30 अक्टूबर 2026
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पाकिस्तान का यू टर्न: ताइवानी एयरलाइंस पर लगाया प्रतिबंध घंटों में वापस, चीन के दबाव का आरोप

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पाकिस्तान का यू टर्न: ताइवानी एयरलाइंस पर लगाया प्रतिबंध घंटों में वापस, चीन के दबाव का आरोप

सारांश

पाकिस्तान ने 'वन चाइना' नीति के नाम पर ताइवानी एयरलाइंसों को हवाई क्षेत्र से रोका — फिर घंटों में पलट गया। यह महज एक विमानन विवाद नहीं, बल्कि चीन के बढ़ते प्रभाव और पाकिस्तान की कूटनीतिक कसमसाहट का जीवंत उदाहरण है।

मुख्य बातें

पाकिस्तान ने ताइवानी एयरलाइंस चाइना एयरलाइंस लिमिटेड और ईवा एयरवेज कॉर्प को हवाई क्षेत्र में प्रवेश से रोका, फिर कुछ घंटों में निर्णय वापस लिया।
25 से 28 अक्टूबर 2026 के बीच दोनों एयरलाइंसों ने पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र छोड़कर रूस के ऊपर से कम से कम एक दर्जन उड़ानें संचालित कीं।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि 'वन चाइना' नीति के तहत केवल मुख्य भूमि चीन की एयरलाइंसों को अनुमति दी गई थी।
ताइवान की कार्यकारी परिषद की प्रवक्ता मिशेल ली ने पाकिस्तान पर उड़ान सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया।
दोनों एयरलाइंसों को अब 28 अक्टूबर 2026 से 27 मार्च 2027 तक पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र से उड़ान भरने की अनुमति बहाल की गई है।

पाकिस्तान ने 30 अक्टूबर 2026 को ताइवान की दो प्रमुख एयरलाइंस — चाइना एयरलाइंस लिमिटेड और ईवा एयरवेज कॉर्प — को अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश से रोकने के बाद कुछ ही घंटों में यह निर्णय पलट दिया। इस्लामाबाद के इस नाटकीय यू टर्न ने अंतरराष्ट्रीय विमानन, 'वन चाइना' नीति और क्षेत्रीय कूटनीति के बीच जटिल संबंधों को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

मुख्य घटनाक्रम

रिपोर्टों के अनुसार, 25 से 28 अक्टूबर 2026 के बीच ताइवानी एयरलाइंसों ने अपने उड़ान मार्ग बदल दिए और पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र से होकर नहीं गुजरीं। इस दौरान दोनों एयरलाइंसों ने एशिया और यूरोप के बीच कम से कम एक दर्जन उड़ानें संचालित कीं, जो रूस के ऊपर से होकर गुजरती रहीं। उड़ानों की निगरानी से जुड़े आंकड़ों के अनुसार यह जानकारी सामने आई है।

पाकिस्तान ने बाद में 28 अक्टूबर 2026 से 27 मार्च 2027 तक दोनों ताइवानी एयरलाइंसों को अपने हवाई क्षेत्र से उड़ान संचालित करने की अनुमति बहाल कर दी।

पाकिस्तान की स्थिति

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान को दिए बयान में कहा कि इस्लामाबाद ने केवल मुख्य भूमि चीन की एयरलाइंस को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति दी थी। उन्होंने स्पष्ट किया, "विमानन विभाग 'वन चाइना' नीति का पालन करता है। केवल मुख्य भूमि चीन को अनुमति है।"

यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान और चीन के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी — जिसे चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के रूप में जाना जाता है — गहरी हो रही है। ऐसे में बीजिंग की नीतिगत प्राथमिकताओं का इस्लामाबाद के विमानन नियामक निर्णयों पर असर पड़ना स्वाभाविक रूप से जाँच के दायरे में आ गया।

ताइवान की प्रतिक्रिया

ताइवान के उप विदेश मंत्री चेन मिंग ची ने चिंता जताते हुए कहा कि इस तरह का कदम अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक खतरनाक संदेश दे सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि इस निर्णय के पीछे चीन का प्रभाव हो सकता है, हालांकि कथित तौर पर उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं प्रस्तुत किया।

ताइवान की कार्यकारी परिषद की प्रवक्ता मिशेल ली ने मंत्रिमंडल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पाकिस्तान ने चीन के सामने झुकते हुए उड़ान सुरक्षा से समझौता किया, अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी की और हवाई क्षेत्र का राजनीतिक इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि यह कदम ताइवान की राष्ट्रीय संप्रभुता को कमजोर करता है।

अंतरराष्ट्रीय विमानन पर असर

गौरतलब है कि पाकिस्तान को पहला ऐसा देश बताया गया जिसने ताइवान की इन दो एयरलाइंसों पर प्रतिबंध लगाने के बाद अपना निर्णय वापस लिया। यह प्रकरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि हवाई क्षेत्र के राजनीतिक उपयोग का सीधा असर एशिया और यूरोप के बीच व्यावसायिक उड़ानों की लागत और समयसीमा पर पड़ता है। रूस के ऊपर से उड़ानें संचालित करना एक वैकल्पिक मार्ग था, जो अपेक्षाकृत अधिक लंबा और महंगा हो सकता है।

क्या होगा आगे

फिलहाल दोनों एयरलाइंसों को 27 मार्च 2027 तक पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र से गुजरने की अनुमति दे दी गई है। विश्लेषकों के अनुसार, यह घटनाक्रम यह सवाल खड़ा करता है कि क्या भविष्य में चीन पाकिस्तान संबंधों की गहराती निकटता अन्य देशों की एयरलाइंसों के लिए हवाई क्षेत्र संबंधी नीतियों को और अधिक अनिश्चित बनाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

भले ही अल्पकालिक रही, वैश्विक विमानन की निष्पक्षता के लिए एक खतरनाक नज़ीर है।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान ने ताइवानी एयरलाइंस पर प्रतिबंध क्यों लगाया था?
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने चीन की 'वन चाइना' नीति के अनुरूप ताइवानी एयरलाइंसों को अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश से रोका था। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि विमानन विभाग इस नीति का पालन करता है और केवल मुख्य भूमि चीन की एयरलाइंसों को अनुमति दी गई थी।
ताइवान की कौन सी एयरलाइंसें प्रभावित हुईं?
ताइवान की दो प्रमुख एयरलाइंस — चाइना एयरलाइंस लिमिटेड और ईवा एयरवेज कॉर्प — प्रभावित हुईं। 25 से 28 अक्टूबर 2026 के बीच इन्होंने पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र छोड़कर वैकल्पिक मार्गों से कम से कम एक दर्जन उड़ानें संचालित कीं।
पाकिस्तान ने प्रतिबंध कब वापस लिया और अब उड़ानें कब तक चल सकती हैं?
पाकिस्तान ने कुछ ही घंटों के भीतर अपना निर्णय पलट दिया। दोनों ताइवानी एयरलाइंसों को अब 28 अक्टूबर 2026 से 27 मार्च 2027 तक पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र से उड़ान संचालित करने की अनुमति दे दी गई है।
ताइवान ने पाकिस्तान के इस कदम पर क्या कहा?
ताइवान की कार्यकारी परिषद की प्रवक्ता मिशेल ली ने कहा कि पाकिस्तान ने चीन के सामने झुकते हुए उड़ान सुरक्षा से समझौता किया और हवाई क्षेत्र का राजनीतिक इस्तेमाल किया। उप विदेश मंत्री चेन मिंग ची ने आशंका जताई कि इस निर्णय के पीछे चीन का प्रभाव हो सकता है, हालांकि इसके समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं प्रस्तुत किया गया।
इस घटनाक्रम का अंतरराष्ट्रीय विमानन पर क्या असर पड़ा?
दोनों ताइवानी एयरलाइंसों को पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र बंद होने के दौरान रूस के ऊपर से वैकल्पिक मार्गों से उड़ान भरनी पड़ी, जो अधिक लंबे और महंगे हो सकते हैं। पाकिस्तान इस घटना में पहला ऐसा देश बताया गया जिसने ताइवान की इन दो एयरलाइंसों पर प्रतिबंध लगाने के बाद अपना फैसला वापस लिया।
राष्ट्र प्रेस
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