पहली 'कांदा एक्सप्रेस' 440 मीट्रिक टन प्याज लेकर 18 अक्टूबर तक अगरतला पहुंचेगी, त्योहारी सीजन में आपूर्ति मजबूत करने की कोशिश
सारांश
मुख्य बातें
उपभोक्ता मामले विभाग ने 16 अक्टूबर 2026 को जानकारी दी कि पहली 'कांदा एक्सप्रेस' रेल रैक लगभग 440 मीट्रिक टन प्याज लेकर 18 अक्टूबर तक अगरतला पहुंचने की उम्मीद है। यह कदम पूर्वोत्तर क्षेत्र में त्योहारी सीजन से पहले उपभोक्ताओं को किफायती दरों पर प्याज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, अब तक 1,513.46 मीट्रिक टन बफर प्याज पूर्वोत्तर क्षेत्र में पहुंचाया जा चुका है। इसमें 840 मीट्रिक टन और 452 मीट्रिक टन प्याज लेकर क्रमशः दो कांदा एक्सप्रेस रेल रैक तथा 44 ट्रकों का योगदान शामिल है।
यह आपूर्ति मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF) के तहत बनाए गए बफर स्टॉक से की जा रही है। सरकार का कहना है कि रेल और सड़क — दोनों माध्यमों से वितरण का दायरा बढ़ाने का मकसद प्रमुख उपभोक्ता केंद्रों तक बफर स्टॉक की पहुंच सुनिश्चित करना है।
किन जिलों को मिलेगा फायदा
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस कदम से त्रिपुरा के आठ में से सात जिलों — धलाई, दक्षिण त्रिपुरा, खोवाई, उनाकोटी, पश्चिम त्रिपुरा, गोमती और सिपाहीजाला — में बाजार आपूर्ति को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इससे पहले भेजी गई खेपों से असम, त्रिपुरा और नागालैंड के प्रमुख क्षेत्रों — कामरूप, गुवाहाटी, गोमती, दीमापुर, सिपाहीजाला, कोहिमा, निउलैंड और चुमौकेदिमा — में प्याज की आपूर्ति की गई है।
खुदरा कीमतों पर असर
असम में बीते कुछ हफ्तों में खुदरा प्याज कीमतों में नरमी दर्ज की गई है। राज्य के लगभग 12 केंद्रों पर प्याज के दाम ₹1 से ₹8 प्रति किलोग्राम तक घटे हैं।
दो वर्ष पहले असम में प्याज का औसत खुदरा मूल्य ₹61.96 प्रति किलोग्राम था, जबकि अखिल भारतीय औसत ₹54.13 प्रति किलोग्राम था — दोनों के बीच ₹7.83 प्रति किलोग्राम का अंतर था। वर्तमान में असम का औसत खुदरा मूल्य ₹54.30 प्रति किलोग्राम है और अखिल भारतीय औसत ₹53.07 प्रति किलोग्राम — यानी यह अंतर घटकर महज ₹1.23 प्रति किलोग्राम रह गया है।
मंडी कीमतों में राष्ट्रीय रुझान
गौरतलब है कि खरीफ फसल की नई आवक तेज होने के साथ देश की प्रमुख मंडियों में भी प्याज की कीमतों में नरमी आई है। अखिल भारतीय औसत मंडी मूल्य सितंबर के लगभग ₹3,600 प्रति क्विंटल के उच्च स्तर से घटकर अक्टूबर में करीब ₹3,300 प्रति क्विंटल रह गया है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर के राज्यों में दूरी और परिवहन लागत की वजह से आवश्यक वस्तुओं की कीमतें राष्ट्रीय औसत से अधिक रहती हैं। सरकार का लक्ष्य आने वाले त्योहारी मौसम में आम उपभोक्ताओं पर मूल्य वृद्धि का बोझ कम रखना है। बफर स्टॉक वितरण का यह विस्तार इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत हस्तक्षेप माना जा रहा है।