PM मोदी का ब्लूमबर्ग फोरम में संबोधन: भारत का डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम इन्क्लूसिव टेक्नोलॉजी की मिसाल
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 अक्टूबर 2026 को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को इन्क्लूसिव टेक्नोलॉजी की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए विदेशी मेहमानों को इसे आज़माकर देखने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि एक स्ट्रीट वेंडर से लेकर कार शोरूम तक — दोनों एक ही डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं, जो समावेशी प्रौद्योगिकी की वास्तविक शक्ति को दर्शाता है।
डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम: एक समान प्लेटफॉर्म, असमान स्केल
मोदी ने फोरम में उपस्थित विदेशी प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा, 'जो अतिथि विदेश से आए हैं, उन्हें मैं कहूंगा कि आप भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को आज़माकर देखिए।' उन्होंने रेखांकित किया कि भारत में स्ट्रीट वेंडर और कार शोरूम जैसे बिल्कुल अलग-अलग स्तर के व्यापारी एक ही डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं। यह उदाहरण भारत के UPI-आधारित भुगतान ढाँचे की व्यापक पहुँच और सरलता का प्रतीक है।
लोकतंत्र, भाषाई विविधता और डिजिटल शक्ति
प्रधानमंत्री ने भारत को 'लोकतंत्र की जननी' बताते हुए देश की अभूतपूर्व विविधता का उल्लेख किया। उनके अनुसार भारत में 100 से अधिक भाषाएँ, करीब 80,000 रजिस्टर्ड समाचार-पत्र एवं प्रकाशन और 1,000 से अधिक सैटेलाइट टीवी चैनल हैं। सोशल मीडिया के क्षेत्र में उन्होंने बताया कि भारत में 500 मिलियन से अधिक यूट्यूब उपभोक्ता हैं। उन्होंने कहा कि इस विशाल विविधता के बीच डिजिटल शक्ति ने सामूहिक चर्चा और भागीदारी को नई ऊर्जा दी है।
स्टार्टअप क्रांति: 2014 से 2.5 लाख तक का सफर
मोदी ने बताया कि 2014 से पहले भारत में कुछ सौ स्टार्टअप ही थे, जबकि अब उनकी संख्या 2.5 लाख से अधिक हो चुकी है। यह आँकड़ा इनोवेशन के लोकतांत्रिकरण को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि इनमें से करीब 50 प्रतिशत स्टार्टअप छोटे शहरों और कस्बों से हैं, और 45 प्रतिशत स्टार्टअप में कम से कम एक महिला निदेशक या भागीदार हैं — जो समावेशी उद्यमिता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति है। गौरतलब है कि यह आँकड़ा ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर स्टार्टअप फंडिंग में गिरावट देखी जा रही है।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का वैश्विक विस्तार
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के अनुभव को अन्य देशों के साथ साझा कर रहा है ताकि वे अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप डिजिटल प्रणाली विकसित कर सकें। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान बनाए गए ओपन सोर्स 'को-विन' प्लेटफॉर्म का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की क्षमताएँ केवल देश तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इनसे 'मानवता सशक्त होनी चाहिए।'
इनोवेशन का संतुलन: अधिक लोगों को अवसर
मोदी ने अंत में कहा कि इनोवेशन की असली ताकत तब सामने आती है जब किसी आइडिया को प्रोडक्ट में और किसी समस्या को समाधान में बदलने का मौका समाज में अधिक से अधिक लोगों को मिलता है। उनके अनुसार, जब यह अवसर व्यापक होता है, तो 'ताकत का संतुलन बना रहता है और इसका असर कई गुना बढ़ जाता है।' यह संदेश न केवल भारत के लिए, बल्कि वैश्विक इनोवेशन नीति के लिए भी एक स्पष्ट रेखा खींचता है।