नोएडा दशहरा 2026: 80 फीट के रावण का दहन आज, सांसद महेश शर्मा दबाएंगे रिमोट
सारांश
मुख्य बातें
नोएडा के सेक्टर-21ए स्थित नोएडा स्टेडियम में इस वर्ष दशहरा महोत्सव विशेष भव्यता के साथ मनाया जाएगा। श्री सनातन धर्म रामलीला समिति द्वारा आयोजित इस उत्सव में 80 फीट ऊंचे रावण के पुतले सहित कुंभकरण और मेघनाद के विशालकाय पुतलों का दहन किया जाएगा। 20 अक्टूबर 2026 को रात आठ बजे गौतम बुद्ध नगर से सांसद डॉ. महेश शर्मा रिमोट का बटन दबाकर इस परंपरा की शुरुआत करेंगे।
पुतलों की विशालता और तैयारियाँ
समिति ने इस वर्ष तीनों पुतलों को असाधारण ऊंचाई पर बनवाया है। रावण का पुतला 80 फीट, कुंभकरण का 75 फीट और मेघनाद का 65 फीट ऊंचा है। तीनों पुतलों का दहन इलेक्ट्रिक शॉट प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। पुतलों को रंग-बिरंगी सजावट और विशेष बिजली की लाइटों से सजाया गया है, जिससे शाम ढलते ही ये दूर से भी आकर्षक दिखाई देंगे।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण
आतिशबाजी के बीच होने वाला पुतला दहन इस महोत्सव का केंद्रबिंदु होगा। समिति के अनुसार, सांसद डॉ. महेश शर्मा रात आठ बजे रिमोट के ज़रिये तीनों पुतलों को एक साथ आग के हवाले करेंगे। इस दौरान स्टेडियम परिसर में फायर क्रैकर शो भी आयोजित किया जाएगा, जो दर्शकों के लिए एक अतिरिक्त आकर्षण होगा।
मेले और मनोरंजन की व्यवस्था
दशहरा महोत्सव केवल पुतला दहन तक सीमित नहीं है — नोएडा स्टेडियम परिसर में एक विस्तृत मेले का भी आयोजन किया गया है। बच्चों और परिवारों के मनोरंजन के लिए झूले, सर्कस, खाने-पीने की दुकानें और विभिन्न स्टॉल लगाए गए हैं। शाम होते ही बड़ी संख्या में परिवारों के यहाँ पहुंचने की संभावना है।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारी
बड़ी भीड़ को देखते हुए श्री सनातन धर्म रामलीला समिति ने सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया है। परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और समिति के पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों तथा सुरक्षाकर्मियों को अलग-अलग जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। समिति के अनुसार, आयोजन के लिए प्रशासन से सभी आवश्यक अनुमतियाँ प्राप्त कर ली गई हैं।
परंपरा और सांस्कृतिक महत्व
दशहरा का पर्व बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन इसी शाश्वत परंपरा का जीवंत प्रदर्शन है। नोएडा में हर वर्ष आयोजित होने वाला यह महोत्सव स्थानीय निवासियों के लिए एक प्रमुख सांस्कृतिक आयोजन बन चुका है, और इस बार पुतलों की बढ़ी हुई ऊंचाई इसे और अधिक यादगार बनाने का प्रयास है।