जी-20 विदेश मंत्री बैठक: अटलांटा में लावरोव की मौजूदगी से पश्चिमी देशों में दरार, यूक्रेन मुद्दे पर सहमति मुश्किल
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका के अटलांटा में 30 और 31 अक्टूबर 2026 को आयोजित जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की भागीदारी ने पश्चिमी देशों के बीच मॉस्को के साथ संबंधों को लेकर बढ़ते मतभेदों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। यूक्रेन में युद्ध जारी रहने के बीच रूसी अधिकारियों की इस तरह की उपस्थिति को लेकर पश्चिमी सहमति अब टूटती दिख रही है।
बैठक की पृष्ठभूमि और मेजबानी
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस दो दिवसीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। यह बैठक दिसंबर 2026 में मियामी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मेजबानी में प्रस्तावित जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन से पहले की तैयारी के रूप में देखी जा रही है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी उस शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है, हालांकि उनकी उपस्थिति अभी अनिश्चित है।
अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वह जी-20 को उसके मूल आर्थिक एजेंडे — आर्थिक विकास, विनियमन में ढील, नवाचार, ऊर्जा और व्यापार — की ओर वापस लाना चाहता है। लेकिन लावरोव की मौजूदगी ने बैठक के वातावरण को राजनीतिक बना दिया है।
पश्चिमी देशों में मतभेद
वाशिंगटन स्थित सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी के एसोसिएट फेलो निकोलस लॉकर के अनुसार, यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने पर हमले के शुरुआती वर्षों में अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगी मॉस्को के साथ किसी भी तरह की सामान्य कूटनीतिक बातचीत के खिलाफ एकजुट थे। उन्होंने कहा, 'अब यह सहमति टूट चुकी है।'
जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने कहा कि वह सभी प्रतिभागियों के साथ सामूहिक तस्वीर खिंचवाने से परहेज नहीं करेंगे, क्योंकि संवाद उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक युद्ध जारी है, रूस के साथ संबंध सामान्य नहीं हो सकते।
गौरतलब है कि यह मतभेद पहली बार नहीं उभरा। अगस्त 2026 में उत्तरी कैरोलिना के एशविले में हुई जी-20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान यूरोपीय प्रतिनिधियों ने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की रूसी वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव के साथ द्विपक्षीय बैठक पर आपत्ति जताई थी। लॉकर के अनुसार, यूरोपीय प्रतिनिधियों ने तब इस बात पर भी जोर दिया था कि सिलुआनोव को सामूहिक तस्वीर में शामिल न किया जाए।
यूक्रेन की अनुपस्थिति और विवाद
इस बार यूक्रेन को बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया, क्योंकि वाशिंगटन ने निमंत्रण केवल औपचारिक जी-20 सदस्य देशों तक सीमित रखे। सेंटर फॉर यूरोपियन पॉलिसी एनालिसिस के वरिष्ठ फेलो जेम्स लैमोंड ने कहा कि लावरोव की मौजूदगी और यूक्रेन की अनुपस्थिति में यूक्रेन से जुड़े मुद्दों पर ठोस चर्चा करना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा, 'यूक्रेन की मौजूदगी के बिना किसी भी ठोस मुद्दे पर बातचीत नहीं की जा सकती।'
लैमोंड के मुताबिक, यूक्रेन और ईरान के युद्ध के मुद्दे बैठक पर हावी रह सकते हैं, जिससे विदेश मंत्रियों के लिए आर्थिक प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करना कठिन होगा।
रूस की प्रतिक्रिया और लावरोव का रुख
रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने बताया कि रूसी प्रतिनिधिमंडल के वीजा से जुड़ी प्रक्रिया आखिरी समय में पूरी हुई। उन्होंने संकेत दिया कि वाशिंगटन में हर कोई लावरोव की भागीदारी से खुश नहीं है। लावरोव ने अपनी ओर से कहा है कि वह इस बैठक का इस्तेमाल वैश्विक आर्थिक संस्थानों में सुधार और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए करेंगे।
आगे की स्थिति अनिश्चित
बैठक के समापन पर संयुक्त बयान जारी होगा या अमेरिका केवल अध्यक्षीय सारांश जारी करेगा — यह अभी स्पष्ट नहीं है। अटलांटा में रुबियो और लावरोव के बीच किसी द्विपक्षीय बैठक की भी अब तक घोषणा नहीं हुई है। यह बैठक दिसंबर में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले पश्चिमी एकता की असली परीक्षा बन गई है।