11 अगस्त 2026
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तमिलनाडु CM विजय ने PM मोदी को लिखा पत्र, NLC इंडिया हिस्सेदारी बिक्री रोकने की माँग

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तमिलनाडु CM विजय ने PM मोदी को लिखा पत्र, NLC इंडिया हिस्सेदारी बिक्री रोकने की माँग

सारांश

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने PM मोदी को पत्र लिखकर NLC इंडिया में 3% हिस्सेदारी OFS के ज़रिए बेचने के प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इसे राज्य की ऊर्जा सुरक्षा और संघवाद की भावना से जुड़ा मुद्दा बताया।

मुख्य बातें

जोसेफ विजय ने 25 जून 2026 को PM नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर NLC इंडिया हिस्सेदारी बिक्री रोकने का आग्रह किया।
केंद्र का प्रस्ताव ऑफर फॉर सेल (OFS) के ज़रिए 3% हिस्सा बेचने का है — 2% मूल + 1% ग्रीन-शू विकल्प।
विजय ने NLC को 'रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति' बताया, जिसका मुख्यालय नेवेली, तमिलनाडु में है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यह कदम रणनीतिक PSU में सरकारी स्वामित्व के लिए गलत मिसाल बनेगा।
विजय के अनुसार, यह मुद्दा ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक राष्ट्रीय हित से जुड़ा है, सिर्फ वित्तीय नहीं।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 25 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से एनएलसी इंडिया लिमिटेड (NLC India) में अपनी हिस्सेदारी और घटाने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। विजय ने एनएलसी इंडिया को देश की एक 'रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति' करार देते हुए कहा कि इस सार्वजनिक उपक्रम का तमिलनाडु से ऐतिहासिक और आर्थिक रूप से गहरा नाता है।

क्या है प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री

केंद्र सरकार ने ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से एनएलसी इंडिया की चुकता पूंजी का 3 प्रतिशत तक हिस्सा बेचने का प्रस्ताव रखा है। इसमें 2 प्रतिशत का मूल प्रस्ताव और 1 प्रतिशत का अतिरिक्त ग्रीन-शू विकल्प शामिल है। यह कदम केंद्र की एनएलसी इंडिया में मौजूदा हिस्सेदारी को और कम कर देगा।

तमिलनाडु सरकार की आपत्तियाँ

मुख्यमंत्री विजय ने अपने विस्तृत पत्र में स्पष्ट किया कि तमिलनाडु सरकार इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करती है। उन्होंने कहा कि एनएलसी इंडिया का मुख्यालय नेवेली में स्थित है, जहाँ कंपनी की प्रमुख लिग्नाइट खदानें — माइन-1, माइन-1ए और माइन-2 — तथा ताप विद्युत परियोजनाएँ संचालित हैं।

विजय के अनुसार, कंपनी का विकास दशकों में हुआ और इसमें भूमि अधिग्रहण, प्रशासनिक सहयोग, बुनियादी ढाँचे का विकास, पुनर्वास उपायों और तमिलनाडु के लोगों के अथक सहयोग की निर्णायक भूमिका रही है। इसलिए राज्य का इस उपक्रम के भविष्य में वैध और स्थायी हित है।

ऊर्जा सुरक्षा पर असर की चेतावनी

मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि एनएलसी इंडिया केवल एक सूचीबद्ध कंपनी नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, खनिज विकास और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे में अहम भूमिका निभाने वाला सार्वजनिक उपक्रम है। उन्होंने चेतावनी दी कि केंद्र की हिस्सेदारी में किसी भी प्रकार की कमी — चाहे वह सीमित ही क्यों न हो — रणनीतिक महत्व वाले सार्वजनिक उपक्रमों में सरकारी स्वामित्व के लिए एक गलत मिसाल कायम करेगी।

विजय ने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा केवल वित्तीय नहीं है — यह तमिलनाडु, उसके नागरिकों और देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा से सीधे जुड़ा है।

राज्य-केंद्र संबंधों का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि यह पत्र ऐसे समय आया है जब केंद्र और कई विपक्ष-शासित राज्यों के बीच सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश को लेकर तनाव बढ़ रहा है। आलोचकों का कहना है कि मेजबान राज्यों की सहमति के बिना रणनीतिक पीएसयू में हिस्सेदारी घटाना सहकारी संघवाद की भावना के विरुद्ध है। विजय ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार तमिलनाडु की चिंताओं और आपत्तियों को गंभीरता से लेगी और प्रस्तावित बिक्री पर पुनर्विचार करेगी।

आगे क्या होगा

अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि केंद्र OFS प्रक्रिया आगे बढ़ाता है, तो तमिलनाडु सरकार कानूनी या संसदीय रास्ता अपना सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, नेवेली में एनएलसी की उपस्थिति और राज्य की ऊर्जा ज़रूरतों को देखते हुए यह विवाद आने वाले हफ्तों में और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दशकों से राज्य की ज़मीन, श्रम और प्रशासनिक सहयोग पर खड़े हैं, उनमें हिस्सेदारी घटाने का निर्णय केवल राजकोषीय गणित से नहीं होना चाहिए। यदि केंद्र बिना ठोस जवाब दिए OFS आगे बढ़ाता है, तो यह सहकारी संघवाद की परीक्षा भी होगी।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NLC इंडिया में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी बिक्री का प्रस्ताव क्या है?
केंद्र सरकार ने ऑफर फॉर सेल (OFS) के ज़रिए NLC इंडिया लिमिटेड की चुकता पूंजी का 3% तक हिस्सा बेचने का प्रस्ताव रखा है — इसमें 2% मूल प्रस्ताव और 1% ग्रीन-शू विकल्प शामिल है। इससे केंद्र की NLC में मौजूदा हिस्सेदारी और कम हो जाएगी।
तमिलनाडु CM विजय ने इस बिक्री का विरोध क्यों किया है?
CM विजय का कहना है कि NLC इंडिया तमिलनाडु की औद्योगिक और आर्थिक संरचना का अभिन्न हिस्सा है, जिसका विकास राज्य के भूमि, श्रम और प्रशासनिक सहयोग से हुआ है। उनके अनुसार यह मुद्दा केवल वित्तीय नहीं बल्कि राज्य की ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक हित से जुड़ा है।
NLC इंडिया का तमिलनाडु से क्या संबंध है?
NLC इंडिया का मुख्यालय नेवेली, तमिलनाडु में है, जहाँ कंपनी की प्रमुख लिग्नाइट खदानें — माइन-1, माइन-1ए और माइन-2 — तथा ताप विद्युत परियोजनाएँ स्थित हैं। कंपनी के विकास में राज्य के लोगों और सरकार का दशकों का योगदान रहा है।
क्या इस हिस्सेदारी बिक्री से ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ेगा?
CM विजय ने चेतावनी दी है कि NLC इंडिया ऊर्जा सुरक्षा, खनिज विकास और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे में अहम भूमिका निभाती है। उनके अनुसार, हिस्सेदारी घटाने से रणनीतिक PSU में सरकारी नियंत्रण कमज़ोर होगा, जो देश के दीर्घकालिक हित में नहीं होगा।
अब आगे क्या होगा — क्या केंद्र OFS रोकेगा?
अभी केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यदि OFS प्रक्रिया जारी रहती है, तो तमिलनाडु सरकार संसदीय या कानूनी रास्ता अपना सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह विवाद आने वाले हफ्तों में और गहरा हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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