बड़ा फैसला: स्वाति मालीवाल ने AAP छोड़ी, केजरीवाल पर भ्रष्टाचार और मारपीट के गंभीर आरोप
सारांश
Key Takeaways
- स्वाति मालीवाल ने 24 अप्रैल 2025 को सोशल मीडिया पर AAP छोड़ने की घोषणा की।
- राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी छोड़ने का ऐलान किया।
- कुल 7 सांसद एक ही दिन में AAP से अलग हो रहे हैं — यह पार्टी इतिहास की सबसे बड़ी सामूहिक विदाई है।
- मालीवाल ने केजरीवाल के आवास पर मारपीट, भ्रष्टाचार और धमकियों के गंभीर आरोप लगाए।
- मालीवाल ने पंजाब में धोखाधड़ी और लूट का भी आरोप लगाया जहां AAP सत्ता में है।
- मालीवाल ईटानगर से दिल्ली लौटने के बाद विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी।
नई दिल्ली, 24 अप्रैल: आम आदमी पार्टी (AAP) को शुक्रवार को उस वक्त बड़ा सियासी झटका लगा जब राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने पार्टी छोड़ने की औपचारिक घोषणा कर दी। मालीवाल ने अरविंद केजरीवाल पर सीधे भ्रष्टाचार, महिला उत्पीड़न और अपने आवास पर मारपीट करवाने के गंभीर आरोप लगाए। इसी दिन राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भी संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में AAP से अलग होने का ऐलान किया।
एक ही दिन में AAP को सात सांसदों का झटका
राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने शुक्रवार को एक संयुक्त प्रेस वार्ता में आम आदमी पार्टी से इस्तीफे की घोषणा की। तीनों ने यह भी बताया कि चार अन्य सांसद भी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होंगे, जिनमें स्वाति मालीवाल का नाम प्रमुख है। यह AAP के इतिहास में एक ही दिन में हुई सबसे बड़ी सामूहिक विदाई मानी जा रही है।
गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में AAP को दिल्ली में करारी हार झेलनी पड़ी थी और इसके बाद से पार्टी में असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। इस पृष्ठभूमि में इतने बड़े पैमाने पर नेताओं का पार्टी छोड़ना AAP के लिए एक अस्तित्व संकट जैसी स्थिति बन रही है।
स्वाति मालीवाल के गंभीर आरोप — मारपीट से लेकर धमकी तक
स्वाति मालीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट में लिखा कि उन्होंने 2006 में अपनी नौकरी छोड़कर देशसेवा का मार्ग चुना था। उन्होंने आरटीआई आंदोलन, अन्ना आंदोलन और दिल्ली महिला आयोग में 8 वर्षों तक समर्पण से काम करने का उल्लेख किया।
मालीवाल ने आरोप लगाया कि केजरीवाल के आवास पर उनके इशारे पर उनके साथ बुरी तरह मारपीट और अभद्रता की गई। उन्होंने कहा कि इस मामले में दोषी व्यक्ति को बचाने के लिए हर संभव कोशिश की गई और उसे बड़े पदों से नवाजा गया। साथ ही उन्हें बर्बाद करने की धमकियां भी दी गईं।
यह मामला उस घटना से जुड़ा है जो मई 2024 में सामने आई थी, जब मालीवाल ने केजरीवाल के तत्कालीन PA बिभव कुमार पर मारपीट का आरोप लगाया था। उस समय AAP नेतृत्व ने मालीवाल को ही घेरने की कोशिश की थी, जिसे लेकर उन्होंने तब भी तीखी प्रतिक्रिया दी थी।
सिद्धांतों से भटकाव का आरोप — पंजाब पर भी निशाना
मालीवाल ने लिखा कि जिन ईमानदार राजनीति के सिद्धांतों और मूल्यों के साथ यह सफर शुरू हुआ था, केजरीवाल और उनके इशारे पर पूरी AAP उन आदर्शों से भटक चुकी है। उन्होंने पार्टी में बेहिसाब भ्रष्टाचार, महिला उत्पीड़न, गुंडा तत्वों को बढ़ावा देने और पंजाब के साथ धोखाधड़ी व लूट के गंभीर आरोप भी लगाए।
विशेष रूप से पंजाब का उल्लेख महत्वपूर्ण है, क्योंकि AAP वहां सत्ता में है और मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार पर पहले से ही कई मोर्चों पर सवाल उठते रहे हैं। मालीवाल का यह बयान पंजाब में भी AAP के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
राजनीतिक विश्लेषण — AAP के लिए क्या मायने रखता है यह संकट
AAP की स्थापना 2012 में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की कोख से हुई थी। पार्टी ने 'ईमानदार राजनीति' को अपना मूल नारा बनाया था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में शराब नीति घोटाले में केजरीवाल की गिरफ्तारी, कई नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप और अब सामूहिक इस्तीफों ने पार्टी की उस छवि को गहरा नुकसान पहुंचाया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टूट 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में AAP की हार के बाद और गहरी हुई है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता खुद को हाशिए पर महसूस कर रहे थे और अब इस सामूहिक विदाई ने उस असंतोष को सार्वजनिक रूप दे दिया है।
उल्लेखनीय है कि भारतीय राजनीति में किसी पार्टी से एक साथ इतने सांसदों का अलग होना दल-बदल विरोधी कानून के नजरिए से भी महत्वपूर्ण है। यदि ये सांसद BJP में शामिल होते हैं तो इस पर कानूनी पेचीदगियां भी सामने आ सकती हैं।
स्वाति मालीवाल ने बताया कि वे इस समय संसदीय समिति की बैठक के लिए ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश) में हैं और आज रात दिल्ली लौटने के बाद इस विषय पर विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी। उनकी वापसी के बाद AAP और BJP दोनों के लिए नई राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना है।