अमेरिका ने पुतिन को जी20 का न्योता दिया, रुबियो बोले — ट्रंप से मुलाकात संभव
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 24 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पत्रकारों को बताया कि वाशिंगटन ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दिसंबर में प्रस्तावित जी20 सम्मेलन के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजा है। इस निमंत्रण के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पुतिन के बीच मुलाकात की अटकलें तेज हो गई हैं, हालांकि रुबियो ने स्पष्ट किया कि किसी अलग शिखर सम्मेलन को लेकर अभी कोई चर्चा नहीं हुई है।
रुबियो का बयान और जी20 की अहमियत
रुबियो ने कहा, 'हमने राष्ट्रपति पुतिन को जी20 में आमंत्रित किया है।' उन्होंने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि पुतिन यह निमंत्रण स्वीकार करेंगे, क्योंकि इससे उन्हें ट्रंप और दुनिया के अन्य नेताओं से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा। जी20 में अमेरिका, रूस, भारत और चीन समेत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएँ शामिल हैं, और इसके नेताओं की बैठकों में औपचारिक कार्यक्रम के अलावा अनौपचारिक द्विपक्षीय वार्ता के मौके भी मिलते हैं।
जब रुबियो से सीधे पूछा गया कि क्या अमेरिका एक और ट्रंप-पुतिन शिखर सम्मेलन चाहता है, तो उन्होंने कहा: 'इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर पुतिन जी20 में शामिल होते हैं और बैठक का कोई ठोस मकसद हो, तो दोनों राष्ट्रपति मिल सकते हैं।
ट्रंप-पुतिन के बीच संवाद का सिलसिला
रुबियो के अनुसार, ट्रंप के पदभार संभालने के बाद से दोनों राष्ट्रपतियों के बीच टेलीफोन पर कम से कम 12 बार बातचीत हो चुकी है, हालांकि रुबियो ने स्वीकार किया कि उनके पास सटीक गिनती नहीं है। रुबियो ने कहा कि ट्रंप उन नेताओं से मिलने को तैयार रहे हैं जिनसे वे असहमत हों, लेकिन उनकी प्राथमिकता ऐसी बैठक होगी जिसका ठोस परिणाम निकले — न कि महज इसलिए कि दोनों नेता एक ही जगह पर हों।
यूक्रेन युद्ध और सीमित युद्धविराम की संभावना
रुबियो के ये बयान ऐसे समय में आए जब अमेरिकी अधिकारी रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर सक्रिय कूटनीति में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने अनाज और ऊर्जा से जुड़े सीमित युद्धविराम में रुचि दिखाई है, हालांकि उन्होंने माना कि इस तक पहुँचना आसान नहीं होगा। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने भी अमेरिकी अधिकारियों के साथ इस विचार पर चर्चा की थी, और मॉस्को में स्टीव विटकॉफ तथा जेरेड कुशनर की बैठक में भी इस पर बात हुई थी।
रुबियो ने कहा कि सीमित युद्धविराम से युद्ध पूरी तरह खत्म नहीं होगा, लेकिन इसके व्यापक असर को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने इसे एक व्यापक समझौते के लिए 'शुरुआती बिंदु' बताया।
ऊर्जा और अनाज पर हमले — बड़ी बाधा
रुबियो ने ऊर्जा क्षेत्र को युद्धविराम की राह में सबसे बड़ी बाधा बताया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन रूस की तेल और गैस सुविधाओं पर हमले कर रहा है जिनसे मॉस्को को राजस्व मिलता है, जबकि रूस सर्दियों के मौसम में यूक्रेन के बिजली ग्रिड को निशाना बना रहा है। इस प्रकार दोनों पक्ष ऊर्जा को अपने युद्ध के लक्ष्यों का अभिन्न हिस्सा मानते हैं। गौरतलब है कि रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला किया था, और तब से इस युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा और खाद्य बाजारों पर पड़ता रहा है।
आगे क्या
रुबियो ने साफ किया कि प्रशासन मॉस्को के साथ बातचीत के लिए तैयार रहेगा और अगर वाशिंगटन कोई रचनात्मक भूमिका निभा सकता है तो वह ऊर्जा-युद्धविराम जैसी व्यवस्था लाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि हर कोई मानता है कि यह युद्ध बातचीत के जरिए हुए समझौते से ही खत्म होगा।' दिसंबर में जी20 की बैठक एक अहम कूटनीतिक अवसर बन सकती है — बशर्ते पुतिन निमंत्रण स्वीकार करें।