तमिलनाडु CM विजय ने PM मोदी को लिखा पत्र, NLC इंडिया हिस्सेदारी बिक्री रोकने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 25 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से एनएलसी इंडिया लिमिटेड (NLC India) में अपनी हिस्सेदारी और घटाने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। विजय ने एनएलसी इंडिया को देश की एक 'रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति' करार देते हुए कहा कि इस सार्वजनिक उपक्रम का तमिलनाडु से ऐतिहासिक और आर्थिक रूप से गहरा नाता है।
क्या है प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री
केंद्र सरकार ने ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से एनएलसी इंडिया की चुकता पूंजी का 3 प्रतिशत तक हिस्सा बेचने का प्रस्ताव रखा है। इसमें 2 प्रतिशत का मूल प्रस्ताव और 1 प्रतिशत का अतिरिक्त ग्रीन-शू विकल्प शामिल है। यह कदम केंद्र की एनएलसी इंडिया में मौजूदा हिस्सेदारी को और कम कर देगा।
तमिलनाडु सरकार की आपत्तियाँ
मुख्यमंत्री विजय ने अपने विस्तृत पत्र में स्पष्ट किया कि तमिलनाडु सरकार इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करती है। उन्होंने कहा कि एनएलसी इंडिया का मुख्यालय नेवेली में स्थित है, जहाँ कंपनी की प्रमुख लिग्नाइट खदानें — माइन-1, माइन-1ए और माइन-2 — तथा ताप विद्युत परियोजनाएँ संचालित हैं।
विजय के अनुसार, कंपनी का विकास दशकों में हुआ और इसमें भूमि अधिग्रहण, प्रशासनिक सहयोग, बुनियादी ढाँचे का विकास, पुनर्वास उपायों और तमिलनाडु के लोगों के अथक सहयोग की निर्णायक भूमिका रही है। इसलिए राज्य का इस उपक्रम के भविष्य में वैध और स्थायी हित है।
ऊर्जा सुरक्षा पर असर की चेतावनी
मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि एनएलसी इंडिया केवल एक सूचीबद्ध कंपनी नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, खनिज विकास और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे में अहम भूमिका निभाने वाला सार्वजनिक उपक्रम है। उन्होंने चेतावनी दी कि केंद्र की हिस्सेदारी में किसी भी प्रकार की कमी — चाहे वह सीमित ही क्यों न हो — रणनीतिक महत्व वाले सार्वजनिक उपक्रमों में सरकारी स्वामित्व के लिए एक गलत मिसाल कायम करेगी।
विजय ने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा केवल वित्तीय नहीं है — यह तमिलनाडु, उसके नागरिकों और देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा से सीधे जुड़ा है।
राज्य-केंद्र संबंधों का व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि यह पत्र ऐसे समय आया है जब केंद्र और कई विपक्ष-शासित राज्यों के बीच सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश को लेकर तनाव बढ़ रहा है। आलोचकों का कहना है कि मेजबान राज्यों की सहमति के बिना रणनीतिक पीएसयू में हिस्सेदारी घटाना सहकारी संघवाद की भावना के विरुद्ध है। विजय ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार तमिलनाडु की चिंताओं और आपत्तियों को गंभीरता से लेगी और प्रस्तावित बिक्री पर पुनर्विचार करेगी।
आगे क्या होगा
अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यदि केंद्र OFS प्रक्रिया आगे बढ़ाता है, तो तमिलनाडु सरकार कानूनी या संसदीय रास्ता अपना सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, नेवेली में एनएलसी की उपस्थिति और राज्य की ऊर्जा ज़रूरतों को देखते हुए यह विवाद आने वाले हफ्तों में और गहरा हो सकता है।