PM मोदी का ब्लूमबर्ग फोरम में 'पावर टू एम्पावर' संदेश: तकनीक, डेटा और नवाचार हैं नई सदी की असली ताकत
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 अक्टूबर 2026 को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि 21वीं सदी के इस दशक में तकनीक, डेटा, ज्ञान और नवाचार ही शक्ति के नए स्रोत बन चुके हैं। उन्होंने 'पावर टू एम्पावर' यानी सशक्तिकरण की शक्ति की अवधारणा को इस युग की सबसे बड़ी ताकत बताया। मोदी ने स्पष्ट किया कि असली प्रश्न यह नहीं कि शक्ति किसके पास है, बल्कि यह है कि उसका उपयोग किस उद्देश्य के लिए हो रहा है।
फोरम की थीम और भारत का नजरिया
प्रधानमंत्री ने बताया कि इस वर्ष के ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम का विषय 'उभरती शक्तियाँ' है, और भारत इस बदलाव को अपने नजरिए से देखता है। उन्होंने कहा कि दुनिया बड़े परिवर्तनों के दौर से गुजर रही है — जहाँ परंपरागत सैन्य और आर्थिक शक्ति की परिभाषाएँ बदल रही हैं, वहीं डिजिटल और ज्ञान-आधारित शक्ति नई धुरी बन रही है।
मोदी ने कहा, 'नियंत्रण की शक्ति से आगे सशक्त बनाने की शक्ति है, प्रतिस्पर्धा की शक्ति से आगे सहयोग की शक्ति है और केवल स्वयं सफल होने से आगे दूसरों को सफल बनाने की शक्ति है।' यह वक्तव्य फोरम में उपस्थित वैश्विक नेताओं और उद्योगपतियों के लिए नीति-निर्देशक संदेश के रूप में आया।
भारत में डिजिटल सशक्तिकरण की यात्रा
प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि आज से 12-13 वर्ष पहले मोबाइल इंटरनेट तक पहुँच स्वयं में एक विशेषाधिकार था — जिसके पास इंटरनेट था, उसी के पास जानकारी, ज्ञान और अवसर भी थे। उन्होंने कहा कि 2014 में सरकार बनने के बाद भारत ने मोबाइल डेटा को सस्ता और सर्वसुलभ बनाने को प्राथमिकता दी।
इसका ठोस परिणाम यह रहा कि आज गाँव का एक छोटा दुकानदार भी डिजिटल माध्यम से अपने ग्राहकों तक पहुँच सकता है। मोदी ने कहा कि भारत में कनेक्टिविटी ने केवल लोगों को आपस में नहीं जोड़ा, बल्कि उन्हें अवसरों से भी जोड़ा — और यही 'पावर टू एम्पावर' का सबसे बड़ा व्यावहारिक उदाहरण है।
भारत की लोकतांत्रिक ताकत और मीडिया विविधता
पीएम मोदी ने भारत को 'लोकतंत्र की जननी' बताते हुए देश की विविधता के आँकड़े गिनाए। उन्होंने कहा कि भारत में 100 से अधिक भाषाएँ, करीब 80,000 पंजीकृत समाचार पत्र और प्रकाशन, 1,000 से अधिक सैटेलाइट टीवी चैनल, 50 करोड़ से ज्यादा यूट्यूब उपयोगकर्ता और 50 करोड़ से ज्यादा इंस्टाग्राम उपयोगकर्ता हैं।
उन्होंने कहा कि विभिन्न मुद्दों पर खुली बहस और विभिन्न विचारधाराओं की चर्चा इस डिजिटल सशक्तिकरण का ही परिणाम है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर डिजिटल स्वतंत्रता और सूचना के नियंत्रण को लेकर बहस तेज है।
AI, वैश्विक गठजोड़ और भारत की पहल
प्रधानमंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) विभिन्न क्षेत्रों में काम करने के तरीके को मौलिक रूप से बदल रही है। साथ ही, बढ़ती उम्र से जुड़ी वैश्विक चुनौतियाँ और 'विश्वास का संकट' आज दुनिया के सामने प्रमुख समस्याएँ हैं।
मोदी ने बताया कि भारत ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस, बिग कैट अलायंस, बायोफ्यूल अलायंस, मिशन लाइफ और आईएमईसी (IMEC) जैसे बहुपक्षीय गठजोड़ बनाए हैं, जो वैश्विक हितों की सेवा करते हैं। उन्होंने कहा, 'एक सूर्य, एक दुनिया और एक नेटवर्क; एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य।'
सुधारों की गति और आर्थिक दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री ने भारत की सुधार प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा कि GST और दिवालियापन जैसे कई कानूनों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'हमारे लिए सुधार कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक दृढ़ विश्वास है।'
यह संदेश वैश्विक निवेशकों और नीति-निर्माताओं को भारत के दीर्घकालिक इरादे का संकेत देता है। आने वाले समय में भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और AI-नीति किस दिशा में जाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।