20 अक्टूबर 2026
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रांची दशहरा 2026: मोरहाबादी मैदान में 80 फीट रावण समेत 'सोने की लंका' जलाई, डेढ़ लाख लोग गवाह

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रांची दशहरा 2026: मोरहाबादी मैदान में 80 फीट रावण समेत 'सोने की लंका' जलाई, डेढ़ लाख लोग गवाह

सारांश

रांची का मोरहाबादी मैदान 79वें दशहरा उत्सव पर एक बार फिर जगमगा उठा — 80 फीट के रावण, 'सोने की लंका' और डेढ़ लाख से अधिक दर्शकों के साथ। 1948 से चली आ रही यह परंपरा झारखंड की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रमाण है।

मुख्य बातें

रांची के मोरहाबादी मैदान में 20 अक्टूबर 2026 को 79वाँ दशहरा उत्सव आयोजित हुआ।
रावण 80 फीट , कुंभकर्ण 75 फीट , मेघनाद 70 फीट और 'सोने की लंका' 40 फीट ऊँची बनाई गई।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने रावण, रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने कुंभकर्ण और विधायक सीपी सिंह ने मेघनाद का दहन किया।
आयोजन में डेढ़ लाख से अधिक लोग उपस्थित रहे; आतिशबाजी और लेजर लाइट शो का प्रदर्शन हुआ।
यह उत्सव 1948 से पंजाबी हिंदू बिरादरी द्वारा आयोजित किया जाता है।

झारखंड की राजधानी रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में 20 अक्टूबर 2026 की शाम बुराई पर अच्छाई की विजय का भव्य उत्सव मनाया गया, जब रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतले आग की लपटों में घिर गए। इस बार आयोजन में 40 फीट ऊँची दोमंजिला 'सोने की लंका' का दहन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। पंजाबी हिंदू बिरादरी द्वारा आयोजित इस दशहरा उत्सव में डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

मुख्य घटनाक्रम

शाम करीब 6 बजकर 15 मिनट पर शुरू हुआ यह कार्यक्रम लगभग 7 बजे तक चला। मैदान में रावण का 80 फीट, कुंभकर्ण का 75 फीट और मेघनाद का 70 फीट ऊँचा पुतला खड़ा किया गया था। इनके दहन के साथ ही शानदार आतिशबाजी और लेजर लाइट शो ने आसमान को रंगीन कर दिया।

रामलीला पर आधारित 15 मिनट की विशेष झाँकी भी प्रदर्शित की गई, जिसमें भगवान राम की कथा और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया गया।

किसने किया दहन

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने रावण के पुतले में आग लगाई, जबकि रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने कुंभकर्ण और रांची के विधायक सीपी सिंह ने मेघनाद के पुतले का दहन किया। 'सोने की लंका' में राज्यसभा सांसद महुआ माजी और रांची की मेयर रोशनी खलखो ने रिमोट के ज़रिए आग लगाई।

राज्यपाल का संदेश

इस अवसर पर राज्यपाल गंगवार ने राज्यवासियों को दशहरा की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि हर दौर में अंततः बुराई पर अच्छाई की विजय होती है। उन्होंने यह भी कामना की कि देश और राज्य में सुख-शांति बनी रहे तथा झारखंड प्रगति के पथ पर आगे बढ़े।

आयोजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

मोरहाबादी मैदान में दशहरा उत्सव का आयोजन वर्ष 1948 से होता आ रहा है। इस लिहाज़ से 2026 में यह उत्सव का 79वाँ वर्ष है — एक ऐसी परंपरा जो झारखंड की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। रांची के अन्य इलाकों — अरगोड़ा, टाटीसिलवे और धुर्वा — में भी रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए गए।

आने वाले वर्षों में यह उत्सव और भव्यता के साथ मनाए जाने की उम्मीद है, क्योंकि हर साल इसमें श्रद्धालुओं की भागीदारी बढ़ती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि रांची की सामूहिक सांस्कृतिक पहचान का उत्सव है — 1948 से अटूट परंपरा जो बँटवारे के दर्द से उपजी पंजाबी बिरादरी ने झारखंड की धरती पर रोपी थी। यह उल्लेखनीय है कि एक ही मंच पर राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, सांसद और महापौर की मौजूदगी इस आयोजन को राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से महत्त्वपूर्ण बनाती है। डेढ़ लाख की भीड़ यह भी दर्शाती है कि ऐसे सामूहिक उत्सव नागरिकों को जोड़ने का काम करते हैं — जो डिजिटल युग में तेज़ी से दुर्लभ होती जा रही है।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रांची के मोरहाबादी मैदान में दशहरा उत्सव कब से आयोजित हो रहा है?
मोरहाबादी मैदान में दशहरा उत्सव वर्ष 1948 से आयोजित किया जा रहा है। 2026 में यह उत्सव का 79वाँ वर्ष था, जिसका आयोजन पंजाबी हिंदू बिरादरी करती है।
रांची दशहरा 2026 में रावण के पुतले की ऊँचाई कितनी थी?
इस वर्ष रावण का पुतला 80 फीट, कुंभकर्ण का 75 फीट और मेघनाद का 70 फीट ऊँचा बनाया गया था। इसके अलावा 40 फीट ऊँची दोमंजिला 'सोने की लंका' भी बनाई गई थी।
'सोने की लंका' का दहन किसने किया?
'सोने की लंका' में राज्यसभा सांसद महुआ माजी और रांची की मेयर रोशनी खलखो ने रिमोट के ज़रिए आग लगाई। रावण का दहन राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने किया।
रांची दशहरा 2026 में कितने लोग शामिल हुए?
मोरहाबादी मैदान में डेढ़ लाख से अधिक लोगों ने इस आयोजन में भाग लिया। शाम 6:15 बजे से शुरू हुआ यह कार्यक्रम करीब 7 बजे तक चला।
रांची में मोरहाबादी मैदान के अलावा और कहाँ रावण दहन हुआ?
रांची के अरगोड़ा, टाटीसिलवे और धुर्वा में भी रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन सभी स्थानों पर दशहरा उत्सव की धूम रही।
राष्ट्र प्रेस
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