प्याज ₹35 प्रति किलो में उपलब्ध: केंद्र ने मूल्य स्थिरीकरण भंडार से खुदरा बिक्री शुरू की
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 27 अगस्त 2026 को बढ़ती प्याज कीमतों के बीच उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए मूल्य स्थिरीकरण भंडार (Price Stabilisation Fund) से प्याज की खुदरा बिक्री शुरू कर दी। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने नई दिल्ली स्थित कृषि भवन से इस वितरण अभियान को हरी झंडी दिखाई, और प्याज को फिलहाल ₹35 प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
वितरण का दायरा और माध्यम
रियायती प्याज नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (NCCF), नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (नाफेड), केंद्रीय भंडार के आउटलेट्स और मोबाइल वैनों के ज़रिए बेची जाएगी। नाफेड के प्रबंध निदेशक दीपक अग्रवाल ने बताया कि अकेले दिल्ली में 40 स्थानों पर मोबाइल वैन तैनात की गई हैं।
इसके अतिरिक्त, नाफेड और NCCF के स्टोर, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तथा संगठित खुदरा शृंखलाओं के माध्यम से भी प्याज उपलब्ध कराई जाएगी। NCCF की प्रबंध निदेशक एनिस जोसेफ चंद्रा ने बताया कि अभियान शुरू होते ही संगठन के खुदरा केंद्रों — विशेषकर मेट्रो स्टेशनों के निकट स्थित बिक्री केंद्रों — पर बिक्री आरंभ हो गई है।
सरकार की स्थिति: उत्पादन और उपलब्धता पर्याप्त
निधि खरे ने स्पष्ट किया कि देश में प्याज के उत्पादन और उपलब्धता में कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष निर्यात का स्तर भी पिछले वर्ष के लगभग बराबर है। उनके अनुसार, बाज़ार में कीमतें नियंत्रित रखने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार समय-समय पर इसी तरह हस्तक्षेप करती है।
यह ऐसे समय में आया है जब खुदरा बाज़ारों में प्याज की कीमतें उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई थीं। गौरतलब है कि मूल्य स्थिरीकरण भंडार के माध्यम से यह हस्तक्षेप पिछले कई वर्षों से एक नियमित सरकारी तंत्र बन चुका है।
पीडीएस के ज़रिए विस्तार की संभावना
दीपक अग्रवाल ने बताया कि दिल्ली सरकार के साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की दुकानों के ज़रिए भी ₹35 प्रति किलोग्राम की दर से प्याज उपलब्ध कराने को लेकर बातचीत जारी है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो बड़ी संख्या में राशन कार्डधारक परिवारों को सीधा लाभ मिल सकेगा।
आगे क्या होगा
एनिस जोसेफ चंद्रा ने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में NCCF के वितरण नेटवर्क का और विस्तार किया जाएगा, ताकि अधिकाधिक उपभोक्ताओं तक रियायती प्याज पहुँचाई जा सके। सरकार का यह कदम आपूर्ति-पक्ष की बजाय माँग-पक्ष पर सीधे हस्तक्षेप की नीति को दर्शाता है — और यदि PDS चैनल सक्रिय होता है, तो इसकी पहुँच कई गुना बढ़ जाएगी।