'बाजीगर' का आइडिया दीपक तिजोरी का था, फिर शाहरुख खान कैसे बने फिल्म के हीरो? जानिए पूरा किस्सा
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता दीपक तिजोरी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि 1993 की सुपरहिट फिल्म 'बाजीगर' का मूल आइडिया उन्होंने ही निर्देशक जोड़ी अब्बास-मस्तान को दिया था — और शुरुआत में वह खुद इस फिल्म के मुख्य किरदार में नज़र आने वाले थे। लेकिन किस्मत के एक अजीब मोड़ पर यह भूमिका शाहरुख खान के हिस्से आई, जो आगे चलकर उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई।
हॉलीवुड फिल्म से मिली प्रेरणा
दीपक तिजोरी ने बताया कि उन्होंने हॉलीवुड फिल्म 'अ किस बिफोर डाइंग' देखी थी, जिसकी कहानी ने उन्हें गहरा प्रभावित किया। उन्होंने इसका हिंदी रूपांतरण बनाने का विचार अब्बास-मस्तान के सामने रखा और चाहते थे कि इस फिल्म में वह खुद मुख्य किरदार निभाएँ। अब्बास-मस्तान को यह आइडिया पसंद आया और शुरुआती चर्चाओं में ऐसा लग रहा था कि फिल्म दीपक के साथ ही बनेगी।
निर्माता तक पहुँची बात, फिर बदला समीकरण
दीपक तिजोरी ने आगे बताया कि उन्होंने निर्माता पहलाज निहलानी को भी इस प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी थी और बातचीत आगे बढ़ रही थी। लेकिन कुछ समय बाद उन्हें पता चला कि अब्बास-मस्तान इसी कहानी को लेकर दूसरे निर्माताओं से भी बातचीत कर रहे हैं। इसी बीच शाहरुख खान का नाम इस फिल्म से जुड़ने लगा।
उस दौर में शाहरुख और दीपक अच्छे दोस्त थे। दीपक ने स्वीकार किया कि यह जानकर वह हैरान ज़रूर हुए, लेकिन उन्होंने कोई विवाद नहीं खड़ा किया।
दीपक ने खुद शाहरुख को दी हरी झंडी
दीपक तिजोरी ने इंटरव्यू में कहा कि शाहरुख खान ने तब तक फिल्म के लिए हाँ नहीं कहा था, जब तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो गई। बाद में दीपक ने खुद शाहरुख को यह फिल्म करने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके शब्दों में, 'शायद किस्मत को यही मंजूर था — 'बाजीगर' शाहरुख खान के हिस्से में लिखी गई थी।' उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मामले को लेकर उनके मन में कभी कड़वाहट नहीं रही।
दीपक तिजोरी का करियर और योगदान
दीपक तिजोरी का जन्म 28 अगस्त 1961 को मुंबई में हुआ था। थिएटर से अपने सफर की शुरुआत करने वाले दीपक ने बिना किसी फिल्मी पृष्ठभूमि के इंडस्ट्री में जगह बनाई। साल 1990 में रिलीज़ हुई फिल्म 'आशिकी' ने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई। इसके बाद 'दिल है कि मानता नहीं', 'जो जीता वही सिकंदर', 'खिलाड़ी' और 'कभी हाँ कभी ना' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। 1990 का दशक उनके करियर का सबसे सफल दौर माना जाता है।
अभिनय के अलावा दीपक तिजोरी ने निर्देशन में भी कदम रखा। उन्होंने 'ओप्स!', 'टॉम, डिक एंड हैरी' और 'दो लफ्जों की कहानी' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। इस तरह उन्होंने हिंदी सिनेमा में एक अभिनेता और निर्देशक, दोनों रूपों में अपनी अलग पहचान बनाई।
बॉलीवुड की वह रात जिसने इतिहास बदला
'बाजीगर' 1993 में रिलीज़ हुई और बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की। यह उन शुरुआती हिंदी फिल्मों में से एक थी जिसमें नायक को एक 'एंटी-हीरो' के रूप में दिखाया गया — एक ऐसा प्रयोग जिसने शाहरुख खान को एक नई पहचान दी। आज भी यह फिल्म बॉलीवुड के क्लासिक्स में गिनी जाती है, और दीपक तिजोरी का इससे जुड़ा किस्सा इंडस्ट्री के उन अनकहे पहलुओं की याद दिलाता है जो परदे के पीछे रहते हैं।