फेड बैठक, तिमाही नतीजे और कच्चे तेल की कीमतें: अगले हफ्ते शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे ये 4 बड़े फैक्टर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाजार के लिए 27-31 अक्टूबर 2026 का सप्ताह अत्यंत निर्णायक साबित हो सकता है, जब अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की बैठक, प्रमुख कंपनियों के तिमाही नतीजे, कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और अमेरिका-ईरान तनाव — चारों मिलकर बाजार की चाल तय करेंगे। बीते सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट के बाद निवेशक अब इन संकेतकों पर टकटकी लगाए बैठे हैं।
फेड बैठक: वैश्विक बाजारों की नजर
अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ब्याज दर समीक्षा बैठक 27-28 अक्टूबर को निर्धारित है और इसके फैसले का ऐलान 28 अक्टूबर को होगा। यह बैठक ऐसे संवेदनशील समय में हो रही है जब कच्चे तेल की ऊँची कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के चलते महंगाई फिर से बढ़ने का खतरा सामने है। दुनियाभर के निवेशकों की निगाहें इस फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि ब्याज दर में किसी भी बदलाव — या संकेत — का सीधा असर उभरते बाजारों, खासकर भारत पर पड़ता है।
अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल का दबाव
भू-राजनीतिक मोर्चे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर नई एयर स्ट्राइक को लेकर बयान दे चुके हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। इसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतें ऊपरी स्तरों पर बनी हुई हैं, जो भारत जैसे तेल-आयातक देशों के लिए व्यापार घाटे और मुद्रास्फीति की दृष्टि से चिंता का विषय है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि तनाव और बढ़ा तो ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों पर विपरीत असर पड़ सकता है।
26-30 अक्टूबर: बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे
आगामी सप्ताह के कारोबारी सत्रों — 26 से 30 अक्टूबर — के दौरान कई दिग्गज कंपनियाँ अपने तिमाही नतीजे जारी करेंगी। इनमें इंडियन ओवरसीज बैंक, महाराष्ट्र बैंक, मैनकाइंड, पेटीएम, एनडीटीवी, टाटा कंज्यूमर, एसीसी, बजाज ऑटो, मारुति सुजुकी, जेएसडब्ल्यू सीमेंट, जेएसडब्ल्यू इन्फ्रा, एलएंडटी, सेल, टाटा कैपिटल, अदाणी एंटरप्राइजेज और अदाणी पोर्ट्स शामिल हैं। इन नतीजों की दिशा न केवल इन शेयरों की चाल, बल्कि समग्र बाजार की भावना को भी प्रभावित करेगी।
बीते सप्ताह की तेज गिरावट का संदर्भ
19-23 अक्टूबर के कारोबारी सत्र बाजार के लिए बेहद नुकसानदेह रहे। सेंसेक्स इस दौरान 1,605.44 अंक यानी 2.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,123.83 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 546.15 अंक अर्थात 2.36 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,600.00 पर आ गया।
लार्जकैप की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप में बिकवाली अधिक रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 3,329.10 अंक या 5.63 प्रतिशत टूटकर 55,800.65 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1,390.35 अंक या 7.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ 17,739.45 पर बंद हुआ।
सेक्टोरल प्रदर्शन: डिफेंस सबसे ज़्यादा प्रभावित
सेक्टरवार देखें तो बीते हफ्ते सबसे अधिक नुकसान निफ्टी इंडिया डिफेंस को हुआ, जो 7.05 प्रतिशत गिरकर शीर्ष पीड़ित सूचकांक रहा। इसके बाद निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 6.42 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 5.40 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 5.15 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 5.04 प्रतिशत, निफ्टी एनर्जी 4.62 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी 4.34 प्रतिशत और निफ्टी पीएसई 3.91 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुए। यह व्यापक बिकवाली दर्शाती है कि दबाव किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं था।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले सप्ताह में फेड के रुख और प्रमुख कंपनियों के नतीजों की गुणवत्ता पर बाजार की वापसी की संभावना काफी हद तक निर्भर करेगी।