एयर फ्रांस ने इजरायल रूट पर पाकिस्तानी क्रू को रोका, फ्लाईदुबई हमले के बाद 31 देशों पर सख्ती
सारांश
मुख्य बातें
एयर फ्रांस ने पाकिस्तान समेत उन 31 देशों के पायलटों और केबिन क्रू को इजरायल आने-जाने वाली उड़ानों में तैनात करने पर रोक लगा दी है, जिनके इजरायल के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। यह कदम 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में हुई एक गंभीर घटना के बाद इन नियमों के सख्त क्रियान्वयन की पृष्ठभूमि में उठाया गया है।
फ्लाईदुबई घटना — जिसने सब बदल दिया
कथित तौर पर 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में ओमानी सह-पायलट हमाम अल-हम्मामी ने विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने का प्रयास करते हुए भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला किया। ओमान उन देशों में शामिल है जिनके इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं, और यही इस घटना की केंद्रीय संवेदनशीलता बन गई।
इस घटना के ठीक एक दिन बाद, 1 अक्टूबर 2026 को इजरायल के परिवहन और सड़क सुरक्षा मंत्रालय ने सभी विदेशी एयरलाइंस को औपचारिक निर्देश जारी किए। हालाँकि रिपोर्टों के अनुसार ये प्रतिबंध पहले से अस्तित्व में थे, लेकिन उन्हें इतनी सख्ती से कभी लागू नहीं किया गया था।
एयर फ्रांस और अन्य एयरलाइंस की प्रतिक्रिया
13 अक्टूबर 2026 को फ्रांसीसी खोजी समाचार मंच मीडियापार्ट और विमानन खुफिया कंपनी सीएच-एविएशन की रिपोर्टों ने खुलासा किया कि एयर फ्रांस और यूनाइटेड एयरलाइंस ने अपने पायलटों व केबिन क्रू को इन नियमों की विधिवत जानकारी दे दी है।
एयर फ्रांस ने पुष्टि की है कि वह इजरायल की प्रवेश आवश्यकताओं का पालन कर रही है। यूनाइटेड एयरलाइंस ने अपने क्रू-प्रबंधन प्रणाली में इन नियमों को शामिल कर लिया है, ताकि प्रतिबंधित नागरिकता वाले कर्मचारी स्वतः इजरायल रूट पर तैनात न हो सकें। चेक गणराज्य की एयरलाइन स्मार्टविंग्स ने भी इसी दिशा में कदम उठाए हैं।
इथियोपियन एयरलाइंस की उड़ान को वापस भेजा गया
इन नियमों के कड़े प्रवर्तन का व्यावहारिक असर उस समय सामने आया जब इजरायली अधिकारियों ने इथियोपियन एयरलाइंस की एक उड़ान को मध्य हवाई यात्रा में लौटने का आदेश दे दिया। विमान में एक इंडोनेशियाई पायलट मौजूद था, जो द यरूशलम पोस्ट के अनुसार तब तक एक घंटे से उड़ान भर रहा था और इथियोपिया के हवाई क्षेत्र में ही था।
विमान को अदीस अबाबा वापस भेजा गया, क्रू बदला गया, और इसके बाद वह दोबारा तेल अवीव के लिए रवाना होकर अंततः पहुँचा। इथियोपियन एयरलाइंस ने इसे 'गलती' करार देते हुए कहा कि उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि संबंधित पायलट को इजरायल जाने वाली उड़ान संचालित करने की अनुमति नहीं है। इंडोनेशिया, जो एक मुस्लिम-बहुल देश है, इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं रखता।
किन देशों के नागरिकों पर लागू हैं ये प्रतिबंध
मीडियापार्ट और इजरायली मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, ये प्रतिबंध 31 मुस्लिम-बहुल देशों के नागरिकों पर लागू होते हैं। इनमें पाकिस्तान, ईरान, ओमान, सऊदी अरब, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, बांग्लादेश, अफगानिस्तान, इराक, लेबनान और नाइजर समेत अनेक देश शामिल हैं।
गौरतलब है कि ये नियम केवल पायलटों तक सीमित नहीं हैं — केबिन क्रू पर भी समान रूप से लागू होते हैं। यहाँ तक कि दोहरी नागरिकता रखने वाले व्यक्ति भी इन प्रतिबंधों से स्वतः मुक्त नहीं माने जाते।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक विमानन उद्योग पहले से ही भू-राजनीतिक तनावों और हवाई मार्ग परिवर्तनों से जूझ रहा है। आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रीयता के आधार पर क्रू की तैनाती पर प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय श्रम और विमानन मानदंडों से टकरा सकता है। यह मामला वैश्विक एयरलाइंस के लिए संचालन संबंधी नई जटिलताएँ पैदा कर रहा है, और आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय विमानन संस्थाओं की प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहेगा।