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GECF शिखर सम्मेलन: ईरान रूस और गैस निर्यातक देशों संग सहयोग बढ़ाएगा, मॉस्को में बोले हामिद बोवार्ड

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GECF शिखर सम्मेलन: ईरान रूस और गैस निर्यातक देशों संग सहयोग बढ़ाएगा, मॉस्को में बोले हामिद बोवार्ड

सारांश

ईरान के कार्यवाहक तेल मंत्री हामिद बोवार्ड मॉस्को में GECF के आठवें शिखर सम्मेलन में पहुँचे हैं। एजेंडे में रूस संग गैस विनिमय, फील्ड डेवलपमेंट और निर्यात नीतियों में तालमेल है — यह ऐसे वक्त में जब पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच दोनों देश वैकल्पिक ऊर्जा गठजोड़ मज़बूत करने में जुटे हैं।

मुख्य बातें

ईरान के कार्यवाहक तेल मंत्री हामिद बोवार्ड GECF के आठवें शिखर सम्मेलन के लिए मॉस्को रवाना हुए।
ईरान का फोकस रूस और अन्य GECF सदस्यों के साथ गैस क्षेत्र विकास, गैस विनिमय और निर्यात नीति समन्वय पर होगा।
GECF की 28वीं मंत्रिस्तरीय बैठक सोमवार और राष्ट्राध्यक्षों की बैठक मंगलवार को निर्धारित है।
ईरान के उप तेल मंत्री अली-मोहम्मद मौसवी GECF कार्यकारी बोर्ड बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
GECF के 12 पूर्ण सदस्य देश वैश्विक प्राकृतिक गैस भंडार का 70% , उत्पादन का 38% और निर्यात का 42% नियंत्रित करते हैं।
बोवार्ड के अनुसार ईरान-रूस के बीच ऊर्जा कंपनियों से कई समझौते पहले ही हो चुके हैं और गैस विनिमय पर बातचीत जारी है।

ईरान के कार्यवाहक तेल मंत्री हामिद बोवार्ड ने घोषणा की है कि ईरान गैस क्षेत्र में रूस और गैस निर्यातक देशों के मंच (GECF) के सदस्य देशों के साथ सहयोग को नई ऊँचाई पर ले जाने की तैयारी में है। मॉस्को में आयोजित होने वाले GECF के आठवें शिखर सम्मेलन में भाग लेने रवाना होते हुए बोवार्ड ने कहा कि इस सहयोग का मुख्य केंद्र गैस क्षेत्रों का विकास, गैस विनिमय और निर्यात नीतियों में बेहतर समन्वय होगा।

मुख्य घटनाक्रम

बोवार्ड रविवार, 26 अक्टूबर को मॉस्को रवाना हुए। वे पहले GECF की 28वीं मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लेंगे, जो सोमवार को निर्धारित है। इसके एक दिन बाद मंगलवार को राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों का शिखर सम्मेलन आयोजित होगा।

रविवार को GECF की कार्यकारी बोर्ड बैठक भी प्रस्तावित थी, जिसकी अध्यक्षता अंतरराष्ट्रीय मामलों और व्यापार के लिए ईरान के उप तेल मंत्री अली-मोहम्मद मौसवी करने वाले थे। इसी दिन वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष बैठक भी रखी गई थी, जिसका उद्देश्य शिखर सम्मेलन के महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों — सहित अंतिम घोषणापत्र — को अंतिम रूप देना है।

ईरान की प्राथमिकताएँ

बोवार्ड के अनुसार, ईरान इस सम्मेलन में अपनी प्राथमिकताएँ और दृष्टिकोण प्रस्तुत करेगा। साथ ही विभिन्न देशों के ऊर्जा मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कर सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करेगा।

उन्होंने बताया कि शिखर सम्मेलन में युद्ध के दौरान ऊर्जा ढाँचे की सुरक्षा, गैस विनिमय को बढ़ावा देने, एक साझा गैस बाज़ार की संभावनाओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात नीतियों में तालमेल जैसे संवेदनशील मुद्दे भी उठाए जाने चाहिए। गौरतलब है कि यूक्रेन संघर्ष के बाद वैश्विक ऊर्जा ढाँचे पर साइबर और भौतिक हमलों की आशंका बढ़ी है, जिससे यह मुद्दा विशेष प्रासंगिकता रखता है।

ईरान-रूस ऊर्जा संबंध

बोवार्ड ने स्पष्ट किया कि ईरान के रूसी ऊर्जा कंपनियों के साथ मज़बूत संबंध हैं। गैस और ऊर्जा क्षेत्रों के विकास के लिए दोनों पक्षों के बीच कई समझौते पहले ही किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, दोनों देशों के बीच गैस विनिमय को लेकर भी बातचीत जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच ईरान और रूस दोनों ही वैकल्पिक ऊर्जा साझेदारियाँ तलाश रहे हैं।

GECF का वैश्विक महत्व

GECF एक अंतर-सरकारी मंच है जो दुनिया के प्रमुख गैस उत्पादक और निर्यातक देशों को एक मंच पर लाता है। इसके 12 पूर्ण सदस्य देशों के पास वैश्विक प्रमाणित प्राकृतिक गैस भंडार का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा है।

ये देश वैश्विक व्यावसायिक गैस उत्पादन का करीब 38 प्रतिशत और दुनिया के कुल गैस निर्यात का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। मंच की बैठकों में गैस बाज़ार की स्थिति, ऊर्जा सुरक्षा, मांग-आपूर्ति, LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) के रुझान और निवेश की आवश्यकताओं जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होता है।

आगे क्या होगा

शिखर सम्मेलन की अंतिम घोषणा और मंत्रिस्तरीय बैठक के नतीजे वैश्विक गैस बाज़ार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। विश्लेषकों की नज़र इस बात पर होगी कि क्या ईरान और रूस किसी ठोस गैस विनिमय समझौते की रूपरेखा सामने रखते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अब तक सदस्य देशों के अलग-अलग हित इसे एकजुट कार्टेल बनने से रोकते रहे हैं। भारत के लिए यह सम्मेलन महत्वपूर्ण है क्योंकि वह खुद LNG आयात बढ़ाने की योजना में है — और यदि ईरान-रूस मिलकर निर्यात मूल्य नीति पर सहमत होते हैं, तो इसका असर भारत की ऊर्जा खरीद लागत पर भी पड़ सकता है।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

GECF का आठवाँ शिखर सम्मेलन कहाँ और कब हो रहा है?
GECF का आठवाँ शिखर सम्मेलन रूस की राजधानी मॉस्को में अक्टूबर 2026 के अंत में आयोजित हो रहा है। इसमें राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों की बैठक मंत्रिस्तरीय बैठक के एक दिन बाद होगी।
GECF क्या है और इसके सदस्य देशों के पास कितना गैस भंडार है?
GECF यानी गैस निर्यातक देशों का मंच एक अंतर-सरकारी संगठन है जो प्रमुख गैस उत्पादक देशों को एकजुट करता है। इसके 12 पूर्ण सदस्य देशों के पास वैश्विक प्रमाणित प्राकृतिक गैस भंडार का लगभग 70 प्रतिशत, वैश्विक उत्पादन का 38 प्रतिशत और निर्यात का 42 प्रतिशत हिस्सा है।
ईरान इस सम्मेलन में किन मुद्दों पर ज़ोर देगा?
ईरान गैस क्षेत्रों के विकास, गैस विनिमय और निर्यात नीतियों में समन्वय पर विशेष बल देगा। इसके अलावा युद्ध के दौरान ऊर्जा ढाँचे की सुरक्षा और एक साझा गैस बाज़ार की संभावनाओं पर भी चर्चा का प्रस्ताव ईरान की ओर से रखा जाएगा।
ईरान और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग की वर्तमान स्थिति क्या है?
कार्यवाहक तेल मंत्री हामिद बोवार्ड के अनुसार ईरान के रूसी ऊर्जा कंपनियों के साथ पहले से कई समझौते हो चुके हैं। दोनों देशों के बीच गैस विनिमय को लेकर भी बातचीत सक्रिय रूप से जारी है।
मॉस्को सम्मेलन में ईरान का नेतृत्व कौन करेगा?
कार्यवाहक तेल मंत्री हामिद बोवार्ड ईरानी राष्ट्रपति के साथ शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। इसके अलावा, GECF कार्यकारी बोर्ड की बैठक में उप तेल मंत्री अली-मोहम्मद मौसवी ईरान का प्रतिनिधित्व करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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