25 अक्टूबर 2026
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फेड बैठक, तिमाही नतीजे और कच्चे तेल की कीमतें: अगले हफ्ते शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे ये 4 बड़े फैक्टर

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फेड बैठक, तिमाही नतीजे और कच्चे तेल की कीमतें: अगले हफ्ते शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे ये 4 बड़े फैक्टर

सारांश

फेड का ब्याज दर फैसला, दर्जनों दिग्गज कंपनियों के तिमाही नतीजे और अमेरिका-ईरान तनाव से उबलते कच्चे तेल के बीच भारतीय बाजार अगले हफ्ते बड़े इम्तिहान में है — और बीते हफ्ते सेंसेक्स में 1,605 अंक की गिरावट ने पहले ही चेतावनी दे दी है।

मुख्य बातें

अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ब्याज दर बैठक 27-28 अक्टूबर को; फैसले का ऐलान 28 अक्टूबर को होगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर एयर स्ट्राइक संबंधी बयानों से कच्चे तेल की कीमतें ऊँचे स्तर पर बनी हैं।
26-30 अक्टूबर के बीच मारुति सुजुकी , बजाज ऑटो , एलएंडटी , अदाणी एंटरप्राइजेज समेत दर्जनों बड़ी कंपनियाँ तिमाही नतीजे जारी करेंगी।
बीते सप्ताह सेंसेक्स 1,605.44 अंक (2.15%) गिरकर 73,123.83 और निफ्टी 546.15 अंक (2.36%) गिरकर 22,600.00 पर बंद हुआ।
निफ्टी स्मॉलकैप 100 सबसे ज़्यादा 7.27 प्रतिशत टूटा; निफ्टी इंडिया डिफेंस सेक्टर में 7.05 प्रतिशत की गिरावट रही।

भारतीय शेयर बाजार के लिए 27-31 अक्टूबर 2026 का सप्ताह अत्यंत निर्णायक साबित हो सकता है, जब अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की बैठक, प्रमुख कंपनियों के तिमाही नतीजे, कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और अमेरिका-ईरान तनाव — चारों मिलकर बाजार की चाल तय करेंगे। बीते सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट के बाद निवेशक अब इन संकेतकों पर टकटकी लगाए बैठे हैं।

फेड बैठक: वैश्विक बाजारों की नजर

अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ब्याज दर समीक्षा बैठक 27-28 अक्टूबर को निर्धारित है और इसके फैसले का ऐलान 28 अक्टूबर को होगा। यह बैठक ऐसे संवेदनशील समय में हो रही है जब कच्चे तेल की ऊँची कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के चलते महंगाई फिर से बढ़ने का खतरा सामने है। दुनियाभर के निवेशकों की निगाहें इस फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि ब्याज दर में किसी भी बदलाव — या संकेत — का सीधा असर उभरते बाजारों, खासकर भारत पर पड़ता है।

अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल का दबाव

भू-राजनीतिक मोर्चे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर नई एयर स्ट्राइक को लेकर बयान दे चुके हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। इसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतें ऊपरी स्तरों पर बनी हुई हैं, जो भारत जैसे तेल-आयातक देशों के लिए व्यापार घाटे और मुद्रास्फीति की दृष्टि से चिंता का विषय है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि तनाव और बढ़ा तो ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों पर विपरीत असर पड़ सकता है।

26-30 अक्टूबर: बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे

आगामी सप्ताह के कारोबारी सत्रों — 26 से 30 अक्टूबर — के दौरान कई दिग्गज कंपनियाँ अपने तिमाही नतीजे जारी करेंगी। इनमें इंडियन ओवरसीज बैंक, महाराष्ट्र बैंक, मैनकाइंड, पेटीएम, एनडीटीवी, टाटा कंज्यूमर, एसीसी, बजाज ऑटो, मारुति सुजुकी, जेएसडब्ल्यू सीमेंट, जेएसडब्ल्यू इन्फ्रा, एलएंडटी, सेल, टाटा कैपिटल, अदाणी एंटरप्राइजेज और अदाणी पोर्ट्स शामिल हैं। इन नतीजों की दिशा न केवल इन शेयरों की चाल, बल्कि समग्र बाजार की भावना को भी प्रभावित करेगी।

बीते सप्ताह की तेज गिरावट का संदर्भ

19-23 अक्टूबर के कारोबारी सत्र बाजार के लिए बेहद नुकसानदेह रहे। सेंसेक्स इस दौरान 1,605.44 अंक यानी 2.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,123.83 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 546.15 अंक अर्थात 2.36 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,600.00 पर आ गया।

लार्जकैप की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप में बिकवाली अधिक रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 3,329.10 अंक या 5.63 प्रतिशत टूटकर 55,800.65 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1,390.35 अंक या 7.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ 17,739.45 पर बंद हुआ।

सेक्टोरल प्रदर्शन: डिफेंस सबसे ज़्यादा प्रभावित

सेक्टरवार देखें तो बीते हफ्ते सबसे अधिक नुकसान निफ्टी इंडिया डिफेंस को हुआ, जो 7.05 प्रतिशत गिरकर शीर्ष पीड़ित सूचकांक रहा। इसके बाद निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 6.42 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 5.40 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 5.15 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 5.04 प्रतिशत, निफ्टी एनर्जी 4.62 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी 4.34 प्रतिशत और निफ्टी पीएसई 3.91 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुए। यह व्यापक बिकवाली दर्शाती है कि दबाव किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं था।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले सप्ताह में फेड के रुख और प्रमुख कंपनियों के नतीजों की गुणवत्ता पर बाजार की वापसी की संभावना काफी हद तक निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

भू-राजनीतिक जोखिम और घरेलू कॉर्पोरेट आय की परीक्षा का एकसाथ आना है। फेड अगर दरें स्थिर भी रखे, तो उसका भविष्य संकेत ('डॉट प्लॉट') भारतीय बाजार में FII प्रवाह की दिशा तय करेगा। मिडकैप और स्मॉलकैप में 5-7 प्रतिशत की गिरावट बताती है कि खुदरा निवेशक सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं, जो हाल के वर्षों में SIP के जरिये इन सेगमेंट में भारी मात्रा में आए थे। असली सवाल यह है कि आने वाले नतीजे क्या उच्च मूल्यांकन को उचित ठहरा पाएंगे — अन्यथा बिकवाली का दबाव और गहरा हो सकता है।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फेड बैठक का भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर होगा?
अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की 27-28 अक्टूबर की बैठक में ब्याज दर पर फैसला 28 अक्टूबर को आएगा। दरें बढ़ने या 'हॉकिश' संकेत मिलने पर विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल सकते हैं, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
26-30 अक्टूबर के बीच कौन-सी बड़ी कंपनियाँ नतीजे जारी करेंगी?
इस सप्ताह मारुति सुजुकी, बजाज ऑटो, एलएंडटी, टाटा कंज्यूमर, पेटीएम, अदाणी एंटरप्राइजेज, अदाणी पोर्ट्स, एसीसी, सेल, मैनकाइंड, जेएसडब्ल्यू सीमेंट, जेएसडब्ल्यू इन्फ्रा, टाटा कैपिटल, इंडियन ओवरसीज बैंक, महाराष्ट्र बैंक और एनडीटीवी अपने तिमाही परिणाम सार्वजनिक करेंगी।
बीते हफ्ते शेयर बाजार में इतनी गिरावट क्यों आई?
19-23 अक्टूबर के सत्रों में सेंसेक्स 1,605.44 अंक और निफ्टी 546.15 अंक टूटे। वैश्विक अनिश्चितता, कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और अमेरिका-ईरान तनाव के चलते व्यापक बिकवाली हुई, जिसमें मिडकैप और स्मॉलकैप सबसे अधिक प्रभावित रहे।
अमेरिका-ईरान तनाव का कच्चे तेल और बाजार पर क्या असर है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर नई एयर स्ट्राइक संबंधी बयानों से आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ी है, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतें ऊँचे स्तरों पर बनी हैं। भारत जैसे तेल-आयातक देश के लिए इससे व्यापार घाटे और महंगाई का जोखिम दोनों बढ़ जाते हैं।
किस सेक्टर में सबसे ज़्यादा गिरावट आई और क्यों?
बीते हफ्ते निफ्टी इंडिया डिफेंस 7.05 प्रतिशत की गिरावट के साथ शीर्ष पीड़ित सूचकांक रहा, इसके बाद कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (6.42%), मेटल (5.40%) और मीडिया (5.15%) रहे। यह व्यापक सेक्टोरल बिकवाली वैश्विक जोखिम-परिहार की मानसिकता को दर्शाती है, जहाँ निवेशक उच्च-मूल्यांकन वाले सेगमेंट से बाहर निकले।
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