फ्लिपकार्ट में सीएफओ श्रीराम वेंकटरमन का इस्तीफा, आईपीओ से पहले बड़ा बदलाव
सारांश
Key Takeaways
- श्रीराम वेंकटरमन ने इस्तीफा दिया, लेकिन कुछ समय तक बने रहेंगे।
- रवि अय्यर को अंतरिम सीएफओ नियुक्त किया गया।
- फ्लिपकार्ट आईपीओ की तैयारी कर रहा है।
- कंपनी का घाटा बढ़कर 5,189 करोड़ रुपए हो गया।
- कुल राजस्व में 17.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट ने शुक्रवार को यह जानकारी दी कि उसके मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) श्रीराम वेंकटरमन एक दशक से अधिक समय तक कंपनी में कार्य करने के बाद अपने पद से इस्तीफा
हालांकि, वेंकटरमन तुरंत कंपनी छोड़ने वाले नहीं हैं और अगले कुछ महीनों तक अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे, ताकि परिवर्तन की प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हो सके।
कंपनी का कहना है कि यह निर्णय वित्तीय संचालन की स्थिरता बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण समय पर लिया गया है।
इसी दौरान, रवि अय्यर अंतरिम व्यवस्था के तहत कंपनी के वित्त विभाग की जिम्मेदारी संभालेंगे, जब तक नए सीएफओ की नियुक्ति नहीं हो जाती।
यह बदलाव उस समय हुआ है जब फ्लिपकार्ट भारत में अपना आईपीओ लाने की योजना बना रहा है। इस तरह के नेतृत्व में बदलाव को निवेशक ध्यान से देखते हैं, हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उसकी लिस्टिंग योजना पूर्व निर्धारित समय पर आगे बढ़ रही है।
इसी बीच, फ्लिपकार्ट ने अपनी लीडरशिप टीम को सशक्त करते हुए निशांत वर्मा को कॉरपोरेट डेवलपमेंट और पार्टनरशिप के लिए सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के रूप में नियुक्त किया है।
हाल के बदलावों से यह संकेत मिलता है कि कंपनी अपने अगले विकास चरण के लिए प्रबंधन संरचना में बदलाव कर रही है।
आईपीओ की तैयारियों के चलते, फ्लिपकार्ट आवश्यक परिवर्तन कर रहा है ताकि वह सार्वजनिक बाजार और भविष्य के विस्तार के लिए पूरी तरह से तैयार हो सके।
वित्तीय प्रदर्शन के संदर्भ में, मार्च 2025 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष (वित्त वर्ष 2025) में फ्लिपकार्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का कंसोलिडेटेड घाटा बढ़कर 5,189 करोड़ रुपए हो गया।
बिजनेस इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म टोफ्लर द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष (वित्त वर्ष 2024) में कंपनी का शुद्ध घाटा 4,248.3 करोड़ रुपए था।
हालांकि इस अवधि में कंपनी का कुल राजस्व 17.3 प्रतिशत बढ़कर 82,787.3 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले साल 70,541.9 करोड़ रुपए था।
इस दौरान कंपनी के खर्च भी लगभग इसी गति से बढ़े। कुल खर्च 17.4 प्रतिशत बढ़कर 88,121.4 करोड़ रुपए हो गया।
सबसे अधिक खर्च स्टॉक-इन-ट्रेड की खरीद पर हुआ, जो बढ़कर 87,737.8 करोड़ रुपए हो गया, जबकि एक साल पहले यह 74,271.2 करोड़ रुपए था।
इसके अतिरिक्त, कंपनी के फाइनेंस लागत में भी लगभग 57 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी हुई, जो 454 करोड़ रुपए तक पहुंच गई।