पाकिस्तान ने भारतीय विमानों पर हवाई क्षेत्र प्रतिबंध 24 नवंबर 2026 तक बढ़ाया, कराची-लाहौर FIR भी बंद
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी (PAA) ने 18 अक्टूबर 2026 को एक नया नोटिस टू एयरमेन (NOTAM) जारी करते हुए भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र पर लगे प्रतिबंध को 24 नवंबर 2026 तक बढ़ा दिया है। इससे पहले यह प्रतिबंध 24 अक्टूबर को समाप्त होने वाला था। यह विस्तार कराची और लाहौर दोनों फ्लाइट इंफॉर्मेशन रीजन (FIR) पर लागू है और भारतीय नागरिक तथा सैन्य, दोनों श्रेणी के विमानों को प्रभावित करता है।
प्रतिबंध का दायरा और विवरण
नए NOTAM के अनुसार, भारत में पंजीकृत अथवा भारतीय एयरलाइंस या विमानन ऑपरेटरों के स्वामित्व, संचालन या लीज़ पर लिए गए सभी विमान 24 नवंबर 2026 तक पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकते — जब तक उससे पहले कोई नया आदेश जारी न हो। PAA ने यह घोषणा सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर भी साझा की।
यह प्रतिबंध पाकिस्तान के दोनों प्रमुख हवाई क्षेत्रों — कराची FIR और लाहौर FIR — में पूरी तरह प्रभावी है। इनमें भारतीय सैन्य विमानों सहित हर श्रेणी के विमान शामिल हैं।
पृष्ठभूमि: पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ तनाव
इन प्रतिबंधों की जड़ें अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में आई तीव्र गिरावट में हैं। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित तत्वों को जिम्मेदार ठहराया, जबकि इस्लामाबाद ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।
पाकिस्तान ने 23 अप्रैल 2025 को सर्वप्रथम भारतीय विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद किया था। इसके जवाब में भारत ने 30 अप्रैल 2025 से पाकिस्तानी एयरलाइंस और विमानों पर समान प्रतिबंध लागू किए। तब से दोनों देश कई बार इन प्रतिबंधों की अवधि बढ़ा चुके हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने तनाव के दौरान भारतीय विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद किया हो। रिपोर्टों के अनुसार, 1999 के कारगिल संघर्ष और 2019 के पुलवामा हमले के बाद भी इसी तरह के प्रतिबंध लागू किए गए थे। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव अभी भी बना हुआ है और सामान्यीकरण के कोई ठोस संकेत नहीं मिल रहे।
विमानन क्षेत्र पर असर
पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र का बंद रहना भारतीय एयरलाइंस के लिए पश्चिम एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाले मार्गों को लंबा और महंगा बनाता है, क्योंकि विमानों को वैकल्पिक रास्ते अपनाने पड़ते हैं। इससे ईंधन लागत और उड़ान समय दोनों में वृद्धि होती है।
आगे क्या होगा
फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से प्रतिबंध हटाने के कोई तत्काल संकेत नहीं हैं। 24 नवंबर 2026 की समयसीमा से पहले कोई नया राजनयिक घटनाक्रम न हुआ तो दोनों देश एक बार फिर प्रतिबंध की अवधि बढ़ा सकते हैं। भारत-पाकिस्तान संबंधों की दिशा ही इस विमानन गतिरोध के भविष्य को तय करेगी।