रूस-भारत ऊर्जा आयात हर महीने नया रिकॉर्ड, क्रेमलिन प्रवक्ता पेस्कोव का बड़ा खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने 8 सितंबर 2026 को भारतीय पत्रकारों के साथ वर्चुअल संवाद में स्पष्ट किया कि भारत को रूसी ऊर्जा निर्यात में कोई कमी नहीं आई है, बल्कि द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। यह बातचीत नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हुई, जिसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भागीदारी की पुष्टि भी की गई।
ऊर्जा व्यापार में रिकॉर्ड वृद्धि
पेस्कोव ने कहा कि वह सुरक्षा कारणों से सटीक आँकड़े सार्वजनिक नहीं करना चाहते, लेकिन रुझान स्पष्ट है। उनके शब्दों में, 'मैं समझने योग्य कारणों से कोई संख्या नहीं बताना चाहता, लेकिन लगभग हर महीने हम एक नया रिकॉर्ड देख रहे हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देश रूसी ऊर्जा पर अंकुश लगाने के प्रयास कर रहे हैं, और भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतें पूरी करने के लिए रूसी कच्चे तेल की खरीद बड़े पैमाने पर जारी रखे हुए है।
गौरतलब है कि 2022 में यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत रूस के सबसे बड़े तेल खरीदारों में शुमार हो गया है। तब से यह व्यापार संबंध तेज़ी से विस्तारित हुआ है, जो दोनों देशों के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बन गया है।
रुपया भुगतान असंतुलन पर सकारात्मक संकेत
द्विपक्षीय व्यापार में लंबे समय से चर्चा का विषय रहे रुपया भुगतान संतुलन के मुद्दे पर पेस्कोव ने सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने बताया कि जमा हुई रुपये की राशि से जुड़ी समस्याओं का समाधान धीरे-धीरे किया जा रहा है और दोनों पक्ष इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह मुद्दा तब से उलझा हुआ था जब रूस को डॉलर और यूरो-आधारित भुगतान प्रणालियों पर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा था।
दुर्लभ मृदा खनिज और सुखोई एसयू-57 चर्चा में
पेस्कोव ने बताया कि दोनों देश दुर्लभ मृदा खनिजों (रेयर अर्थ्स) की खोज और विकास के क्षेत्र में सहयोग को लेकर बातचीत कर रहे हैं। यह क्षेत्र वैश्विक प्रौद्योगिकी आपूर्ति शृंखला में अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है। इसके अतिरिक्त, रूस के अत्याधुनिक सुखोई एसयू-57 स्टेल्थ लड़ाकू विमान की संभावित बिक्री का विषय भी दोनों देशों के बीच चर्चा के एजेंडे में शामिल है, हालाँकि इस पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार — 'डी-डॉलराइजेशन' नहीं, व्यावहारिकता
ब्रिक्स देशों द्वारा राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने के प्रयासों पर पेस्कोव ने स्पष्ट किया कि यह किसी 'डी-डॉलराइजेशन' अभियान का हिस्सा नहीं है। उनके अनुसार, 'हम किसी डी-डॉलराइजेशन नीति का दावा नहीं कर रहे हैं। हम केवल वही कर रहे हैं जो हमारे राष्ट्रीय हितों के अधिक अनुकूल है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि रूस अभी भी सभी स्वीकार्य भुगतान प्रणालियों और मुद्राओं के उपयोग के लिए खुला है।
पेस्कोव के अनुसार, कुछ देश अपनी मुद्राओं का उपयोग राजनीतिक दबाव के साधन के रूप में करते हैं — 'यदि वे हमें अपनी मुद्रा का उपयोग नहीं करने देते, तो हम अपनी मुद्रा का उपयोग करते हैं।'
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और पुतिन-मोदी द्विपक्षीय वार्ता
क्रेमलिन ने पुष्टि की कि राष्ट्रपति पुतिन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। सम्मेलन में सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, वित्त और सांस्कृतिक सहयोग के मुद्दों पर चर्चा होगी। पेस्कोव ने बताया कि राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ शुक्रवार को द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे, जिसमें व्यापार और आर्थिक सहयोग प्रमुख एजेंडे पर रहेंगे।
वर्ष 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 'बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' विषय पर केंद्रित है। विस्तारित ब्रिक्स समूह में अब ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई साझेदार देश शामिल हैं। भारत के लिए यह विस्तार निर्यात, निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग के नए द्वार खोलता है।