एनआईएसएम और आईआईसीए के बीच एमओयू: कॉरपोरेट गवर्नेंस, ईएसजी और पूंजी बाजार प्रशिक्षण को मिलेगी नई दिशा

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एनआईएसएम और आईआईसीए के बीच एमओयू: कॉरपोरेट गवर्नेंस, ईएसजी और पूंजी बाजार प्रशिक्षण को मिलेगी नई दिशा

सारांश

सेबी समर्थित एनआईएसएम और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के आईआईसीए ने मुंबई में एमओयू साइन किया। यह साझेदारी कॉरपोरेट गवर्नेंस, ईएसजी, बीआरएसआर और एमएसएमई फाइनेंसिंग जैसे क्षेत्रों में संयुक्त प्रशिक्षण, शोध और नीतिगत सहयोग का दीर्घकालिक ढाँचा तैयार करती है।

मुख्य बातें

एनआईएसएम और आईआईसीए ने 21 मई 2026 को मुंबई में कॉरपोरेट गवर्नेंस और पूंजी बाजार प्रशिक्षण के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे समारोह में उपस्थित रहे; उन्होंने एमएसएमई की पूंजी बाजार पहुँच और सस्टेनेबिलिटी डिस्क्लोजर पर जोर दिया।
एमओयू में ईएसजी , बीआरएसआर , दिवाला प्रक्रिया , निवेशक शिक्षा , बोर्ड गवर्नेंस और सस्टेनेबल फाइनेंस जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
एमओयू पर योगिता जाधव (एनआईएसएम) और डॉ.
गरिमा दाधीच (आईआईसीए) ने हस्ताक्षर किए।
यह साझेदारी फैकल्टी एक्सचेंज , संयुक्त शोध , प्रकाशन और सम्मेलन के लिए दीर्घकालिक संस्थागत ढाँचा तैयार करती है।

सेबी (SEBI) समर्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटीज मार्केट्स (एनआईएसएम) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (आईआईसीए) ने 21 मई 2026 को मुंबई में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य कॉरपोरेट गवर्नेंस, ईएसजी (ESG) और पूंजी बाजार से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों को संयुक्त रूप से सुदृढ़ करना है। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह साझेदारी देश के वित्तीय और कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए एक ज्ञान-आधारित, समावेशी इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

एमओयू में क्या शामिल है

इस समझौते के तहत दोनों संस्थान संयुक्त रूप से क्षमता निर्माण कार्यक्रम, सर्टिफिकेशन कोर्स, एग्जीक्यूटिव एजुकेशन मॉड्यूल और प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करेंगे और संचालित करेंगे। इसमें सेबी के अधिकारियों सहित अन्य नियामक एवं वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण भी सम्मिलित होगा। एमओयू के दायरे में सिक्योरिटीज मार्केट, सस्टेनेबिलिटी, ईएसजी रिपोर्टिंग, बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग (बीआरएसआर), दिवाला प्रक्रिया, निवेशक शिक्षा, वैल्यूएशन, जिम्मेदार निवेश, सस्टेनेबल फाइनेंस, बोर्ड गवर्नेंस, बाजार पारदर्शिता, एमएसएमई फाइनेंसिंग और उभरते नियामक ढाँचे जैसे अहम विषय शामिल हैं।

सेबी चेयरमैन की उपस्थिति और जोर

एमओयू हस्ताक्षर समारोह में सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने प्रदर्शन-आधारित कॉरपोरेट गवर्नेंस ढाँचे की अहमियत पर बल देते हुए कहा कि इससे एमएसएमई को पूंजी बाजार तक बेहतर पहुँच मिलेगी, सस्टेनेबिलिटी डिस्क्लोजर को मजबूती मिलेगी और उभरते नियामक क्षेत्रों में शोध को प्रोत्साहन मिलेगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में ईएसजी रिपोर्टिंग और कॉरपोरेट जवाबदेही को लेकर नियामकीय माँग तेजी से बढ़ रही है।

आईआईसीए की भूमिका और हस्ताक्षरकर्ता

यह सहयोग आईआईसीए के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ज्ञानेश्वर कुमार सिंह की पहल पर आकार लिया है, जो कॉरपोरेट गवर्नेंस, ईएसजी और जिम्मेदार कारोबारी आचरण से जुड़े रणनीतिक कार्यक्रमों को राष्ट्रीय विकास एजेंडे के अनुरूप आगे बढ़ा रहे हैं। एमओयू पर एनआईएसएम की ओर से रजिस्ट्रार योगिता जाधव और आईआईसीए की ओर से स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट की प्रमुख डॉ. गरिमा दाधीच ने हस्ताक्षर किए।

दीर्घकालिक संस्थागत ढाँचा

यह समझौता केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है — यह ज्ञान साझा करने, रिसर्च, नीतिगत सहयोग, फैकल्टी एक्सचेंज, संयुक्त प्रकाशन और सम्मेलन एवं सेमिनार के आयोजन के लिए एक दीर्घकालिक संस्थागत ढाँचा तैयार करता है। गौरतलब है कि एनआईएसएम और आईआईसीए क्रमशः सेबी और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के अधीन काम करते हैं, जिससे यह साझेदारी दो प्रमुख नियामकीय क्षेत्रों के बीच एक सेतु का काम करेगी।

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि इस साझेदारी से भारत के पूंजी बाजार और कॉरपोरेट क्षेत्र में गवर्नेंस मानकों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से एमएसएमई के लिए पूंजी बाजार की पहुँच और बीआरएसआर अनुपालन क्षमता बढ़ाना इस सहयोग की प्राथमिकता में है। दोनों संस्थानों द्वारा संयुक्त पाठ्यक्रम और शोध कार्यक्रमों की रूपरेखा आने वाले महीनों में सार्वजनिक की जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि संयुक्त पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण मॉड्यूल कितनी जल्दी ज़मीन पर उतरते हैं। भारत में ईएसजी और बीआरएसआर अनुपालन को लेकर कॉरपोरेट क्षेत्र में कौशल की कमी एक स्वीकृत समस्या है, और दो नियामकीय संस्थाओं का एक साथ आना इस अंतर को पाटने की क्षमता रखता है। हालाँकि, ऐसे एमओयू अक्सर घोषणा के बाद धीमे क्रियान्वयन के शिकार होते हैं — विशेष रूप से जब दो अलग मंत्रालयों के अधीन संस्थाएँ शामिल हों। एमएसएमई के लिए पूंजी बाजार पहुँच का लक्ष्य तभी सार्थक होगा जब प्रशिक्षण कार्यक्रम टियर-2 और टियर-3 शहरों तक पहुँचें, न कि केवल महानगरों तक सीमित रहें।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनआईएसएम और आईआईसीए के बीच एमओयू क्या है?
यह 21 मई 2026 को मुंबई में हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन है, जिसके तहत सेबी समर्थित एनआईएसएम और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के आईआईसीए मिलकर कॉरपोरेट गवर्नेंस, ईएसजी और पूंजी बाजार प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेंगे। यह साझेदारी संयुक्त शोध, फैकल्टी एक्सचेंज और नीतिगत सहयोग का भी ढाँचा तैयार करती है।
इस साझेदारी से किन क्षेत्रों को फायदा होगा?
इस एमओयू में ईएसजी रिपोर्टिंग, बीआरएसआर, सिक्योरिटीज मार्केट, दिवाला प्रक्रिया, निवेशक शिक्षा, वैल्यूएशन, सस्टेनेबल फाइनेंस, बोर्ड गवर्नेंस, एमएसएमई फाइनेंसिंग और उभरते नियामक ढाँचे जैसे क्षेत्र शामिल हैं। विशेष रूप से एमएसएमई को पूंजी बाजार तक बेहतर पहुँच मिलने की उम्मीद है।
सेबी चेयरमैन ने इस एमओयू में क्या भूमिका निभाई?
सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे एमओयू हस्ताक्षर समारोह में उपस्थित रहे और उन्होंने प्रदर्शन-आधारित कॉरपोरेट गवर्नेंस ढाँचे की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने एमएसएमई की पूंजी बाजार पहुँच, सस्टेनेबिलिटी डिस्क्लोजर और नियामकीय शोध को प्राथमिकता देने की बात कही।
एमओयू पर किसने हस्ताक्षर किए?
एमओयू पर एनआईएसएम की रजिस्ट्रार योगिता जाधव और आईआईसीए के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट की प्रमुख डॉ. गरिमा दाधीच ने हस्ताक्षर किए। यह सहयोग आईआईसीए के महानिदेशक एवं सीईओ ज्ञानेश्वर कुमार सिंह की पहल पर तैयार किया गया है।
क्या यह साझेदारी केवल प्रशिक्षण तक सीमित है?
नहीं, यह एमओयू प्रशिक्षण के साथ-साथ संयुक्त रिसर्च स्टडी, पाठ्यक्रम विकास, फैकल्टी एक्सचेंज, प्रकाशन और सम्मेलन-सेमिनार आयोजन के लिए भी एक दीर्घकालिक संस्थागत ढाँचा तैयार करता है। इसका उद्देश्य भारत के कॉरपोरेट और वित्तीय क्षेत्र में एक समावेशी, ज्ञान-आधारित इकोसिस्टम बनाना है।
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