य, उत्पादन में तेजी पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार, 17 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट एंड इम्प्लीमेंटेशन ट्रस्ट (NICDIT) की शीर्ष निगरानी समिति की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम (NICDP) के तहत चल रही परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ औद्योगिक कॉरिडोर विकास के अगले चरण की प्राथमिकताएं भी तय की गईं। आंकड़ों के अनुसार अब तक आवंटित प्लॉटों से ₹2.21 लाख करोड़ के निवेश और 1.29 लाख लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए
बैठक में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी समेत कई राज्यों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े।
सीतारमण का स्पष्ट संदेश: मंजूरी से आगे बढ़ो
सीतारमण ने कहा कि NICDP भारत सरकार की उस रणनीति का अहम स्तंभ है जिसका उद्देश्य मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार, लॉजिस्टिक्स में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और विश्व-स्तरीय औद्योगिक इकोसिस्टम बनाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब काम सिर्फ परियोजनाओं की मंजूरी तक सीमित नहीं रहना चाहिए — बुनियादी ढांचे का समय पर निर्माण, भूमि आवंटन, निवेश आकर्षण और उत्पादन शुरू करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि जमीन, कनेक्टिविटी, यूटिलिटी, कानूनी मंजूरी और प्रोजेक्ट SPV की शक्तियों से जुड़ी अड़चनें तुरंत दूर की जाएं। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि मौजूदा उपलब्ध जमीन और बुनियादी ढांचे की इन्वेंट्री समाप्त होने से पहले ही अगली पाइपलाइन तैयार रखनी होगी, जिसके लिए पीएम गतिशक्ति के जरिए एकीकृत योजना और निवेशक-अनुकूल भूमि आवंटन आवश्यक है। साथ ही उन्होंने औद्योगिक विकास के साथ-साथ मजदूरों के लिए आवास, स्वास्थ्य, कौशल विकास और सार्वजनिक परिवहन जैसी सामाजिक सुविधाओं की जरूरत पर भी बल दिया।
गोयल की अपील: 'प्लग-एंड-प्ले' इकोसिस्टम बनाएं
पीयूष गोयल ने औद्योगिक कॉरिडोर परियोजनाओं को तेज गति और ठोस नतीजों के साथ लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने 'प्लग-एंड-प्ले' बुनियादी ढांचे वाले ऐसे औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित करने का आह्वान किया जो निवेशकों के लिए पूरी तरह तैयार हों — जिनमें फ्लैटेड फैक्ट्रियां, वर्कर हाउसिंग और सहायक आर्थिक-सामाजिक ढांचा शामिल हो।
गोयल ने भाव्या योजना को पीएम गतिशक्ति के अनुरूप एकीकृत क्षेत्र-विकास दृष्टिकोण से जोड़ने की बात कही और कहा कि भारत के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से मिल रहे अवसरों का लाभ उठाकर देश- और सेक्टर-आधारित औद्योगिक एन्क्लेव विकसित किए जाएं। निवेशकों तक पहुंचने के लिए विशेष अभियान और औद्योगिक नोड्स की बेहतर मार्केटिंग को भी आवश्यक बताया गया।
NICDP की मौजूदा स्थिति: आंकड़े क्या कहते हैं
अब तक NICDP के तहत 13 राज्यों और 7 औद्योगिक कॉरिडोर में 20 परियोजनाएं मंजूर हैं। इनमें धोलेरा, शेंद्रा-बिडकिन, ग्रेटर नोएडा और विक्रम उद्योगपुरी जैसी चार औद्योगिक स्मार्ट सिटी उत्पादन चरण में पहुंच चुकी हैं। अगस्त 2024 में मंजूर 12 परियोजनाओं पर भी तेजी से काम जारी है।
आंकड़ों के अनुसार अब तक लगभग 5,348 एकड़ में 469 प्लॉट आवंटित किए जा चुके हैं। इनसे ₹2.21 लाख करोड़ के निवेश और 1.29 लाख लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है। फिलहाल 134 यूनिट उत्पादन में हैं और 95 यूनिट निर्माणाधीन हैं।
भाव्या योजना की भी बैठक में समीक्षा हुई, जिसका लक्ष्य देशभर में 100 निवेश-तैयार, प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क बनाना है। पहले दौर में 20 प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए राज्यों से 87 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो योजना में राज्यों की गहरी रुचि दर्शाता है।
जलमार्ग और उत्तर-पूर्व पर विशेष जोर
सर्बानंद सोनोवाल ने औद्योगिक कॉरिडोर को राष्ट्रीय जलमार्गों से जोड़ने की अहमियत रेखांकित की और कहा कि जलमार्ग कॉरिडोर विकास की रीढ़ बन सकते हैं। उन्होंने उत्तर-पूर्व राज्यों में मजबूत कनेक्टिविटी और संसाधन-समृद्ध क्षेत्रों में औद्योगिक बुनियादी ढांचा विकसित करने की जरूरत भी बताई।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि राज्य सरकारें प्रोजेक्ट SPV को योजना, विकास और नगरपालिका संबंधी पर्याप्त शक्तियां प्रदान करें ताकि निर्णय प्रक्रिया तेज हो और निवेशक-अनुकूल माहौल बन सके।
आगे की राह: नई कसौटी
बैठक के समापन पर शीर्ष निगरानी समिति ने तय किया कि आगे की प्रगति सिर्फ निर्मित बुनियादी ढांचे से नहीं, बल्कि इस बात से मापी जाएगी कि कितनी जल्दी निवेश आया, उत्पादन शुरू हुआ और रोजगार सृजित हुआ। यह बदलाव नीति-निर्माण से क्रियान्वयन की ओर स्पष्ट झुकाव का संकेत देता है।