आजादपुर मंडी के पूर्व महासचिव: ऑनलाइन बिक्री से फल-सब्जी व्यापार पर बड़ा असर नहीं, रिटेलर्स का 20% ट्रेड शिफ्ट
सारांश
मुख्य बातें
आजादपुर मंडी के पूर्व महासचिव राजकुमार भाटिया ने 20 अक्टूबर 2026 को कहा कि ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के तेज़ विस्तार के बावजूद फल और सब्जियों के थोक कारोबार पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकांश ऑनलाइन कंपनियाँ भी अपना माल सीधे मंडियों से ही खरीदती हैं, जिससे मंडियों की केंद्रीय भूमिका बरकरार है।
मंडियों की भूमिका अब भी अटूट
भाटिया के अनुसार, ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों चैनलों के लिए आपूर्ति का प्रमुख स्रोत मंडियाँ ही बनी हुई हैं। उन्होंने कहा, 'फलों और सब्जियों के मामले में उपभोक्ताओं की खरीदारी की आदतें अब भी काफी हद तक पारंपरिक हैं। खासकर दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में बड़ी संख्या में उपभोक्ता, विशेष रूप से गृहिणियाँ, फल और सब्जियाँ खरीदने से पहले उन्हें देखकर, छूकर और उनकी गुणवत्ता जाँचकर खरीदना पसंद करती हैं।' यह व्यवहार परिवर्तन की धीमी गति की ओर संकेत करता है जो फल-सब्जी व्यापार को अन्य श्रेणियों से अलग बनाती है।
किस पर पड़ा असर, कौन बचा रहा
भाटिया ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती पैठ से सबसे अधिक प्रभावित छोटे रिटेलर हुए हैं। उनके अनुमान के अनुसार रिटेलर्स का 20 प्रतिशत व्यापार ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स की ओर स्थानांतरित हो चुका है। हालाँकि उन्होंने जोड़ा कि छात्रों, कॉर्पोरेट कर्मचारियों और युवा उपभोक्ताओं में ऑनलाइन खरीदारी का चलन बढ़ा है, लेकिन मंडी-स्तरीय माँग अप्रभावित है।
फल-सब्जी की विशेष प्रकृति — ऑनलाइन की सीमा
भाटिया ने तर्क दिया कि फल-सब्जी ऐसे उत्पाद हैं जिन्हें कपड़े या इलेक्ट्रॉनिक्स की तरह आसानी से वापस नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि खराब निकले फल या सब्जी को उसी तरह वापस करना व्यावहारिक नहीं होता, जिससे रिटर्न-पॉलिसी पर निर्भर ई-कॉमर्स मॉडल इस श्रेणी में सीमित रहता है। उनके मुताबिक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का असर किराना, दवाइयों और पैकेज्ड उत्पादों पर कहीं अधिक है, जबकि फल-सब्जी व्यापार में पिछले 15-20 वर्षों में कोई बड़ा संरचनात्मक बदलाव नहीं आया।
इस बार का त्योहारी सीजन — फसल अच्छी, दाम बेहतर
भाटिया ने बताया कि इस वर्ष अच्छी बारिश के कारण फलों और सब्जियों की फसल बेहतर रही, जिससे माँग और आपूर्ति के बीच संतुलन बना है। त्योहारी सीजन में फलों की माँग आमतौर पर बढ़ जाती है और इस बार भी बाजार में अच्छे दाम मिलने की संभावना है। उन्होंने कोविड काल का उदाहरण देते हुए कहा कि तब भी मंडियाँ सुचारू रूप से चलती रहीं क्योंकि खाद्य जरूरतें कभी नहीं रुकतीं।
विरोध-प्रदर्शन और सीटीआई का ₹3,000 करोड़ नुकसान का दावा
उद्योग संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने दावा किया है कि अक्टूबर में जारी विरोध-प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के कारोबार को अब तक करीब ₹3,000 करोड़ का नुकसान हो चुका है। संगठन के अनुसार नवरात्रि और दीपावली के दौरान खरीदारी प्रभावित होने से रिटेल क्षेत्र को लगभग ₹1,800 करोड़ और थोक कारोबार को करीब ₹600 करोड़ का झटका लगा है। रास्ते बंद होने और ट्रकों की आवाजाही प्रभावित होने से सप्लाई चेन पर भी असर पड़ा है और त्योहारी सामान का एक बड़ा हिस्सा गोदामों में ही अटका हुआ है। भाटिया ने भी इन विरोध-प्रदर्शनों और सड़क बंदी को ऑनलाइन प्रतिस्पर्धा से भी बड़ी व्यापारिक चुनौती बताया।