कोटक महिंद्रा प्राइम में नया नेतृत्व, सूरज राजप्पन बने सीईओ; शाहरुख टोडीवाला की जगह लेंगे
सारांश
Key Takeaways
- सूरज राजप्पन को सीईओ के रूप में नियुक्त किया गया है।
- उनका कार्यकाल 2026 में शुरू होगा।
- शाहरुख टोडीवाला 31 मई 2026 को रिटायर होंगे।
- कंपनी ने 24 वर्ष का अनुभव रखने वाले राजप्पन का चयन किया है।
- केएमपीएल ने नवाचार और ग्राहक अनुभव पर ध्यान देने का संकल्प लिया है।
नई दिल्ली, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। वाहन वित्त कंपनी कोटक महिंद्रा प्राइम लिमिटेड (केएमपीएल) ने सोमवार को यह जानकारी दी कि उसके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने सूरज राजप्पन को मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ के रूप में नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल 1 जून 2026 से तीन वर्षों के लिए होगा, लेकिन इसके लिए शेयरधारकों की स्वीकृति आवश्यक होगी।
कंपनी ने बताया कि वर्तमान एमडी और सीईओ शाहरुख टोडीवाला 31 मई 2026 को सेवानिवृत्त होंगे। उन्होंने कोटक ग्रुप के साथ तीन दशकों से अधिक समय तक काम किया है।
कंपनी के अनुसार, सूरज राजप्पन ने अपने करियर की शुरुआत केएमपीएल से ही की थी और उनके पास कंपनी में 24 वर्ष का अनुभव है। केएमपीएल, कोटक महिंद्रा बैंक की एक सहायक कंपनी है।
कोटक महिंद्रा बैंक के एमडी और सीईओ अशोक वासवानी ने कहा कि सूरज राजप्पन का अनुभव और कार्यकुशलता कंपनी को आगे बढ़ाने में मदद करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि शाहरुख टोडीवाला ने कंपनी को मजबूत और संतुलित विकास की दिशा में अग्रसर किया है।
सूरज राजप्पन ने कहा कि केएमपीएल आगे भी संतुलित विकास, नवाचार और बेहतर ग्राहक अनुभव पर ध्यान केंद्रित करेगा। इसके साथ ही, कंपनी अपने ओईएम और डीलर पार्टनर्स के साथ संबंधों को और मजबूती प्रदान करेगी।
कंपनी ने कहा कि लगभग तीन दशकों में केएमपीएल ने भारत के ऑटोमोबाइल और उपभोक्ता क्रेडिट बाजार के साथ-साथ खुद को भी विकसित किया है। कंपनी ने जोखिम प्रबंधन, बेहतर गवर्नेंस और मजबूत सिस्टम पर विशेष ध्यान दिया है।
केएमपीएल की स्थापना 1996 में कोटक महिंद्रा फाइनेंस और फोर्ड क्रेडिट इंटरनेशनल के बीच 60:40 के जॉइंट वेंचर के रूप में हुई थी।
बाद में 2005 में कोटक महिंद्रा बैंक ने फोर्ड क्रेडिट की हिस्सेदारी खरीद ली और कंपनी को पूरी तरह अपनी सहायक कंपनी बना लिया। इसके बाद इसे कोटक महिंद्रा प्राइम लिमिटेड के रूप में पुनः नामित किया गया।
इसके अलावा, 2025 में डीपीआईआईटी ने कोटक महिंद्रा बैंक के साथ एक समझौता (एमओयू) किया था, जिसका उद्देश्य देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम को सुदृढ़ करना है।
इस साझेदारी के तहत स्टार्टअप्स को बैंकिंग सेवाएं, लोन, फंडिंग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है।