8 अगस्त 2026
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औपनिवेशिक न्याय व्यवस्था में बदलाव: मोहन यादव बोले — मोदी के नेतृत्व में हो रहा कायाकल्प

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औपनिवेशिक न्याय व्यवस्था में बदलाव: मोहन यादव बोले — मोदी के नेतृत्व में हो रहा कायाकल्प

सारांश

इंदौर में वेस्ट ज़ोन कांफ्रेंस में CM मोहन यादव ने कहा कि PM मोदी के नेतृत्व में सदियों पुरानी औपनिवेशिक न्याय व्यवस्था की जगह नई, तकनीक-आधारित और नागरिक-हितैषी प्रणाली स्थापित हो रही है — जन-विश्वास अधिनियम, UCC विधेयक और डिजिटल न्याय उपकरण इसके प्रमुख स्तंभ हैं।

मुख्य बातें

CM मोहन यादव ने 8 अगस्त को इंदौर में वेस्ट ज़ोन क्षेत्रीय कांफ्रेंस में न्यायिक सुधारों पर संबोधन दिया।
PM मोदी के नेतृत्व में औपनिवेशिक दौर के कानूनों की जगह नए कानून लागू किए जा रहे हैं।
जन-विश्वास अधिनियम के तहत छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर कानून सरल बनाया गया।
ई-फाइलिंग , वर्चुअल सुनवाई और वन डेटा-वन केस जैसी तकनीकों से न्यायिक प्रक्रिया का डिजिटलीकरण हो रहा है।
मध्यप्रदेश विधानसभा ने समान नागरिक संहिता विधेयक पारित कर राष्ट्रीय सुधार की दिशा में कदम बढ़ाया।
मध्यस्थता के ज़रिए छोटे मामलों का निपटान कर केस पेंडेंसी कम करने पर ज़ोर दिया जा रहा है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 8 अगस्त 2026 को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित वेस्ट ज़ोन क्षेत्रीय कांफ्रेंस में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंग्रेजों के शासनकाल से चली आ रही न्याय व्यवस्था को मूलभूत रूप से बदला जा रहा है। यह सम्मेलन 'न्याय तक पहुंच बढ़ाने' विषय पर केंद्रित था।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि भारत की न्याय परंपरा हज़ारों वर्ष पुरानी है और पंच परमेश्वर की संवाद-आधारित न्याय प्रणाली इसकी आत्मा रही है। उन्होंने कहा, 'हमारे संविधान में हज़ारों वर्ष की भारतीय न्याय परंपरा समाहित है, इसीलिए न्यायालयों को न्याय का मंदिर कहा जाता है।' उनके अनुसार, छोटे-छोटे विवादों में मध्यस्थता के माध्यम से निपटान सुनिश्चित कर केस पेंडेंसी को कम किया जा रहा है।

डिजिटल सुधार और तकनीकी बदलाव

मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि आधुनिक तकनीक के ज़रिए न्याय प्रणाली में व्यापक परिवर्तन आए हैं। ई-फाइलिंग, डिजिटल रिकॉर्ड, वन डेटा-वन केस, वर्चुअल सुनवाई और आधुनिक न्याय प्रबंधन प्रणालियों के माध्यम से न्यायिक ढाँचे का कायाकल्प किया जा रहा है। यह बदलाव न केवल प्रक्रियागत दक्षता बढ़ाने के लिए है, बल्कि आम नागरिक की न्याय तक पहुँच सुलभ बनाने के लिए भी है।

नए कानून और जन-विश्वास अधिनियम

यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सदियों पुराने औपनिवेशिक कानूनों के स्थान पर नए कानून लागू किए गए हैं। जन-विश्वास अधिनियम के तहत छोटे-छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है, जिससे कानून अधिक सरल और नागरिक-हितैषी बना है। गौरतलब है कि यह कदम न्यायालयों पर बोझ कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

मध्यप्रदेश की पहल: समान नागरिक संहिता

मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित कर प्रदेश के सभी नागरिकों के लिए एकसमान कानूनी ढाँचा लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश इस राष्ट्रीय न्यायिक सुधार की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

आगे की राह

यह सम्मेलन न्याय तक पहुँच को और सुगम बनाने के लिए नीति-निर्माताओं, न्यायिक अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों को एक मंच पर लाया। मध्यप्रदेश में इन सुधारों के क्रियान्वयन की गति और उनके ज़मीनी असर पर आने वाले महीनों में नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली परीक्षा यह है कि केस पेंडेंसी — जो देशभर में चार करोड़ से अधिक है — में कितनी ठोस कमी आती है। समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करना एक बड़ा राजनीतिक कदम है, लेकिन इसके क्रियान्वयन और संवैधानिक चुनौतियों पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM मोहन यादव ने इंदौर में किस विषय पर संबोधन दिया?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 8 अगस्त को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 'न्याय तक पहुँच बढ़ाने' विषय पर आयोजित वेस्ट ज़ोन क्षेत्रीय कांफ्रेंस में संबोधन दिया। उन्होंने PM मोदी के नेतृत्व में औपनिवेशिक न्याय व्यवस्था में हो रहे बदलावों को रेखांकित किया।
जन-विश्वास अधिनियम क्या है और इसका क्या असर है?
जन-विश्वास अधिनियम के तहत छोटे-छोटे कानूनी उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है, जिससे कानून अधिक सरल और नागरिक-हितैषी बना है। इसका उद्देश्य न्यायालयों पर अनावश्यक मुकदमों का बोझ कम करना है।
मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता विधेयक क्या है?
मध्यप्रदेश विधानसभा ने समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किया है, जिसका उद्देश्य प्रदेश के सभी नागरिकों के लिए एकसमान कानूनी ढाँचा लागू करना है। यह राष्ट्रीय स्तर पर चल रही न्यायिक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है।
न्याय प्रणाली में डिजिटल बदलाव क्या-क्या हैं?
ई-फाइलिंग, डिजिटल रिकॉर्ड, वन डेटा-वन केस, वर्चुअल सुनवाई और आधुनिक न्याय प्रबंधन प्रणालियाँ न्यायिक डिजिटलीकरण के प्रमुख स्तंभ हैं। इनका लक्ष्य न्याय प्रक्रिया को तेज़, पारदर्शी और आम नागरिक के लिए सुलभ बनाना है।
केस पेंडेंसी कम करने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?
CM यादव के अनुसार, छोटे-छोटे विवादों में मध्यस्थता के माध्यम से निपटान सुनिश्चित कर केस पेंडेंसी कम की जा रही है। इसके साथ ही जन-विश्वास अधिनियम के तहत कई मामलों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने से भी न्यायालयों पर बोझ घटने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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