एमटीएनएल बोर्ड ने पवई संपत्ति ₹891.53 करोड़ में आयकर विभाग को बेचने की दी मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
सरकारी दूरसंचार कंपनी महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) के बोर्ड ने 1 अक्टूबर 2026 को मुंबई के पवई स्थित अपनी प्रमुख संपत्ति को आयकर विभाग को ₹891.53 करोड़ में बेचने की औपचारिक स्वीकृति दे दी है। यह सौदा सरकार-से-सरकार (जी2जी) हस्तांतरण अथवा सीधी बिक्री के माध्यम से संपन्न किया जाएगा।
संपत्ति का विवरण
एमटीएनएल ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि यह संपत्ति प्लॉट-सी, टेक्नोलॉजी स्ट्रीट, पवई, मुंबई में स्थित है और इसका कुल भूमि क्षेत्रफल 20,895.60 वर्ग मीटर है। यह लेनदेन आयकर विभाग की औपचारिक स्वीकृति के अधीन है और इसे राष्ट्रपति एवं अल्टरनेटिव मैकेनिज्म (एएम) की मंजूरी के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है।
परिसंपत्ति मौद्रीकरण का व्यापक संदर्भ
यह बिक्री एमटीएनएल की गैर-मुख्य परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसे सरकार ने कंपनी की बढ़ती देनदारियों से निपटने के लिए चिन्हित किया है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जुलाई में लोकसभा को लिखित जवाब में बताया था कि वित्त वर्ष 2025-26 में एमटीएनएल की कुल देनदारियाँ लगभग ₹40,008.52 करोड़ थीं, जबकि उसकी गैर-मुख्य परिसंपत्तियों का मूल्य करीब ₹50,000 करोड़ आंका गया था।
गौरतलब है कि एमटीएनएल का वित्तीय संकट गहराता जा रहा है — कंपनी का घाटा वित्त वर्ष 2021-22 के ₹2,616 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग ₹3,101 करोड़ हो गया है। इसी अवधि में कुल आय ₹1,696 करोड़ से घटकर ₹1,469 करोड़ रह गई।
शेयर बाज़ार की प्रतिक्रिया
इस घोषणा के बाद एमटीएनएल के शेयरों में उल्लेखनीय तेजी देखी गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर दोपहर 1:15 बजे IST तक कंपनी का शेयर 9.62 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹25.18 पर कारोबार कर रहा था। इंट्राडे कारोबार में शेयर ने ₹26.94 का उच्चतम स्तर भी छुआ।
आम जनता और कर्मचारियों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब एमटीएनएल निजी दूरसंचार कंपनियों के कड़े मुकाबले और घटते ग्राहक आधार के दोहरे दबाव में है। परिसंपत्ति बिक्री से मिलने वाली रकम देनदारियों का बोझ कम कर सकती है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि दीर्घकालिक पुनरुद्धार के लिए परिचालन सुधार और स्पेक्ट्रम आवंटन जैसे मुद्दों पर भी ध्यान देना ज़रूरी है।
आगे क्या
लेनदेन को अभी आयकर विभाग की अंतिम औपचारिक स्वीकृति मिलनी बाकी है। यदि यह सौदा पूरा होता है, तो यह एमटीएनएल की परिसंपत्ति मौद्रीकरण प्रक्रिया में एक अहम मील का पत्थर होगा और सरकार की व्यापक सार्वजनिक क्षेत्र संपत्ति पुनर्गठन नीति के अनुरूप होगा।