रांची दशहरा 2026: मोरहाबादी मैदान में 80 फीट रावण समेत 'सोने की लंका' जलाई, डेढ़ लाख लोग गवाह
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड की राजधानी रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में 20 अक्टूबर 2026 की शाम बुराई पर अच्छाई की विजय का भव्य उत्सव मनाया गया, जब रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतले आग की लपटों में घिर गए। इस बार आयोजन में 40 फीट ऊँची दोमंजिला 'सोने की लंका' का दहन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। पंजाबी हिंदू बिरादरी द्वारा आयोजित इस दशहरा उत्सव में डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
मुख्य घटनाक्रम
शाम करीब 6 बजकर 15 मिनट पर शुरू हुआ यह कार्यक्रम लगभग 7 बजे तक चला। मैदान में रावण का 80 फीट, कुंभकर्ण का 75 फीट और मेघनाद का 70 फीट ऊँचा पुतला खड़ा किया गया था। इनके दहन के साथ ही शानदार आतिशबाजी और लेजर लाइट शो ने आसमान को रंगीन कर दिया।
रामलीला पर आधारित 15 मिनट की विशेष झाँकी भी प्रदर्शित की गई, जिसमें भगवान राम की कथा और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया गया।
किसने किया दहन
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने रावण के पुतले में आग लगाई, जबकि रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने कुंभकर्ण और रांची के विधायक सीपी सिंह ने मेघनाद के पुतले का दहन किया। 'सोने की लंका' में राज्यसभा सांसद महुआ माजी और रांची की मेयर रोशनी खलखो ने रिमोट के ज़रिए आग लगाई।
राज्यपाल का संदेश
इस अवसर पर राज्यपाल गंगवार ने राज्यवासियों को दशहरा की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि हर दौर में अंततः बुराई पर अच्छाई की विजय होती है। उन्होंने यह भी कामना की कि देश और राज्य में सुख-शांति बनी रहे तथा झारखंड प्रगति के पथ पर आगे बढ़े।
आयोजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मोरहाबादी मैदान में दशहरा उत्सव का आयोजन वर्ष 1948 से होता आ रहा है। इस लिहाज़ से 2026 में यह उत्सव का 79वाँ वर्ष है — एक ऐसी परंपरा जो झारखंड की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। रांची के अन्य इलाकों — अरगोड़ा, टाटीसिलवे और धुर्वा — में भी रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए गए।
आने वाले वर्षों में यह उत्सव और भव्यता के साथ मनाए जाने की उम्मीद है, क्योंकि हर साल इसमें श्रद्धालुओं की भागीदारी बढ़ती जा रही है।