25 जून 2026
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हरदीप सिंह पुरी और ईरान के तेल मंत्री की मुलाकात, तेहरान-नई दिल्ली ऊर्जा साझेदारी पर जोर

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हरदीप सिंह पुरी और ईरान के तेल मंत्री की मुलाकात, तेहरान-नई दिल्ली ऊर्जा साझेदारी पर जोर

सारांश

गुरुग्राम में 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक के दौरान हरदीप सिंह पुरी और ईरान के मोहसेन पाकनेजाद की मुलाकात ने एक अहम संकेत दिया — भारत और ईरान के बीच ऊर्जा संवाद फिर से गर्म हो रहा है, जो 2019 के अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद ठंडा पड़ गया था।

मुख्य बातें

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और ईरान के तेल मंत्री मोहसेन पाकनेजाद ने 25 जून 2026 को गुरुग्राम में मुलाकात की।
बैठक 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक ( 25-26 जून ) के दौरान हुई, जिसमें 11 देश शामिल हैं।
दोनों पक्षों ने तेल, गैस और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने तथा तेहरान-नई दिल्ली ऊर्जा संबंध मज़बूत करने पर जोर दिया।
भारत ने 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद ईरान से तेल आयात रोक दिया था; यह बैठक संवाद बहाली का संकेत है।
मंत्री पुरी ने कहा कि भारत 'बातचीत, पार्टनरशिप और आपसी फायदे वाले जुड़ाव' के ज़रिए ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 25 जून 2026 को गुरुग्राम (हरियाणा) में आयोजित 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक के दौरान ईरान के पेट्रोलियम मंत्री मोहसेन पाकनेजाद से द्विपक्षीय मुलाकात की। दोनों नेताओं ने तेल, गैस और ऊर्जा क्षेत्र में आपसी सहयोग को नई ऊँचाई देने तथा तेहरान और नई दिल्ली के बीच ऊर्जा संबंधों को और मज़बूत करने के उपायों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

बैठक में क्या हुआ

25-26 जून तक चलने वाली इस ब्रिक्स बैठक के अवसर पर दोनों पक्षों ने ऊर्जा सुरक्षा, संयुक्त परियोजनाओं और व्यापार विस्तार पर चर्चा की। ईरान में भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए बताया कि 'बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने तेल, गैस और ऊर्जा के क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया। साथ ही, तेहरान और नई दिल्ली के बीच ऊर्जा संबंधों को और मज़बूत करने के तरीकों पर भी चर्चा की गई।'

मंत्री पुरी ने भी एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा, 'हमने एनर्जी सेक्टर में सहयोग करने के मौकों को देखा। भारत बातचीत, पार्टनरशिप और आपसी फायदे वाले जुड़ाव के ज़रिए एनर्जी सिक्योरिटी बढ़ाने के लिए कमिटेड है।'

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: क्यों अहम है यह संवाद

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत और ईरान के ऊर्जा संबंध वर्षों से एक नाज़ुक मोड़ पर खड़े हैं। रिपोर्टों के अनुसार, भारत कभी ईरानी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल था, लेकिन 2019 में अमेरिका द्वारा ईरान के तेल निर्यात पर दोबारा कड़े प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत ने ईरान से तेल आयात पूरी तरह रोक दिया था। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब दोनों देश ऊर्जा संबंध बहाल करने की दिशा में संवाद कर रहे हैं, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों की छाया इस रिश्ते पर लगातार बनी रहती है।

ब्रिक्स का ऊर्जा संदर्भ

ब्रिक्स में अब 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएँ शामिल हैं — भारत, ब्राज़ील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात। इस विस्तारित समूह के भीतर ऊर्जा सहयोग का एजेंडा तेज़ी से केंद्रीय भूमिका में आ रहा है, क्योंकि सदस्य देश वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में अपनी साझी स्थिति मज़बूत करना चाहते हैं।

आगे की राह

दोनों मंत्रियों के बीच हुई यह चर्चा भारत-ईरान ऊर्जा सहयोग को नई दिशा देने का संकेत देती है, हालाँकि अमेरिकी प्रतिबंधों के मद्देनज़र किसी ठोस समझौते की घोषणा अभी नहीं की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति में विविधीकरण महत्वपूर्ण है और ईरान जैसे बड़े तेल उत्पादक देश से संवाद इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह चर्चा अमेरिकी प्रतिबंधों की दीवार को पार कर किसी ठोस व्यापारिक समझौते में बदल सकती है। गौरतलब है कि 2019 से पहले भारत ईरानी तेल का एक बड़ा खरीदार था, और उस आयात की अनुपस्थिति ने भारत की ऊर्जा लागत पर असर डाला है। ब्रिक्स के विस्तारित मंच पर यह बातचीत पश्चिमी प्रतिबंध-व्यवस्था के इर्द-गिर्द एक वैकल्पिक ऊर्जा व्यवस्था बनाने की व्यापक कोशिश का हिस्सा लगती है — जिसकी सफलता भू-राजनीतिक जोखिम और घरेलू ऊर्जा ज़रूरतों के बीच भारत के संतुलन-कौशल पर निर्भर करेगी।
RashtraPress
25 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरदीप सिंह पुरी और ईरान के तेल मंत्री की बैठक कहाँ और कब हुई?
यह बैठक 25 जून 2026 को गुरुग्राम (हरियाणा) में आयोजित 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक के दौरान हुई। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और ईरान के पेट्रोलियम मंत्री मोहसेन पाकनेजाद ने द्विपक्षीय वार्ता की।
भारत-ईरान ऊर्जा संबंध क्यों अहम हैं?
भारत कभी ईरानी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल था। 2019 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद यह आयात रुक गया, जिससे भारत की ऊर्जा विविधीकरण रणनीति प्रभावित हुई। ईरान से संवाद बहाल होना भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज़ से रणनीतिक महत्व रखता है।
11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में कौन-से देश शामिल हैं?
इस बैठक में ब्रिक्स के 11 सदस्य देश — भारत, ब्राज़ील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात — शामिल हैं। यह बैठक 25-26 जून 2026 को गुरुग्राम में आयोजित की जा रही है।
क्या भारत फिर से ईरान से तेल आयात शुरू करेगा?
अभी तक किसी ठोस समझौते की घोषणा नहीं की गई है। दोनों पक्षों ने सहयोग के अवसर तलाशने पर ज़ोर दिया है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंध एक बड़ी बाधा बने हुए हैं। भारत सरकार ने संकेत दिया है कि वह 'बातचीत और आपसी फायदे वाले जुड़ाव' के ज़रिए आगे बढ़ेगी।
मंत्री पुरी ने इस बैठक पर क्या कहा?
हरदीप सिंह पुरी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने ईरान के पेट्रोलियम मंत्री से ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने यह भी कहा कि भारत बातचीत, पार्टनरशिप और आपसी फायदे वाले जुड़ाव के ज़रिए ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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