मत्स्य सागरमाला: श्रीकाकुलम में 1,594 सौर लाइट्स से मछुआरों को मिली रोशनी, राम मोहन नायडू ने किया उद्घाटन
सारांश
Key Takeaways
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने शनिवार, 2 मई को कहा कि आधी रात के अंधेरे में तट की ओर लौटने वाले मछुआरों को रोशनी प्रदान करने के लिए शुरू किया गया 'मत्स्य सागरमाला' कार्यक्रम सकारात्मक परिणाम दे रहा है। मंत्री ने सोमपेटा मंडल के एर्रामुक्कोम गांव में इस कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया।
उद्घाटन और सौर लाइट्स की स्थापना
नायडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जानकारी साझा करते हुए कहा, "श्रीकाकुलम संसदीय क्षेत्र में, तटीय सड़क के साथ-साथ, कोल इंडिया के सीएसआर फंड से 1,594 सौर लाइट्स लगाई गई हैं। आज हमने इनका औपचारिक उद्घाटन किया।" यह पहल मछुआरों की रात्रिकालीन सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।
मछुआरों और पर्यटन को लाभ
मत्स्य सागरमाला की सौर बत्तियाँ तीन प्रमुख उद्देश्य पूरे कर रही हैं — मछुआरों को सुरक्षा प्रदान करना, तटीय पर्यटन को बढ़ावा देना और मछली पकड़ने के दौरान नावों को मार्गदर्शन देना। नायडू ने मछुआरों को आश्वस्त किया कि "गठबंधन सरकार उनके उत्थान के लिए हमेशा उनके साथ खड़ी रहेगी।"
श्रीकाकुलम की तटीय संभावनाएँ
मंत्री ने श्रीकाकुलम की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना करते हुए कहा, "श्रीकाकुलम वास्तव में अछूते समुद्र तटों और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है।" उन्होंने पर्यटकों को इस "अनछुए तटीय स्वर्ग के छिपे हुए रत्नों" को खोजने के लिए आमंत्रित किया और स्थानीय उधानम नारियल पानी का विशेष उल्लेख किया।
केंद्र का व्यापक सागरमाला कार्यक्रम
गौरतलब है कि केंद्र सरकार का सागरमाला कार्यक्रम, जिसे मार्च 2015 में शुरू किया गया था, बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय की प्रमुख पहल है। 7,500 किलोमीटर लंबी तटरेखा और 14,500 किलोमीटर के संभावित नौगम्य जलमार्गों के साथ, भारत में बंदरगाह-आधारित आर्थिक विकास की अपार संभावनाएँ हैं।
सागरमाला का उद्देश्य पारंपरिक बुनियादी ढाँचे पर निर्भर परिवहन से हटकर कुशल तटीय और जलमार्ग नेटवर्क की ओर बढ़ते हुए रसद को सुव्यवस्थित करना, लागत कम करना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है। यह कार्यक्रम बंदरगाह आधुनिकीकरण, औद्योगिक विकास, रोज़गार सृजन और सतत तटीय विकास पर केंद्रित है।
मत्स्य सागरमाला जैसी स्थानीय पहलें इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा हैं, और आने वाले समय में इसी तर्ज पर अन्य तटीय क्षेत्रों में भी ऐसी परियोजनाओं के विस्तार की संभावना जताई जा रही है।