30 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मध्य प्रदेश में 900 से अधिक पुराने कानून समाप्त, CM मोहन यादव बोले — वक्त की माँग थी यह बदलाव

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मध्य प्रदेश में 900 से अधिक पुराने कानून समाप्त, CM मोहन यादव बोले — वक्त की माँग थी यह बदलाव

सारांश

मध्य प्रदेश सरकार ने एक बड़े कानूनी सफाई अभियान में 900 से अधिक पुराने कानून निरस्त किए — इनमें 1812 और 1817 के औपनिवेशिक प्रावधान भी शामिल। CM मोहन यादव ने जबलपुर में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मिलकर इसे न्याय व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में ज़रूरी कदम बताया।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश सरकार ने 900 से अधिक पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को निरस्त किया।
निरस्त कानूनों में 1812 और 1817 के औपनिवेशिक दौर के प्रावधान भी शामिल थे।
CM मोहन यादव ने 30 अक्टूबर 2026 को जबलपुर में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे से मुलाकात के दौरान यह जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने इस पहल का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रहे औपनिवेशिक कानून-मुक्ति अभियान को दिया।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संवैधानिक ढाँचे के भीतर काम करने पर भी CM यादव ने ज़ोर दिया।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि राज्य सरकार ने 900 से अधिक पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को निरस्त कर दिया है। इनमें वर्ष 1812 और 1817 के औपनिवेशिक दौर के कानून भी शामिल थे, जो दो सदियों से कानून की किताबों में दर्ज थे। जबलपुर में एक कार्यक्रम के दौरान यह बयान देते हुए मुख्यमंत्री ने इसे जनहित में उठाया गया ज़रूरी कदम बताया।

मुख्य घटनाक्रम

जबलपुर के सर्किट हाउस नंबर-1 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री यादव ने कानूनी सुधारों का विस्तृत ब्यौरा दिया। उन्होंने कहा कि समय और परिस्थितियों के बदलाव के साथ अनेक कानून अपनी उपयोगिता खो चुके थे और उन्हें हटाना कानूनी व्यवस्था की प्रासंगिकता के लिए अनिवार्य हो गया था। यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री के जबलपुर दौरे का हिस्सा था, जिसमें बाद में होटल शॉन एलिजे में एडवोकेट जनरल कार्यालय द्वारा आयोजित रात्रिभोज भी शामिल था।

सरकार की दलील और PM मोदी को श्रेय

मुख्यमंत्री यादव ने इस पहल का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को दिया। उन्होंने कहा, 'मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने भारतीय न्याय व्यवस्था को पुराने और अप्रासंगिक औपनिवेशिक कानूनों से मुक्त कर वर्तमान समय की जरूरतों के अनुरूप नई दिशा देने का काम किया है।' गौरतलब है कि केंद्र सरकार भी पिछले कुछ वर्षों में सैकड़ों अप्रचलित केंद्रीय कानूनों को निरस्त कर चुकी है, और मध्य प्रदेश की यह पहल उसी दिशा में राज्य स्तर पर उठाया गया कदम है।

न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर ज़ोर

लोकतांत्रिक संस्थाओं के महत्व को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, 'हमारे लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत यह है कि न्यायपालिका अपनी जिम्मेदारियों का स्वतंत्र रूप से निर्वहन करती है, वहीं निर्वाचित सरकारें संवैधानिक ढांचे के भीतर रहकर अपने कर्तव्यों का पालन करती हैं।' उन्होंने नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान की राजनीतिक परिस्थितियों का संदर्भ देते हुए कहा कि भारत की संवैधानिक व्यवस्था और न्यायिक परंपरा उसकी लोकतांत्रिक श्रेष्ठता को प्रमाणित करती है।

आम जनता पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार पुराने और निष्क्रिय कानूनों के बने रहने से न केवल अदालतों पर अनावश्यक बोझ पड़ता है, बल्कि नागरिकों को भी भ्रमित करने वाले और कभी-कभी परस्पर विरोधाभासी प्रावधानों का सामना करना पड़ता है। इन 900 से अधिक कानूनों को समाप्त करने से व्यापार सुगमता, प्रशासनिक पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों की स्पष्टता में सुधार की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' और 'ईज़ ऑफ लिविंग' सुधारों की गति तेज़ हुई है।

जबलपुर और सांस्कृतिक संदर्भ

मुख्यमंत्री यादव ने जबलपुर को नर्मदा नदी और भेड़ाघाट की संगमरमर चट्टानों के कारण प्राकृतिक व आध्यात्मिक महत्व वाला विशेष शहर बताया। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस कोगजे को बधाई भी दी और न्यायाधीशों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि न्यायिक परंपरा ने भारत की लोकतांत्रिक गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखा है।

इस पहल के क्रियान्वयन की विस्तृत रूपरेखा और निरस्त कानूनों की पूरी सूची राज्य सरकार द्वारा शीघ्र सार्वजनिक किए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन कानूनों में से कितने वास्तव में सक्रिय रूप से लागू हो रहे थे और कितने केवल काग़ज़ पर जीवित थे। यदि अधिकांश कानून पहले से ही निष्क्रिय थे, तो यह कदम प्रतीकात्मक अधिक और परिवर्तनकारी कम है। इसके अलावा, निरस्त कानूनों की पूरी सूची और उनके स्थान पर नई व्यवस्था का सार्वजनिक खुलासा ज़रूरी है — बिना पारदर्शिता के यह सुधार जवाबदेही की कसौटी पर कमज़ोर साबित हो सकता है।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में कितने पुराने कानून समाप्त किए गए हैं?
मध्य प्रदेश सरकार ने 900 से अधिक पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को निरस्त किया है। इनमें 1812 और 1817 के औपनिवेशिक दौर के कानून भी शामिल थे।
इन कानूनों को समाप्त करने का फैसला क्यों किया गया?
CM मोहन यादव के अनुसार समय और परिस्थितियों के बदलने के साथ ये कानून अपनी उपयोगिता खो चुके थे और कानूनी व्यवस्था को आधुनिक व प्रासंगिक बनाने के लिए इन्हें हटाना ज़रूरी था। इसका उद्देश्य न्याय प्रणाली को जनहित के अनुकूल बनाना है।
CM मोहन यादव ने यह घोषणा कहाँ और कब की?
यह घोषणा 30 अक्टूबर 2026 को जबलपुर में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे से मुलाकात के दौरान की गई। यह बैठक जबलपुर के सर्किट हाउस नंबर-1 में हुई।
इन कानूनों के खत्म होने से आम जनता को क्या फायदा होगा?
पुराने कानूनों के निरस्त होने से कानूनी व्यवस्था अधिक स्पष्ट और सुसंगत होगी, जिससे नागरिकों को परस्पर विरोधाभासी प्रावधानों का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही प्रशासनिक प्रक्रियाएँ सरल होंगी और व्यापार सुगमता में भी सुधार की उम्मीद है।
क्या केंद्र सरकार ने भी पुराने कानून निरस्त किए हैं?
हाँ, केंद्र सरकार भी पिछले कुछ वर्षों में सैकड़ों अप्रचलित केंद्रीय कानूनों को निरस्त कर चुकी है। CM यादव ने इस पहल का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रहे औपनिवेशिक कानून-मुक्ति अभियान को दिया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 9 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले