एआई शेयरों की बिकवाली से भारत बना FPI की पहली पसंद, नवंबर में ₹45,970 करोड़ का निवेश
सारांश
मुख्य बातें
वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) शेयरों में तीव्र बिकवाली के बीच भारतीय शेयर बाज़ार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गया है। 8 नवंबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने नवंबर महीने में अब तक इक्विटी में कुल ₹45,970 करोड़ का निवेश किया है — जो बाज़ार में एक बड़े पुनर्संतुलन का संकेत है। फाइनेंशियल, आईटी, ऑटोमोबाइल और टेलीकॉम क्षेत्रों में लगातार खरीदारी के चलते निफ्टी ने बीते एक सप्ताह में करीब 8.6 प्रतिशत का रिटर्न दर्ज किया है।
बाज़ार में क्या हुआ
पिछले हफ्ते भारतीय बाज़ारों में संस्थागत निवेशकों के रुझान में अचानक और उल्लेखनीय बदलाव आया। एफपीआई आक्रामक खरीदार के रूप में सामने आए, जबकि डीआईआई (घरेलू संस्थागत निवेशक) शुद्ध विक्रेता रहे। इस आक्रामक खरीदारी और उससे उत्पन्न 'शॉर्ट स्क्वीज़' ने बाज़ार में व्यापक तेज़ी की लहर ला दी।
निफ्टी ने लगातार पाँच कारोबारी सत्रों में जोरदार बढ़त दर्ज की और हफ्ते के उच्चतम स्तर 25,030.35 पर बंद हुआ, जो 8.6 प्रतिशत की साप्ताहिक बढ़त दर्शाता है। बैंक निफ्टी भी इस दौरान 8 प्रतिशत ऊपर रहा। वहीं व्यापक बाज़ार अपेक्षाकृत कमज़ोर रहे — निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 क्रमशः 5.8 प्रतिशत और 2.8 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।
एआई बिकवाली और भारत की ओर रुख
विश्लेषकों के अनुसार एफपीआई के रुझान में यह अचानक परिवर्तन, अमेरिका के साथ-साथ दक्षिण कोरिया, ताइवान और जापान जैसे प्रमुख एआई बाज़ारों में हुई तीव्र बिकवाली का परिणाम है। यह बिकवाली अमेरिका में डेटा सेंटर पर होने वाले अंधाधुंध खर्च को लेकर उभरी चिंताओं से जुड़ी है।
बाज़ार के जानकारों के अनुसार, हाल के अमेरिकी चुनावों में कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स की जीत ने इस बिकवाली को और हवा दी, क्योंकि डेमोक्रेट्स डेटा सेंटर पर बेलगाम खर्च के विरोधी माने जाते हैं। कथित तौर पर वे एआई के लिए नए नियामक ढाँचे लागू करने की दिशा में कदम उठा सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब एआई-केंद्रित बाज़ारों में निवेशकों का भरोसा पहले से ही डोल रहा था।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा, 'भारत में कंपनियों की कमाई में शानदार वृद्धि और लार्ज-कैप शेयरों के आकर्षक मूल्यांकन ने भारत को निवेश के लिए एक पसंदीदा जगह बना दिया है।' यह टिप्पणी ऐसे संदर्भ में महत्त्वपूर्ण है जब वैश्विक पूंजी प्रवाह नए गंतव्यों की तलाश में है।
आगे क्या होगा
आने वाले हफ्तों में विदेशी निवेश का निरंतर बना रहना बाज़ार की दिशा के लिए निर्णायक होगा। घरेलू स्तर पर जारी भारी मुनाफावसूली के कारण यह तेज़ी पूरी तरह एफपीआई समर्थन पर टिकी है। बाज़ार सहभागी ब्रेंट क्रूड की कीमतों और अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़े घटनाक्रमों पर बारीकी से नज़र रखेंगे, जो बाज़ार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।