पश्चिम एशिया संकट का नेपाल के पर्यटन पर गहरा प्रभाव, गिरावट जारी
सारांश
Key Takeaways
- पश्चिम एशिया संकट का नेपाल के पर्यटन उद्योग पर गंभीर असर।
- मार्च में विदेशी पर्यटकों की संख्या में गिरावट।
- दक्षिण एशियाई देशों से बढ़ते सैलानियों का स्वागत।
- नेपाल पर्यटन बोर्ड का सकारात्मक दृष्टिकोण।
- वैकल्पिक बाजारों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता।
काठमांडू, 1 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नेपाल के पर्यटन उद्योग पर पश्चिम एशिया में चल रहे संकट का गहरा असर देखने को मिल रहा है। नेपाल टूरिज्म बोर्ड (एनटीबी) ने बुधवार को जानकारी दी कि मार्च में यूरोप, अमेरिका, पश्चिम एशिया और अफ्रीका से बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी आते थे, लेकिन मध्य पूर्व के वर्तमान हालात के कारण इस संख्या में व्यापक गिरावट आई है।
नेपाल में पर्यटन सीजन के चरम समय के बीच वैश्विक तनाव का असर साफ नजर आ रहा है। 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष का प्रभाव अब यात्रा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है, जिसका प्रत्यक्ष असर नेपाल के पर्यटन क्षेत्र पर भी देखने को मिल रहा है।
मार्च, अप्रैल और मई आमतौर पर नेपाल के लिए पीक टूरिस्ट सीजन होते हैं, जब ट्रेकिंग और पर्वतारोहण के लिए बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं। साथ ही, भारत से भी बड़ी संख्या में पर्यटक गर्मी से राहत पाने के लिए नेपाल का रुख करते हैं। इस बार भी भारत से आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि देखने को मिली, लेकिन अन्य क्षेत्रों से आने वालों में कमी आई है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में विदेशी पर्यटकों की कुल संख्या सालाना आधार पर एक प्रतिशत घटकर 1,20,516 रह गई। सबसे बड़ी गिरावट उन क्षेत्रों से आई है जो पश्चिम एशिया के जरिए नेपाल तक पहुंचते हैं। पश्चिम एशिया से आने वाले पर्यटकों की संख्या 37.1 प्रतिशत घटकर 1,718 रह गई, जबकि अमेरिका महाद्वीप से 25.4 प्रतिशत, अफ्रीका से 22.2 प्रतिशत और यूरोप से 18.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
इस गिरावट की मुख्य वजह यह है कि कई अंतरराष्ट्रीय यात्री पश्चिम एशिया को ट्रांजिट रूट के तौर पर इस्तेमाल करते हैं, जहां मौजूदा संघर्ष के कारण उड़ानों और यात्रा योजनाओं में बाधा आई है। इससे नेपाल आने वाले लंबी दूरी के पर्यटकों की संख्या पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
हालांकि, इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में दक्षिण एशियाई देशों ने नेपाल के पर्यटन को सहारा दिया है। दक्षिण एशिया से आने वाले पर्यटकों की संख्या 20.9 प्रतिशत बढ़कर 42,668 हो गई, जिसमें भारत से सबसे ज्यादा 25,728 पर्यटक पहुंचे। इसके अतिरिक्त, श्रीलंका और बांग्लादेश से भी अच्छे आंकड़े आए हैं। यह दर्शाता है कि धार्मिक, सांस्कृतिक और कम अवधि की यात्राओं का ट्रेंड अब भी मजबूत बना हुआ है।
अन्य एशियाई देशों से भी उत्साहजनक आंकड़े सामने आए हैं। चीन, म्यांमार, थाईलैंड, जापान, मलेशिया और दक्षिण कोरिया से पर्यटकों की संख्या में अच्छी भागीदारी रही, जिससे कुल 33,436 पर्यटक ‘अन्य एशिया’ क्षेत्र से नेपाल पहुंचे।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के सीईओ दीपक राज जोशी ने कहा कि वैश्विक संघर्ष और उड़ानों में व्यवधान के बावजूद स्थिति पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों से बढ़ते पर्यटक एक सकारात्मक संकेत हैं, और बोर्ड इन बाजारों पर विशेष ध्यान दे रहा है। साथ ही, यूरोप और अमेरिका जैसे उच्च खर्च वाले बाजारों में भी अपनी उपस्थिति मजबूत करने के प्रयास जारी हैं।
हालांकि, पश्चिम एशिया की अनिश्चित स्थिति को देखते हुए नेपाल अब वैकल्पिक बाजारों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, ताकि पर्यटन क्षेत्र को संतुलित और स्थिर बनाए रखा जा सके।