23 अक्टूबर 2026
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पीयूष गोयल की यूरोप को चेतावनी: CBAM और 50% स्टील शुल्क से खुद को होगा नुकसान, भरोसा ही असली व्यापारिक मुद्रा

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पीयूष गोयल की यूरोप को चेतावनी: CBAM और 50% स्टील शुल्क से खुद को होगा नुकसान, भरोसा ही असली व्यापारिक मुद्रा

सारांश

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बर्लिन में यूरोप को दो टूक कहा — CBAM और 50% स्टील शुल्क यूरोप की खुद की मुश्किलें बढ़ाएंगे। साथ ही उन्होंने भारत जर्मनी व्यापार को 31 से 310 अरब यूरो तक पहुँचाने का विज़न रखा और EU FTA पर इस साल दस्तखत की उम्मीद जताई।

मुख्य बातें

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 23 अक्टूबर 2026 को बर्लिन ग्लोबल डायलॉग 2026 में यूरोप को चेताया कि CBAM और 50% स्टील आयात शुल्क यूरोपीय अर्थव्यवस्था, उद्योग और उपभोक्ताओं के लिए नुकसानदेह साबित होंगे।
गोयल ने कहा कि भारत जर्मनी द्विपक्षीय व्यापार 31 अरब यूरो से बढ़कर 310 अरब यूरो तक पहुँचने की क्षमता रखता है।
भारत EU FTA पर 2026 के अंत तक हस्ताक्षर और चार से पाँच महीनों में लागू होने की उम्मीद जताई गई।
गोयल और जर्मनी की मंत्री कैथरीना रीचे के बीच AI, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स में सहयोग पर चर्चा हुई।
गोयल की यात्रा 22 से 27 अक्टूबर तक जर्मनी और नीदरलैंड की है; साथ में लगभग 100 भारतीय उद्योगों और स्टार्टअप्स का प्रतिनिधिमंडल है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 23 अक्टूबर 2026 को बर्लिन में आयोजित 'बर्लिन ग्लोबल डायलॉग 2026' के दौरान यूरोपीय देशों को स्पष्ट चेतावनी दी कि कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) और स्टील आयात पर 50 प्रतिशत तक के शुल्क जैसे संरक्षणवादी कदम अंततः यूरोप की अर्थव्यवस्था, उद्योग और उपभोक्ताओं को ही नुकसान पहुँचाएंगे। उन्होंने कहा कि आज के वैश्विक व्यापार परिदृश्य में भरोसा सबसे मज़बूत और सबसे मूल्यवान मुद्रा है।

मुख्य घटनाक्रम

बर्लिन ग्लोबल डायलॉग 2026 के प्रश्नोत्तर सत्र में गोयल ने सीधे शब्दों में कहा, "यदि आपने स्वयं पर CBAM लागू कर लिया है और स्टील आयात पर 50 प्रतिशत शुल्क लगा दिया है, तो आप अपने लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। इससे जीवन यापन की लागत बढ़ेगी, लोग महंगाई से परेशान होंगे और आपके उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे।" यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब यूरोपीय संघ (EU) और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है।

गोयल ने जोर देते हुए कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के सामने विश्वास, प्रतिस्पर्धात्मकता और परस्पर पूरक क्षमताओं पर आधारित मज़बूत आर्थिक साझेदारी विकसित करने का ऐतिहासिक अवसर है।

भारत जर्मनी व्यापार: ₹31 अरब से ₹310 अरब का लक्ष्य

बर्लिन में आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में गोयल ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान लगभग 31 अरब यूरो से बढ़कर 310 अरब यूरो तक पहुँच सकता है, यदि दोनों देश अपनी अपनी शक्तियों का बेहतर उपयोग करें और संयुक्त रूप से नई तकनीकों एवं उत्पादों का विकास करें। हालाँकि उन्होंने इस लक्ष्य के लिए कोई निर्धारित समयसीमा नहीं बताई।

जर्मनी की आर्थिक मामलों और ऊर्जा मंत्री कैथरीना रीचे ने भी इस मौके पर दोनों देशों के बीच लालफीताशाही कम करने और संयुक्त परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा स्तर से दोगुना किया जा सकता है।

द्विपक्षीय बैठक और सहयोग के नए क्षेत्र

गोयल और रीचे के बीच 23 अक्टूबर को हुई द्विपक्षीय बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई। गोयल ने बताया कि दोनों नेताओं ने AI, सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्रिटिकल मिनरल्स, ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और मज़बूत सप्लाई चेन में सहयोग की संभावनाओं पर विचार विमर्श किया।

इस दौरे में भारत जर्मनी बिजनेस राउंडटेबल और जर्मन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (DGAP) के इंडिया सेंटर का उद्घाटन भी हुआ। गोयल के साथ लगभग 100 भारतीय उद्योगों और स्टार्टअप्स का प्रतिनिधिमंडल इस यात्रा में शामिल है।

भारत EU FTA पर बड़ी उम्मीद

गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर इस वर्ष के अंत तक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है और अगले चार से पाँच महीनों में इसे लागू भी किया जा सकता है। उन्होंने इसे दोनों पक्षों के कारोबारों के लिए 'गेम चेंजर' बताते हुए कहा कि इससे भारत और जर्मनी की कंपनियों को अपनी पूरी क्षमता हासिल करने का अवसर मिलेगा।

गौरतलब है कि गोयल 22 से 27 अक्टूबर 2026 तक जर्मनी और नीदरलैंड की आधिकारिक यात्रा पर हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक व्यापार में संरक्षणवाद की प्रवृत्ति मज़बूत हो रही है और भारत अपने निर्यात बाज़ारों को विविधता देने की कोशिश कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आक्रामक मुद्रा अपना रहा है। CBAM पर यूरोप को आईना दिखाना उस समय और भी महत्वपूर्ण है जब भारत EU FTA की अंतिम बाधाएं CBAM से जुड़ी कार्बन लागत के ही इर्द गिर्द हैं। 310 अरब यूरो के व्यापार लक्ष्य की कोई समयसीमा न देना एक चतुर कूटनीतिक चाल है — महत्वाकांक्षा को जवाबदेही से अलग रखना। असली परीक्षण यह होगा कि FTA पर दस्तखत होने के बाद क्या भारत के MSME और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र यूरोपीय बाज़ार में वास्तविक प्रवेश हासिल कर पाते हैं, या यह भी एक और 'गेम चेंजर' का दर्जा पाकर अमल में फीका पड़ जाता है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CBAM क्या है और यूरोप इसे क्यों लागू कर रहा है?
CBAM यानी कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म यूरोपीय संघ का एक व्यापार उपकरण है जो उन देशों से आयातित वस्तुओं पर कार्बन शुल्क लगाता है जहाँ उत्सर्जन मानक EU से कम सख्त हैं। इसका उद्देश्य यूरोपीय उद्योगों को कथित 'कार्बन लीकेज' से बचाना है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह विकासशील देशों के निर्यात को अनुचित रूप से प्रभावित करता है।
पीयूष गोयल ने यूरोप को CBAM पर क्या चेतावनी दी?
गोयल ने बर्लिन ग्लोबल डायलॉग 2026 में कहा कि CBAM और स्टील पर 50% आयात शुल्क यूरोप में जीवन यापन की लागत बढ़ाएंगे, महंगाई फैलाएंगे और यूरोपीय उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे धकेलेंगे। उन्होंने कहा कि भरोसा वैश्विक व्यापार की सबसे मज़बूत मुद्रा है।
भारत EU FTA कब तक लागू होने की उम्मीद है?
गोयल के अनुसार भारत EU मुक्त व्यापार समझौते पर 2026 के अंत तक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है और इसे अगले चार से पाँच महीनों में लागू किया जा सकता है। इसे उन्होंने दोनों पक्षों के कारोबारों के लिए 'गेम चेंजर' बताया है।
भारत और जर्मनी के बीच व्यापार का मौजूदा और लक्षित स्तर क्या है?
वर्तमान में भारत जर्मनी द्विपक्षीय व्यापार लगभग 31 अरब यूरो है। गोयल ने कहा कि यदि दोनों देश अपनी शक्तियों का बेहतर उपयोग करें और मिलकर नई तकनीकें विकसित करें, तो यह 310 अरब यूरो तक पहुँच सकता है, हालाँकि इसके लिए कोई समयसीमा नहीं बताई गई।
गोयल की जर्मनी नीदरलैंड यात्रा में क्या प्रमुख विषय उठाए गए?
इस यात्रा में AI, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, क्रिटिकल मिनरल्स, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और मज़बूत सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई। साथ ही DGAP के इंडिया सेंटर का उद्घाटन और भारत जर्मनी बिजनेस राउंडटेबल भी आयोजित हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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