तमिलनाडु में प्याज ₹60/किलो पार: राशन दुकानों से ₹30-40 में मिलेगी राहत, 70,000 किलो की माँग
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार का सहकारी क्षेत्र राशन दुकानों के ज़रिए ₹30–40 प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर प्याज बेचने की तैयारी में है, जबकि खुले बाज़ार में बड़ी प्याज की कीमत ₹60 प्रति किलो तक पहुँच चुकी है। इस पहल के तहत राज्य ने नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (नेफेड/NAFED) से 70,000 किलोग्राम प्याज के आवंटन की माँग की है।
कीमतों में कितनी हुई बढ़ोतरी
पिछले कुछ हफ्तों में प्याज की खुदरा कीमतें तेज़ी से चढ़ी हैं। बड़ी प्याज, जो पिछले महीने के अंत तक लगभग ₹30 प्रति किलो मिल रही थी, अब कई खुदरा बाज़ारों में ₹60 प्रति किलो के करीब बिक रही है — यानी एक महीने में दोगुनी। छोटी प्याज (शैलोट) की कीमत भी ₹40–50 से बढ़कर लगभग ₹70 प्रति किलो हो गई है। यह वृद्धि ऐसे समय में आई है जब उपभोक्ता पहले से ही कई आवश्यक सब्जियों की ऊँची कीमतों से जूझ रहे हैं।
सरकार का हस्तक्षेप: क्या है योजना
बाज़ार दरें स्थिर न होने की स्थिति में सहकारी क्षेत्र ने थोक में प्याज खरीदकर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से आपूर्ति करने का निर्णय लिया है। NAFED से आवंटन मिलने के बाद प्याज को तमिलनाडु भर की राशन दुकानों में वितरित किया जाएगा। उपभोक्ताओं को खुले बाज़ार की तुलना में ₹30 प्रति किलो तक की राहत मिलने की उम्मीद है।
अधिकारियों के अनुसार, पहली खेप की माँग का आकलन करने के बाद ही आगे की मात्रा मँगाने पर निर्णय लिया जाएगा। रियायती बिक्री कार्यक्रम के दौरान अधिकारी थोक और खुदरा दोनों बाज़ारों में कीमतों और उपलब्धता पर नज़र रखेंगे।
आम जनता पर असर
प्याज भारतीय रसोई की एक बुनियादी ज़रूरत है और इसकी कीमतें आम परिवारों के मासिक बजट को सीधे प्रभावित करती हैं। चेन्नई सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में उपभोक्ताओं ने बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता जताई है। रियायती दरों पर राशन दुकानों से प्याज मिलने से निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों को तत्काल राहत मिलने की संभावना है।
पिछली मिसालें और संदर्भ
गौरतलब है कि तमिलनाडु सरकार पहले भी आपूर्ति की कमी या मौसमी उतार-चढ़ाव के दौरान सहकारी संस्थाओं और राशन दुकानों का उपयोग आवश्यक वस्तुओं को नियंत्रित कीमतों पर बेचने के लिए करती रही है। यह कदम उसी स्थापित नीतिगत ढाँचे का हिस्सा है। देशभर में प्याज की कीमतें हर साल मानसून और फसल चक्र के अनुसार उतार-चढ़ाव करती हैं, जिससे राज्य सरकारों को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ता है।
आगे क्या होगा
NAFED से प्याज का आवंटन मिलते ही वितरण प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। पहली खेप की प्रतिक्रिया के आधार पर अतिरिक्त मात्रा मँगाने पर विचार किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि रियायती बिक्री से बाज़ार में कुछ हद तक प्रतिस्पर्धी दबाव भी बन सकता है, जो खुदरा कीमतों को नीचे लाने में सहायक हो सकता है।