म्यूचुअल फंड्स में क्रांतिकारी बदलाव: एक्टिव इक्विटी स्कीम के तहत सोने और चांदी में निवेश संभव
सारांश
Key Takeaways
- सेबी का नया कदम: एक्टिव इक्विटी म्यूचुअल फंड्स को सोने और चांदी में निवेश की अनुमति।
- लाइफ साइकिल फंड्स: पूर्व-निर्धारित मैच्योरिटी अवधि के साथ नई योजनाएं।
- इक्विटी विविधता: निवेशकों के लिए अधिक विविधता और विकल्प।
- उच्च निकास शुल्क: लंबी अवधि के अनुशासन को बढ़ावा देने के लिए लागू।
- योजनाओं की संख्या में वृद्धि: एक्टिव इक्विटी और हाइब्रिड फंड्स में बढ़ोतरी।
मुंबई, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्यूचुअल फंड्स में महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है। अब एक्टिव इक्विटी म्यूचुअल फंड्स को सोने और चांदी में निवेश करने की अनुमति मिलेगी।
इस कदम के जरिए सेबी का उद्देश्य इक्विटी फंड्स की विविधता को बढ़ाना है।
विभिन्न इक्विटी फंड्स में इक्विटी में न्यूनतम निवेश करने की सीमा होती है। यदि फंड मैनेजर चाहें, तो वे बचे हुए हिस्से को नॉन-इक्विटी में निवेश कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए, लार्जकैप कैप फंड्स में 80 प्रतिशत हिस्सा लार्जकैप शेयरों में लगाना आवश्यक है। शेष राशि का उपयोग फंड मैनेजर नॉन-इक्विटी या स्मॉलकैप एवं मिडकैप में कर सकते हैं।
सेबी ने कहा, "इक्विटी श्रेणी की योजनाओं के अंतर्गत, म्यूचुअल फंड अपने बचे हुए हिस्से को इक्विटी, मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स, और अन्य लिक्विड इंस्ट्रूमेंट्स, सोने और चांदी के इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश कर सकते हैं, तथा इनविट्स में भी निवेश कर सकते हैं, जो संबंधित परिसंपत्ति वर्ग के लिए म्यूचुअल फंड विनियमों में निर्धारित सीमाओं के अधीन होगा।"
इसके अतिरिक्त, सेबी ने रिटायरमेंट और चिल्ड्रन सॉल्यूशन-ओरिएंटेड योजनाओं को बंद करते हुए नई लाइफ साइकिल फंड्स की श्रेणी शुरू की है। इन फंड्स की मैच्योरिटी अवधि पूर्व-निर्धारित होगी और यह इक्विटी, डेट, राइट्स, इनविस्ट्स, एक्सचेंज-ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स, और गोल्ड एवं सिल्वर ईटीएफ में निवेश कर सकेंगे।
लाइफ साइकिल फंड की अवधि पांच से 30 वर्ष तक हो सकती है। यह निवेश का पूर्व-निर्धारित रास्ता अपनाएंगे, जिसके अंतर्गत समय के साथ इक्विटी निवेश धीरे-धीरे कम होता जाएगा। हालांकि, निवेशक इस अवधि के दौरान यूनिट्स को रिडीम कर सकते हैं, लेकिन लंबी अवधि के अनुशासन को बढ़ावा देने के लिए उच्च निकास शुल्क (पहले वर्ष में 3 प्रतिशत तक) लागू होगा।
सेबी ने एक्टिव इक्विटी और हाइब्रिड फंड्स में योजनाओं की संख्या को 11 से बढ़ाकर 12 कर दिया है। अब फंड हाउस एक साथ वैल्यू और कॉन्ट्रा दोनों प्रकार के फंड्स पेश कर सकते हैं, बशर्ते कि दोनों योजनाओं की पोर्टफोलियो का ओवरलैप 50 प्रतिशत से अधिक न हो।
थीमैटिक और सेक्टोरल म्यूचुअल फंड्स में अब म्यूचुअल फंड हाउस को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका फंड का 50 प्रतिशत पोर्टफोलियो इसी श्रेणी के किसी अन्य फंड या अन्य इक्विटी फंड्स (केवल लार्जकैप को छोड़कर) से समान न हो।