21 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

दशहरा 2026: दिल्ली में रावण संग 30 फुट कॉक्रोच पुतला दहन, देशभर में अनोखी परंपराएँ

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दशहरा 2026: दिल्ली में रावण संग 30 फुट कॉक्रोच पुतला दहन, देशभर में अनोखी परंपराएँ

सारांश

दिल्ली के पीतमपुरा में इस दशहरे पर रावण के साथ 30 फुट का कॉक्रोच भी जला — बुराई के नए प्रतीकों को चुनौती देने का एक अनूठा सांस्कृतिक संदेश। लखनऊ में 75 फुट का यांत्रिक रावण, श्रीनगर में पहली बार ऐतिहासिक दशहरा, और मध्य प्रदेश के एक गाँव में रावण की पूजा — भारत के दशहरे की विविधता की असली तस्वीर।

मुख्य बातें

केशव रामलीला समिति ने नेताजी सुभाष प्लेस, पीतमपुरा, दिल्ली में रावण के साथ 30 फुट ऊंचे कॉक्रोच के पुतले का दहन किया।
अयोध्या में 32 फुट के रावण पुतले का निर्माण मुस्लिम कारीगरों ने किया — सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल।
श्रीनगर में पहली बार ऐतिहासिक दशहरा आयोजन; 50 फुट के रावण पुतले का दहन निर्धारित था।
रांची के मोरहाबादी मैदान में 70 फुट रावण, 65 फुट कुंभकर्ण, 60 फुट मेघनाद के पुतले; राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार की उपस्थिति निर्धारित थी।
मध्य प्रदेश के भाटखेड़ी (रावण वाली) गाँव में रावण दहन की बजाय रावण की पूजा की अनूठी परंपरा जारी रही।

नई दिल्ली के नेताजी सुभाष प्लेस स्थित पीतमपुरा में इस वर्ष दशहरा 2026 के अवसर पर केशव रामलीला समिति ने एक अनूठी पहल करते हुए रावण के पुतले के साथ-साथ 30 फुट ऊंचे कॉक्रोच के पुतले का भी दहन किया। यह आयोजन उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण बना और दर्शकों में उत्सुकता का केंद्र रहा। देशभर में दशहरे पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों के दहन की परंपरा के बीच कॉक्रोच के पुतले का यह दहन एक अलग सांस्कृतिक संदेश लेकर आया।

दिल्ली में अनोखा आयोजन

केशव रामलीला समिति द्वारा नेताजी सुभाष प्लेस, पीतमपुरा में आयोजित इस कार्यक्रम में पारंपरिक रावण दहन के साथ-साथ 30 फुट ऊंचे कॉक्रोच के पुतले को भी अग्नि को समर्पित किया गया। आयोजकों के अनुसार, इस प्रतीकात्मक दहन के माध्यम से बुराई और गंदगी के खिलाफ जागरूकता का संदेश देने का प्रयास किया गया। उत्सव में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

देशभर में दशहरा समारोह की झलकियाँ

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राजेंद्र निवास रामलीला समिति ने 32 फुट ऊंचे रावण के पुतले का दहन रात 10 बजे आयोजित किया। समिति के संरक्षक प्रभाकर मिश्रा के अनुसार, इस वर्ष पुतला बनाने की जिम्मेदारी मुस्लिम कारीगरों को सौंपी गई थी — जो सांप्रदायिक सौहार्द का एक सशक्त उदाहरण है। वहीं लखनऊ के रामलीला मैदान में 75 फुट ऊंचे यांत्रिक उपकरणों से सुसज्जित रावण के पुतले का दहन किया गया। आयोजकों के अनुसार, पुतले के माध्यम से कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी और सनातन विरोधी तत्वों तथा बौद्धिक नक्सलवाद के खिलाफ संदेश देने का प्रयास किया गया।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में लक्ष्मण चौक स्थित हिंदू नेशनल इंटर कॉलेज में रावण दहन का आयोजन हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के शामिल होने का कार्यक्रम निर्धारित था। काशीपुर में 55 फुट ऊंचे रावण और 50 फुट ऊंचे कुंभकर्ण के पुतलों का दहन शाम 7:30 बजे किया जाना था, जिसके बाद आतिशबाजी का कार्यक्रम भी रखा गया था।

श्रीनगर में ऐतिहासिक आयोजन

जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में इस वर्ष दशहरा समारोह विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। यहाँ पहली बार ऐतिहासिक दशहरा आयोजन के अंतर्गत 50 फुट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाना था। रामलीला मैदान में कुंभकर्ण का 45 फुट और मेघनाद का 35 फुट ऊंचा पुतला भी तैयार किया गया था। श्रीनगर में यह आयोजन सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रांची में भव्य समारोह

झारखंड की राजधानी रांची में पंजाबी हिंदू बिरादरी की ओर से मोरहाबादी मैदान में पारंपरिक रावण दहन का आयोजन किया जाना था। इस कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के शामिल होने का कार्यक्रम निर्धारित था। यहाँ रावण का 70 फुट, कुंभकर्ण का 65 फुट और मेघनाद का 60 फुट ऊंचा पुतला तैयार किया गया था। रामलीला, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और आतिशबाजी भी इस आयोजन के प्रमुख आकर्षण थे।

मध्य प्रदेश का गाँव जहाँ होती है रावण की पूजा

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के भाटखेड़ी (रावण वाली) गाँव में दशहरे की परंपरा देश के बाकी हिस्सों से सर्वथा भिन्न है। यहाँ ग्रामीण रावण और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन करने के बजाय उनकी पूजा करते हैं। ग्रामीणों की मान्यता है कि रावण उनकी मनोकामनाएँ पूरी करते हैं, और पूर्ण होने पर श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर प्रसाद चढ़ाते हैं। दशहरे के दिन भगवान राम और लक्ष्मण की भूमिका निभाने वाले कलाकार प्रतिमाओं को भाले से स्पर्श करते हैं, जबकि ग्रामीण समृद्धि की कामना करते हैं। यह परंपरा इस बात की याद दिलाती है कि भारत में आस्था के रूप कितने विविध और अनूठे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहीं मध्य प्रदेश के भाटखेड़ी जैसे गाँव याद दिलाते हैं कि भारत की आस्था में रावण को खलनायक मानने की एकरूपता कभी नहीं रही। लखनऊ में पुतले के ज़रिए 'बौद्धिक नक्सलवाद' जैसे राजनीतिक विमर्श को शामिल करना बताता है कि धार्मिक उत्सव और राजनीतिक संदेश के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है — जो एक ऐसा सवाल है जिस पर मुख्यधारा की कवरेज प्रायः मौन रहती है।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में दशहरे पर कॉक्रोच का पुतला क्यों जलाया गया?
दिल्ली के पीतमपुरा स्थित नेताजी सुभाष प्लेस में केशव रामलीला समिति ने दशहरा 2026 पर रावण के साथ-साथ 30 फुट ऊंचे कॉक्रोच के पुतले का भी दहन किया। यह आयोजन बुराई और गंदगी के खिलाफ प्रतीकात्मक संदेश देने के उद्देश्य से किया गया और उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहा।
श्रीनगर में दशहरा 2026 क्यों ऐतिहासिक रहा?
जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में इस वर्ष पहली बार ऐतिहासिक दशहरा आयोजन के तहत 50 फुट ऊंचे रावण, 45 फुट ऊंचे कुंभकर्ण और 35 फुट ऊंचे मेघनाद के पुतलों का दहन निर्धारित किया गया था। यह आयोजन सांस्कृतिक और सामाजिक एकता के दृष्टिकोण से विशेष महत्व रखता है।
अयोध्या में दशहरे पर रावण का पुतला किसने बनाया?
अयोध्या में राजेंद्र निवास रामलीला समिति के संरक्षक प्रभाकर मिश्रा के अनुसार, इस वर्ष 32 फुट ऊंचे रावण के पुतले का निर्माण मुस्लिम कारीगरों को सौंपा गया था। यह सांप्रदायिक सौहार्द का एक उल्लेखनीय उदाहरण माना जा रहा है।
मध्य प्रदेश के भाटखेड़ी गाँव में दशहरा कैसे मनाया जाता है?
राजगढ़ जिले के भाटखेड़ी (रावण वाली) गाँव में दशहरे पर रावण और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन नहीं किया जाता, बल्कि उनकी पूजा की जाती है। ग्रामीणों की मान्यता है कि रावण मनोकामनाएँ पूरी करते हैं, और दशहरे के दिन राम-लक्ष्मण की भूमिका निभाने वाले कलाकार प्रतिमाओं को भाले से स्पर्श करते हैं।
रांची में दशहरा 2026 में कौन से पुतलों का दहन हुआ और कौन उपस्थित थे?
रांची के मोरहाबादी मैदान में पंजाबी हिंदू बिरादरी द्वारा 70 फुट रावण, 65 फुट कुंभकर्ण और 60 फुट मेघनाद के पुतलों का दहन निर्धारित था। इस कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के शामिल होने का कार्यक्रम तय था, साथ ही रामलीला, सांस्कृतिक कार्यक्रम और आतिशबाजी भी आकर्षण का हिस्सा थे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 घंटे पहले
  2. 8 घंटे पहले
  3. 9 घंटे पहले
  4. कल
  5. 1 साल पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले