13 अक्टूबर 2026
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ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में PM मोदी: 'डेटा, ज्ञान और इनोवेशन ही 21वीं सदी की असली शक्ति'

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ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में PM मोदी: 'डेटा, ज्ञान और इनोवेशन ही 21वीं सदी की असली शक्ति'

सारांश

पहली बार भारत में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में PM मोदी ने शक्ति की परिभाषा बदल दी — 'डेटा, ज्ञान और इनोवेशन' को 21वीं सदी की असली ताकत बताते हुए 'पावर टू एंपावर' का विचार पेश किया, जिसे उन्होंने भारतीय दर्शन की हजारों साल पुरानी परंपरा से जोड़ा।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित किया।
यह पहला अवसर है जब यह वैश्विक फोरम भारत में आयोजित हुआ।
मोदी ने कहा — आज डेटा, ज्ञान और इनोवेशन ही 21वीं सदी की वास्तविक शक्ति हैं।
उन्होंने 'पावर टू एंपावर' की अवधारणा प्रस्तुत की और इसे भारत की शासन-व्यवस्था से जोड़ा।
संस्कृत श्लोक के माध्यम से संदेश दिया कि ज्ञान, धन और शक्ति का मूल्यांकन उनके उपयोग से होना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि आज के युग में डेटा, ज्ञान और इनोवेशन ही वास्तविक शक्ति के स्रोत हैं। यह पहला अवसर है जब यह प्रतिष्ठित वैश्विक मंच भारत में आयोजित हुआ, जिसे प्रधानमंत्री ने 'सही समय पर सही जगह का चुनाव' बताया।

फोरम और विषय का महत्व

इस वर्ष ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम की थीम 'दुनिया में उभरती नई पावर' पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि हर बार यह फोरम दुनिया के बेहतरीन विचारकों को एक मंच पर लाता है, जहाँ अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और वैश्विक मामलों पर गहन चर्चा होती है। उन्होंने माइकल ब्लूमबर्ग के तीस वर्षों के अनुभव और भारत के प्रति उनके लगाव की सराहना करते हुए उन्हें मीडिया जगत का वरिष्ठ और समर्पित व्यक्तित्व बताया।

पावर की बदलती परिभाषा

मोदी ने कहा कि 21वीं सदी के इस तीसरे दशक में शक्ति की परिभाषा मौलिक रूप से बदल रही है। उनके अनुसार, असली प्रश्न यह नहीं कि शक्ति किसके पास है, बल्कि यह है कि उसका उपयोग कैसे हो रहा है। उन्होंने दो तीखे सवाल उठाए: क्या प्रौद्योगिकी केवल कुछ लोगों को आगे बढ़ाएगी, या करोड़ों के लिए नए अवसर खोलेगी? क्या ज्ञान कुछ की ताकत बनी रहेगी, या सबकी क्षमता बढ़ाएगी?

इन्हीं सवालों के जवाब में उन्होंने एक केंद्रीय विचार प्रस्तुत किया — 'पावर टू एंपावर'। उनके अनुसार, यह कोई नई अवधारणा नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा का ही विस्तार है।

भारतीय दर्शन से जोड़ा संदेश

प्रधानमंत्री ने संस्कृत के एक श्लोक का उद्धरण देते हुए अपनी बात को और गहराई दी: 'विद्या विवादाय, धनं मदाय, शक्तिः परेषां परिपीडनाय खलस्य। साधोर्विपरीतमेतत् ज्ञानाय, दानाय च रक्षणाय॥' उन्होंने इसका सार स्पष्ट करते हुए कहा कि ज्ञान, धन और शक्ति — इन तीनों का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि उनका उपयोग किस प्रयोजन के लिए किया जा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक मंचों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा संप्रभुता को लेकर तीव्र बहस छिड़ी है। गौरतलब है कि भारत इस दौर में डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के मॉडल को दुनिया के सामने एक विकल्प के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

शासन में 'पावर टू एंपावर' का व्यावहारिक रूप

मोदी ने कहा कि भारत ने इस विचार को अपनी शासन-व्यवस्था और कार्य-संस्कृति में व्यावहारिक रूप से लागू करके दिखाया है। यह केवल उपदेश नहीं, बल्कि नीति का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य प्रौद्योगिकी और ज्ञान की शक्ति को समाज के हर तबके तक पहुँचाना है।

वैश्विक संदर्भ और आगे की राह

यह फोरम ऐसे समय में भारत में आयोजित हुआ है जब देश वैश्विक आर्थिक और तकनीकी नेतृत्व में अपनी भूमिका को पुनर्परिभाषित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मंच पर भारत की मेज़बानी एक रणनीतिक संदेश है। आने वाले सत्रों में प्रौद्योगिकी, ऊर्जा संक्रमण और वैश्विक व्यापार के भविष्य पर गहन चर्चा अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आधार और CoWIN जैसे डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के ज़रिए 'एंपावरमेंट' का एक व्यावहारिक मॉडल दुनिया के सामने रखा है, जिसे वैश्विक दक्षिण में व्यापक स्वीकृति मिल रही है। लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह दर्शन घरेलू डिजिटल नीति में भी उतना ही समावेशी है — जहाँ डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क और डिजिटल असमानता अभी भी अनसुलझे सवाल हैं। एक शक्तिशाली वैश्विक भाषण का असर तभी टिकाऊ होता है जब घरेलू नीति उसकी कसौटी पर खरी उतरे।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026 में PM मोदी ने क्या कहा?
PM मोदी ने 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित फोरम में कहा कि आज डेटा, ज्ञान और इनोवेशन ही 21वीं सदी की असली शक्ति हैं। उन्होंने 'पावर टू एंपावर' की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए इसे भारत की प्राचीन दार्शनिक परंपरा से जोड़ा।
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम पहली बार भारत में क्यों आयोजित हुआ?
इस वर्ष फोरम की थीम 'दुनिया में उभरती नई पावर' है, और भारत वैश्विक आर्थिक व तकनीकी नेतृत्व में तेज़ी से उभरता केंद्र बन रहा है। PM मोदी ने इसे 'सही समय पर सही जगह का चुनाव' बताया।
मोदी की 'पावर टू एंपावर' की अवधारणा क्या है?
'पावर टू एंपावर' का अर्थ है कि शक्ति — चाहे डेटा हो, ज्ञान हो या तकनीक — का उपयोग केवल कुछ के हित में नहीं, बल्कि करोड़ों की क्षमता बढ़ाने के लिए होना चाहिए। मोदी ने इसे भारत की शासन-व्यवस्था में पहले से लागू बताया।
मोदी ने किस संस्कृत श्लोक का उद्धरण दिया और उसका क्या अर्थ है?
उन्होंने 'विद्या विवादाय, धनं मदाय...' श्लोक उद्धृत किया, जिसका सार है कि ज्ञान, धन और शक्ति का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि उनका उपयोग किस प्रयोजन के लिए किया जाता है — दुरुपयोग के लिए या सबके कल्याण के लिए।
माइकल ब्लूमबर्ग के बारे में PM मोदी ने क्या कहा?
PM मोदी ने माइकल ब्लूमबर्ग को मीडिया जगत का वरिष्ठ और समर्पित व्यक्तित्व बताया तथा उनके तीस वर्षों के सफर और भारत के प्रति उनके प्रेम की सराहना की। उन्होंने ब्लूमबर्ग और उनकी टीम को फोरम के सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
राष्ट्र प्रेस
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