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पीयूष गोयल ने सीबकथॉर्न को बताया 'लद्दाख का सोना', GI टैग वाले सुपरफ्रूट में देखी स्थानीय सशक्तिकरण की ताकत

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पीयूष गोयल ने सीबकथॉर्न को बताया 'लद्दाख का सोना', GI टैग वाले सुपरफ्रूट में देखी स्थानीय सशक्तिकरण की ताकत

सारांश

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक्स पर सीबकथॉर्न को 'लद्दाख गोल्ड' बताते हुए उसके असाधारण पोषण गुणों को उजागर किया — नींबू से 10 गुना अधिक विटामिन सी, 12,000 फीट की ऊँचाई पर उगने वाला यह GI टैग प्राप्त सुपरफ्रूट लद्दाख की स्थानीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक स्वास्थ्य बाज़ार दोनों के लिए एक बड़ा अवसर बन सकता है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 20 अक्टूबर 2026 को एक्स पर सीबकथॉर्न को 'भारत की प्राकृतिक विरासत का सुनहरा खजाना' बताया।
लद्दाख का यह GI टैग प्राप्त सुपरफ्रूट 12,000 फीट की ऊँचाई पर उगता है और नींबू से 10 गुना अधिक विटामिन सी रखता है।
इसके विशिष्ट सुनहरे रंग के कारण इसे 'लद्दाख गोल्ड' भी कहा जाता है।
गोयल ने इसे स्थानीय लोगों की आजीविका सशक्त करने और वैश्विक स्वास्थ्य बाज़ार में भारत की पहुँच बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा।
सोमवार को गोयल ने पुणे निर्मित जेसीबी मशीनों की न्यूज़ीलैंड के लिए पहली खेप रवाना की और भारत न्यूज़ीलैंड FTA की सराहना की।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को लद्दाख के जीआई (GI) टैग प्राप्त सीबकथॉर्न फल को 'भारत की प्राकृतिक विरासत का सुनहरा खजाना' बताया और कहा कि यह सुपरफ्रूट स्थानीय निवासियों की आजीविका को सशक्त बनाने के साथ साथ वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य को बेहतर करने में भी सहायक हो सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई इस पोस्ट में गोयल ने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें लद्दाख की ऊँचाइयों में उगने वाले इस अनोखे फल को दर्शाया गया है।

क्या है सीबकथॉर्न और क्यों इसे कहते हैं 'लद्दाख गोल्ड'

सीबकथॉर्न एक सुपरफ्रूट है जो लगभग 12,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित लद्दाख की ठंडी और कठिन जलवायु में उगता है। इसके विशिष्ट सुनहरे नारंगी रंग के कारण इसे 'लद्दाख गोल्ड' के नाम से जाना जाता है। गोयल के अनुसार, इस फल में नींबू के मुकाबले दस गुना अधिक विटामिन सी पाया जाता है, और इसमें असाधारण एंटीऑक्सीडेंट गुण भी मौजूद हैं जो इसकी कठोर प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण विकसित होते हैं।

गौरतलब है कि लद्दाख के सीबकथॉर्न को जीआई (भौगोलिक संकेत) टैग प्राप्त है, जो इसे एक संरक्षित स्थानीय उत्पाद का दर्जा देता है। यह टैग इस बात की गारंटी है कि उत्पाद विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से आता है और उसमें उस क्षेत्र की विशेषताएँ विद्यमान हैं।

मंत्री का संदेश: आजीविका और वैश्विक स्वास्थ्य

गोयल ने अपनी पोस्ट में लिखा, "लद्दाख का जीआई टैग वाला सीबकथॉर्न प्रकृति का एक अद्भुत उपहार है।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह फल न केवल स्थानीय किसानों और निवासियों को आर्थिक मजबूती दे सकता है, बल्कि वैश्विक बाज़ार में स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों की बढ़ती माँग को देखते हुए यह एक बड़े अवसर का प्रतिनिधित्व करता है। साझा किए गए वीडियो में दर्शाया गया है कि किस तरह लद्दाख की खूबसूरत घाटियों में यह फल उगाया जाता है और यह इलाके की अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न हिस्सा बन सकता है।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पूर्वी लद्दाख के आर्थिक विकास और वहाँ के स्थानीय समुदायों की आय बढ़ाने को प्राथमिकता दे रही है। सीबकथॉर्न से बने जूस, सप्लीमेंट और कॉस्मेटिक उत्पादों की माँग अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में तेजी से बढ़ रही है।

पर्यटन से जुड़ाव: लद्दाख आने वालों को खास सलाह

गोयल द्वारा साझा किए गए वीडियो में लद्दाख आने वाले पर्यटकों को इस फल को अवश्य चखने की सलाह दी गई है। वीडियो में कहा गया, "ये पौधे अकसर गर्म इलाकों में पाए जाते हैं, लेकिन प्रकृति की कुछ खास खूबियों की वजह से यह इलाका एक अलग तरह के 'सोने' का घर बन गया है।" इससे स्थानीय पर्यटन और एग्री टूरिज्म को भी बढ़ावा मिल सकता है।

न्यूज़ीलैंड के लिए जेसीबी खेप और एफटीए की सराहना

इससे एक दिन पहले, सोमवार को गोयल ने पुणे में निर्मित जेसीबी (JCB) मशीनों की न्यूज़ीलैंड के लिए पहली खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे देश के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए नए अवसरों के द्वार खुल रहे हैं।

आने वाले समय में सीबकथॉर्न की ब्रांडिंग और निर्यात प्रोत्साहन पर सरकार की नीति स्पष्ट होने से लद्दाख के स्थानीय उत्पादकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी लद्दाख के उत्पादकों की इसमें हिस्सेदारी अभी तक नगण्य रही है। असली सवाल यह है कि क्या इस सोशल मीडिया प्रचार के पीछे ठोस निर्यात प्रोत्साहन, प्रसंस्करण अवसंरचना और किसान स्तर की आय सुनिश्चित करने की नीति भी है — या यह केवल एक सुर्खी तक सीमित रहेगा।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबकथॉर्न क्या है और इसे 'लद्दाख गोल्ड' क्यों कहते हैं?
सीबकथॉर्न एक सुपरफ्रूट है जो लद्दाख में लगभग 12,000 फीट की ऊँचाई पर उगता है और इसके सुनहरे नारंगी रंग के कारण इसे 'लद्दाख गोल्ड' कहा जाता है। इसमें नींबू से 10 गुना अधिक विटामिन सी और भरपूर एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो इसे पोषण की दृष्टि से असाधारण बनाते हैं।
लद्दाख के सीबकथॉर्न को GI टैग क्यों मिला है?
GI (भौगोलिक संकेत) टैग उन उत्पादों को दिया जाता है जो किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र की अनूठी पहचान रखते हों। लद्दाख का सीबकथॉर्न वहाँ की अत्यंत कठिन जलवायु और ऊँचाई की वजह से अपने विशिष्ट पोषण गुण विकसित करता है, इसीलिए इसे यह संरक्षित दर्जा प्राप्त है।
पीयूष गोयल ने सीबकथॉर्न को लेकर क्या कहा?
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 20 अक्टूबर 2026 को एक्स पर सीबकथॉर्न को 'भारत की प्राकृतिक विरासत का सुनहरा खजाना' बताया। उन्होंने कहा कि यह फल स्थानीय लोगों की आजीविका को मजबूत करने और वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।
सीबकथॉर्न लद्दाख के स्थानीय लोगों के लिए कैसे फायदेमंद है?
सीबकथॉर्न से जूस, सप्लीमेंट, तेल और कॉस्मेटिक उत्पाद बनते हैं जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में माँग बढ़ रही है। GI टैग और सरकारी प्रोत्साहन से लद्दाख के उत्पादकों को इस वैश्विक बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।
गोयल ने न्यूज़ीलैंड को लेकर क्या बड़ा कदम उठाया?
सोमवार को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पुणे में निर्मित जेसीबी मशीनों की न्यूज़ीलैंड के लिए पहली खेप को हरी झंडी दिखाई। इस अवसर पर उन्होंने भारत न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की सराहना करते हुए कहा कि इससे भारत के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए नए निर्यात अवसर खुल रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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